BIG BREAKING : पटना NEET छात्रा केस में बड़ा मोड़, हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को डिफॉल्ट बेल, CBI की देरी पर उठे सवाल
पटना : राजधानी पटना में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत से जुड़े चर्चित मामले में बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है. शंभु गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को कोर्ट से डिफॉल्ट बेल मिल गई है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब मामले की जांच कर रही Central Bureau of Investigation (CBI) तय समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी.
कानूनी प्रावधानों के मुताबिक,यदि जांच एजेंसी 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं करती है,तो आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिल जाता है. इसी आधार पर कोर्ट ने मनीष रंजन को राहत दी. इससे पहले उनकी जमानत याचिकाएं कई बार खारिज हो चुकी थीं,लेकिन इस बार तकनीकी आधार पर उन्हें जमानत मिल गई.
यह मामला जनवरी 2026 का है,जब पटना के एक हॉस्टल में रहकरNEETकी तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. शुरुआती जांच के बाद मामला गंभीर हुआ और बढ़ते दबाव के बीच जांचCentral Bureau of Investigationको सौंप दी गई.
जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए. मनीष रंजन पर साक्ष्य मिटाने,लापरवाही और घटनाक्रम में संदिग्ध भूमिका के आरोप लगे थे. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था,जहां वे लंबे समय से बंद थे.
अब डिफॉल्ट बेल मिलने के बाद एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं. पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों में भी नाराजगी देखी जा रही है.
फिलहाल मामला अदालत में लंबित है और आगे की सुनवाई में जांच की दिशा और साक्ष्यों की स्थिति अहम भूमिका निभाएगी. इस बीच, यह मामला बिहार में कानून-व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--