BIHAR NEWS : बिहार में हर दिन लापता हो रही हैं 30 से ज्यादा बेटियां, मानव तस्करी सबसे बड़ी वजह
पटना: बिहार में लड़कियों और महिलाओं की गुमशुदगी एक गंभीर सामाजिक और कानून-व्यवस्था की चुनौती बनती जा रही है. गृह मंत्रालय,राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)और बाल संरक्षण से जुड़े संगठनों के आंकड़ों के अनुसार,राज्य में हर दिन औसतन30से अधिक लड़कियां और महिलाएं लापता हो रही हैं. इनमें सबसे अधिक15से18वर्ष आयु वर्ग की किशोरियां शामिल हैं,जो कुल लापता बच्चों में लगभग77प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक,दर्ज मामलों में करीब42प्रतिशत मामलों के पीछे मानव तस्करी का नेटवर्क जिम्मेदार पाया गया है. तस्कर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों को नौकरी,शादी या बेहतर जीवन का सपना दिखाकर अपने जाल में फंसाते हैं. इसके बाद उन्हें दिल्ली,हरियाणा,पंजाब,मुंबई समेत अन्य राज्यों में ले जाकर जबरन श्रम,शोषण और अन्य अपराधों में धकेलने के मामले सामने आते हैं.
पिछले पांच वर्षों में बिहार में गुमशुदगी और अपहरण के65हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं. हालांकि पुलिस की बरामदगी दर लगभग53.3प्रतिशत रही है. पटना जिले में ही हर साल700से800लड़कियों और महिलाओं के लापता होने के मामले सामने आते हैं.
मानव तस्करी के अलावा सोशल मीडिया,फर्जी पहचान,प्रेम-प्रसंग,पारिवारिक विवाद और आर्थिक तंगी भी गुमशुदगी के प्रमुख कारण बन रहे हैं. पटना,मुजफ्फरपुर,गया,पूर्णिया,भागलपुर,कटिहार,दरभंगा,पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जैसे जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं.
पुलिस का कहना है कि नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर जांचा जाता है. गुमशुदा बच्चों और महिलाओं की जानकारी एक विशेष राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड की जाती है,ताकि देशभर की पुलिस एजेंसियां उनकी तलाश कर सकें. विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता बढ़ाने,मानव तस्करी के गिरोहों पर सख्त कार्रवाई और परिवारों की सतर्कता से ही इस गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-