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BIHAR NEWS : राजस्व कर्मियों की हड़ताल पर सरकार सख्त, अंतिम नागरिक तक ‘आर्थिक न्याय’ पहुँचाने का निर्देश

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पटना : राज्य सरकार ने राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि अंतिम नागरिक तक आर्थिक न्याय पहुँचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसी को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव श्री सी.के. अनिल ने सोमवार को सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर राजस्व व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं.

प्रधान सचिव ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य सरकार द्वारा 18 दिसंबर 2025 से लागू सात निश्चय-3 के सातवें स्तंभ के रूप में इज ऑफ लिविंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है,जिसका उद्देश्य राज्य के नागरिकों तकEconomic Justice (आर्थिक न्याय) सुनिश्चित करना है. उन्होंने बताया कि आर्थिक न्याय भारत के संविधान के अनुच्छेद 14,21,38 तथा 39 (b)और (c)में निहित है,जिसे व्यवहारिक रूप में लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है.

पत्र में यह भी कहा गया है कि डिजिटल डिवाइड के कारण राजस्व प्रशासन की कई योजनाएं अभी भी कतार में खड़े अंतिम नागरिक तक नहीं पहुँच पा रही है,जो चिंता का विषय है. ऐसे में अंचल अधिकारी,राजस्व अधिकारी और राजस्व कर्मचारी केवल प्रशासनिक इकाई ही नहीं बल्कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं.

प्रधान सचिव ने दो टूक शब्दों में कहा कि पिछले दो महीनों से राजस्व कर्मचारियों द्वारा लिया गया सामूहिक अवकाश पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका है,जिसके कारण एक प्रकार की गतिरोध (स्टेलमेट) की स्थिति बन गई है. इससे आम लोगों को राजस्व सेवाएं प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राजस्व कर्मचारियों के नियुक्ति प्राधिकार और अनुशासनिक प्राधिकार समाहर्ता होते हैं. यद्यपि कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों का पालन आवश्यक है,लेकिन इससे समाहर्ताओं की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती. इसलिए समाहर्ताओं को अपने अधिकारों और दायित्वों का प्रभावी उपयोग करने की आवश्यकता है.

प्रधान सचिव ने कहा कि जब जमीनी स्तर पर कर्मी हड़ताल पर रहते हैं या फिर मुंशी और दलालों के माध्यम से काम कराया जाता है,तब संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार केवल कागजी बनकर रह जाते हैं. इससे आम नागरिकों को उचित आर्थिक न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न होती है.

उन्होंने यह भी कहा कि राजस्व प्रशासन का प्रमुख लक्ष्य राज्य के 4.5 करोड़ जमाबंदीदारों को सरल,सुलभ और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है,ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की रिश्वत या बिचौलियों का सहारा न लेना पड़े.

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी 38 जिलों में‘समृद्धि यात्रा’और उपमुख्यमंत्री द्वारा 10 जिलों में‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’के माध्यम से जनता और राजस्व विभाग के बीच सीधा संवाद स्थापित किया गया है,जिससे प्रशासनिक सुधारों को गति मिली है.

प्रधान सचिव ने अपने पत्र के अंत में कहा कि आर्थिक न्याय संविधान के अनुच्छेद 38 और 39 (b)एवं (c)में निहित एक महत्वपूर्ण दायित्व है और इसे जमीन पर उतारने में प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों की संयुक्त भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को स्मरण करते हुए अधिकारियों से इस दिशा में सतत प्रयास करने का आह्वान किया है.

पटना से राजीव रंजन की रिपोर्ट--