बिहार के लिए ऐतिहासिक क्षण : दीदी की लाइब्रेरी को अमेरिकी विश्वविद्यालय की पत्रिका में मिली वैश्विक पहचान
पटना : बिहार ने एक बार फिर से वैश्विक स्तर पर अपना पहचान स्थापित किया है. दरअसल,अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से प्रकाशित प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका स्टैनफोर्ड सोशल इनोवेशन रिव्यू के अंक में राज्य में संचालित सामुदायिक पुस्तकालय सह करियर विकास केंद्र (जीविका दीदी की लाइब्रेरी) को स्थान मिला है.
इस उपलब्धि के बाद ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि बिहार की धरती से शुरू की गई पहल आज वैश्विक स्तर पर महिला नेतृत्व, सामुदायिक नवाचार और शिक्षा के माध्यम से पीढ़ीगत गरीबी निवारण के एक प्रभावी मॉडल के रूप में पहचानी जा रही है.यह उपलब्धि हरेक जीविका दीदी एवं उनके भावी पीढ़ी के अटूट विश्वास को समर्पित है.अगर सही मार्गदर्शन एवं अवसर मिले तो गांव की महिलाएं भी समाज को बदलने में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं.
हाल के कुछ दिन पहले अमेरिकी स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से प्रकाशित होने वाली स्टैनफोर्ड सोशल इनोवेशन रिव्यू नामक एक प्रमुख पुरस्कार विजेता पत्रिका में जीविका की लाइब्रेरी और उसकी सफलता को लेकर एक विस्तृत कहानी का प्रकाशन किया गया है.इसमें भोजपुर जिले के कुलहरिया एवं अमहारा गांव में संचालित दीदी की लाइब्रेरी पर ध्यान केंद्रित है.इस पूरी कहानी में राज्य में नई पहल के तहत शुरू दीदी की लाइब्रेरी से हर वर्ष निकलने वाली प्रतिभा,ग्रामीण घरेलू महिलाओं के लाइब्रेरी के सहारे आत्मस्वलंबन की गाथा को शामिल किया गया है.
ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर और साक्षर बनाने की दिशा में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से दीदी की लाइब्रेरी का संचालन किया जा रहा है.यह पूरी पहल बिहार सरकार के सामुदायिक पुस्तकालय और करियर विकास केंद्र (सीएलसीडीसी) कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.पहला पुस्तकालय फरवरी2023में खुला था,और अब33जिलों में117पुस्तकालय संचालित हैं.इन केंद्रों पर पुस्तकालय वेबिनार, करियर कार्यशालाएं, अंग्रेजी प्रशिक्षण,रोजगार एवं उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश परीक्षा की तैयारियों में ग्रामीण प्रतिभाओं को सहयोग दिया जा रहा है.