AISA–AIPWA की ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ का समापन : बिहार में बढ़ती हिंसा के खिलाफ 10 फरवरी को पटना में ऐतिहासिक विधानसभा मार्च
पटना : AISAऔरAIPWAके संयुक्त नेतृत्व में चल रही‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’का सोमवार को पटना के स्टेशन गोलंबर पर आयोजित जनसभा के साथ समापन हुआ. मंगलवार, 10 फरवरी को पटना में विधानसभा मार्च करने की घोषणा की गई,जो राज्य में महिलाओं,छात्राओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा तथा प्रशासनिक संरक्षण में हो रहे अपराधों के खिलाफ निर्णायक प्रतिरोध होगा.
समापन सभा कोAIPWAकी महासचिव मीना तिवारी,विधान पार्षद शशि यादव,महबूब आलम, AISAकी प्रीति कुमारी,सबा आफरीन सहित कई नेताओं ने संबोधित किया. वक्ताओं ने कहा कि चुनाव के बाद बिहार में छात्राओं,कामकाजी महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हिंसा में चिंताजनक वृद्धि हुई है,जो राज्य की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता को उजागर करती है.
नेताओं ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं,बल्कि सत्ता के संरक्षण में अपराधियों के हौसले बुलंद होने का प्रत्यक्ष परिणाम है. प्रशासन का रवैया न्याय दिलाने के बजाय मामलों को दबाने,सबूत कमजोर करने और प्रभावशाली अपराधियों को बचाने का रहा है. यही कारण है कि बिहार महिलाओं के लिए असुरक्षित राज्य बनता जा रहा है.
सभा में पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल और परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ेNEETछात्रा मामलों पर गहरी चिंता जताई गई. वक्ताओं ने कहा कि इन मामलों में पुलिस–प्रशासन ने पीड़ित पक्ष के बजाय उन्हें ही निशाना बनाया. परिजनों पर दबाव,बयान बदलवाने की कोशिश, CCTVफुटेज छिपाना,फॉरेंसिक जांच से बचना और मीडिया पर दबाव बनाना यह दर्शाता है कि राज्य तंत्र सच्चाई को दबाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. जन दबाव के बादCBIजांच की अनुशंसा हुई है,लेकिन न्याय सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज की निगरानी में जांच कराना जरूरी है.
दरभंगा के बेला में 6 वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या की घटना का उल्लेख करते हुए नेताओं ने कहा कि यह घटना साबित करती है कि बिहार में बच्चियाँ तक सुरक्षित नहीं हैं. ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई के अभाव में अपराधियों को खुली छूट मिलती है.
AISA–AIPWAने स्पष्ट किया कि 10 फरवरी को होने वाला विधानसभा मार्च महिला सुरक्षा को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने का मार्च होगा. मार्च के माध्यम से सरकार से मांग की जाएगी कि महिला और बाल अपराधों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो,सभी निजी हॉस्टलों और कोचिंग संस्थानों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए,पीड़ित परिवारों को भयमुक्त वातावरण और न्याय सुनिश्चित किया जाए,तथा चुनाव के बाद महिला हिंसा में हुई वृद्धि की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए.
नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने अब भी तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह माना जाएगा कि राज्य सरकार इस हिंसा की नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदार है. 10 फरवरी का विधानसभा मार्च इसी जवाबदेही को तय करने की दिशा में निर्णायक कदम होगा.
पटना से अंकिता की रिपोर्ट-