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BIHAR NEWS : गांधी मैदान में दिखेगी मां मुंडेश्वरी धाम की भव्य झांकी, बिहार की धार्मिक और प्राकृतिक विरासत का होगा दीदार

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पटना : इस बार स्वतंत्रता दिवस के राजकीय समारोह में गांधी मैदान सिर्फ देशभक्ति के रंग में ही नहीं रंगेगा,बल्कि बिहार की समृद्ध धार्मिक,प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी यहां दिखेगी. समारोह में पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से कैमूर के प्रसिद्ध मां मुंडेश्वरी धाम पर आधारित भव्य झांकी प्रस्तुत की जाएगी. इको टूरिज्म की थीम पर तैयार की जा रही यह झांकी लोगों को बिहार के प्राचीन धार्मिक स्थलों के साथ-साथ राज्य की प्राकृतिक खूबसूरती से भी रूबरू कराएगी.

स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर विभाग ने झांकी निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है. झांकी में कैमूर की पंवरा पहाड़ी पर करीब 600 फुट की ऊंचाई पर स्थित ऐतिहासिक मुंडेश्वरी मंदिर को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा. प्राचीन धार्मिक स्थल के रूप में अपनी पहचान रखने वाला यह मंदिर बिहार के महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन केंद्रों में भी शुमार है.

धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक विरासत की झलक

इस विशेष झांकी की खासियत सिर्फ मुंडेश्वरी धाम तक सीमित नहीं रहेगी. इसके माध्यम से बिहार के अलग-अलग हिस्सों में फैली प्राकृतिक संपदा को भी एक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा. मुंगेर स्थित भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण्य की प्राकृतिक छटा भी झांकी में देखने को मिलेगी. यहां के घने साल वन और गर्म जलस्रोतों को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा. इससे लोगों को बिहार के वन और वन्यजीव पर्यटन की संभावनाओं की जानकारी मिलेगी.

इसके अलावा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की अद्भुत प्राकृतिक छटा को भी दर्शाया जाएगा. जंगल,वन्यजीव और प्राकृतिक वातावरण के माध्यम से राज्य के प्रमुख इको टूरिज्म स्थलों की विशेषताओं को सामने लाने की कोशिश की जाएगी. विभाग का उद्देश्य झांकी के माध्यम से लोगों को बिहार की प्राकृतिक विरासत से जोड़ने के साथ ही पर्यटन की संभावनाओं के प्रति जागरूक करना है.

‘ज्ञान भारतम्’में दिखेगी भारतीय ज्ञान परंपरा

कला एवं संस्कृति विभाग की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार,स्वतंत्रता दिवस समारोह में विभाग की ओर से‘ज्ञान भारतम्’थीम की झांकी प्रस्तुत की जाएगी. झांकी के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी पांडुलिपियों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण,डिजिटाइजेशन और अभिलेखीकरण की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया जाएगा. इस प्रस्तुति के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सामने लाया जाएगा.