BIHAR NEWS : शहीद जवान अशोक प्रसाद का पार्थिक शरीर पहुंचा पैतृक आवास, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

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आरा : छत्तीसगढ़ में कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान अशोक प्रसाद का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके पैतृक निवास पहुंचा. शहीद का शव पहुंचते ही जिले के करनामेपुर ग्राम में गहरा शोक व्याप्त हो गया.

तिरंगे में लिपटे वीर सपूत को देखकर परिवारजनों,ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की आँखें नम हो गई. स्थानीय विधायक राकेश रंजन ओझा सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. इस दौरान विधायक ओझा ने शोक संतप्त परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और शहीद की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की.

विदित हो कि यह दुखद घटना बुधवार सुबह घटित हुई,जब छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के कोटा जंगल में तैनात शाहपुर प्रखंड के करनामेपुर गांव निवासी सीआरपीएफ जवान अशोक प्रसाद का ड्यूटी के दौरान हृदयगति रुकने से असामयिक निधन हो गया. सीआरपीएफ की131वीं बटालियन द्वारा दूरभाष पर जैसे ही उनके निधन की सूचना परिजनों को दी तोपूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और करनामेपुर गांव में मातम छा गया.

शहीद अशोक प्रसाद देश सेवा के प्रति पूर्णतः समर्पित एक कर्तव्यनिष्ठ जवान थे. उनके निधन की खबर सुनते ही उनकी पत्नी उषा देवी,तीनों पुत्रों और अन्य परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया. घर में कोहराम मच गया और इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने के लिए आस-पास के ग्रामीण और शुभचिंतक उनके आवास पर पहुंचने लगे. हर आंख में आंसू थे और हर कोई इस अप्रत्याशित क्षति से स्तब्ध था.

परिजनों ने बताया कि अपने निधन से ठीक एक रात पहले,देर रात,अशोक प्रसाद ने अपने पोते के जन्मदिन के अवसर पर मोबाइल के जरिए पूरे परिवार से वीडियो कॉल पर बातचीत की थी. इस बातचीत के दौरान उन्होंने परिवार को बताया था कि मार्च महीने में उनकी पोस्टिंग मुजफ्फरपुर होने की संभावना है. इस खबर से परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई थी और सभी उनके जल्द घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. कुछ ही घंटों बाद उनके निधन की सूचना ने परिवार सहित पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया. यह विडंबना ही थी कि जिस खुशी की उम्मीद में परिवार डूबा था,वह पलभर में गहरे दुख में बदल गई. अशोक प्रसाद वर्ष2001में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में चयनित हुए थे. अपने लंबे सेवाकाल के दौरान उन्होंने देश के विभिन्न नक्सल प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में अत्यंत निष्ठा और साहस के साथ अपनी सेवाएं प्रदान की. वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोटा जंगल जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में तैनात थे. वे अपने पीछे अपनी पत्नी उषा देवी के अलावा तीन पुत्र गंगासागर प्रसाद,बिनोद प्रसाद और पवन प्रसाद तथा एक पुत्री सावित्री देवी को छोड़ गए हैं.

आरा से विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट---