82 वर्ष में प्रशांत बोस का निधन : माओवादी संगठन के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य थे किशन दा,बिरसा मुंडा जेल में थे बंद
रांची:प्रतिबंधित CPI-माओवादी संगठन के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ ‘किशन दा’ का शुक्रवार को निधन हो गया. अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रिम्स में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. 82 वर्ष के उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली. अधिकारियों के अनुसार,प्रशांत बोस बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद थे. शुक्रवार तड़के उन्हें सांस लेने में गंभीर दिक्कत हुई. जिसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच रिम्स लाया गया था.
माओवादी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेता थे
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं. पश्चिम बंगाल के मूल निवासी प्रशांत बोस माओवादी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे. उन्हें CPI-माओवादी के महासचिव नंबाला केशव राव के बाद दूसरा सबसे बड़ा नेता माना जाता था. वे केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के प्रमुख सदस्य थे और संगठन के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के सचिव भी रह चुके हैं.माओवादी सर्कल में उन्हें ‘मनीष’ और ‘बुद्धा’ जैसे कई नामों से जाना जाता था. करीब चार दशकों तक सक्रिय रहने वाले प्रशांतबोस को संगठन का बड़ा रणनीतिकार,थिंक टैंक और विचारक माना जाता था.
12 नवंबर 2021 मेंपत्नी के साथ हुई थी गिरफ्तारी
प्रशांत बोस को उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा टोल ब्रिज के पास गिरफ्तार किया गया था. उस समय उनकी गिरफ्तारी पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वे झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में 200 से ज्यादा माओवादी घटनाओं में शामिल थे.
न्यायिक हिरासत मेंबीमारियों से जूझ रहे थे
गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में थे और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे. उनकी मौत के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. रिम्स के ट्रामा सेंटर से प्रशांत बोस के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी.