आ गए NCRB के आंकड़े, अपराध के मामले में बिहार की अच्छी और बुरी तस्वीर दोनो है
जमीन विवाद के कारण सबसे ज्यादा हत्या बिहार में, लेकिन महिलाओं के लिए सेफ है बिहार
PATNA:-NCRB ने 2020 के अपराध के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों में बिहार के लिए दो तस्वीर है, एक अच्छी और एक बुरी। बुरी तस्वीर ये है कि मर्डर के मामले में बिहार दूसरे नंबर पर है और सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि मर्डर के पीछे सबसे ज्यादा वजह ज़मीन विवाद के होते हैं। यानी जमीन के चक्कर में सबसे ज्यादा हत्या होती है। हालांकि अच्छी तस्वीर ये है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले में बिहार बाकी राज्यों से बेहतर है। बिहार महिलाओं के खिलाफ अपराध में नौवें स्थान पर है। बात सबसे पहले बुरी तस्वीर की ।
महज 1 महीने पहले नालंदा से चीख पुकार और मातम की तस्वीर देश भर की सुर्खियां बनी थीं। जब 4 अगस्त को नालंदा के लोदीपुर गांव में ज़मीन के चंद टुकड़े के लिए एक परिवार के 6 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और 2 घायल हो गए। मरने वालों में एक ही परिवार के पिता और दो बेटे थे। और परिवार में रह गईं औरतें और बच्चे। सोचिए ज़रा बिहार में ज़मीन के चंद टुकड़े के विवाद में पूरा परिवार उजड़ जाता है और 6 लोगों की हत्या कर दी जाती है। बिहार की क्राइम कुंडली भी यही बताती है कि यहां ज़मीन के लिए ही लोगों की जान जाती है और सबसे ज्यादा हत्या जमीन विवाद में होती है।
NCRB ने साल 2020 के अपराध के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक
मर्डर के मामले में दूसरे नंबर पर बिहार है
यूपी के 3,939 के बाद बिहार में 3,195 हत्या के मामले
हत्या के प्रयास के 13,202 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर बिहार
हत्या के पीछे सबसे ज्यादा ज़मीन विवाद वजह है
2020 में ज़मीन विवाद को लेकर 815 हत्या हुई
ज़मीन विवाद के मामले में सबसे ऊपर है बिहार
2020 में ज़मीन विवाद के 4,838 मामले सामने
1,340 ज़मीन विवाद के मामलों के साथ महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर
राजनीतिक कारणों से बिहार में सबसे ज्यादा 16 हत्या हुई
पुलिस और सरकारी अधिकारियों पर हमले के 77 मामले
ज़ाहिर है बिहार में जब तक ज़मीन विवाद बना रहेगा, तब तक परिवार उजड़ता रहेगा, रिश्तों कत्ल होता रहेगा और मर्डर के मामले में बिहार पहले दूसरे नंबर पर आता रहेगा। ऐसे में जमीन विवाद के मसले को सुलझाने के लिए सरकार को कोशिशें तेज करनी होगी।
हालांकि NCRB के आंकड़ों में बिहार की एक बेहतर तस्वीर भी नज़र आती है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले में बिहार बाकी राज्यों से बेहतर है। जिस बिहार में कभी महिलाओं और लड़कियों के लिए निकलना मुश्किल था, उस बिहार के लिए ये बेहतर तस्वीर है। 2020 में दर्ज की गई 15,359 घटनाओं के साथ, बिहार महिलाओं के खिलाफ अपराध में नौवें स्थान पर है। 49, 385 मामलों के साथ उत्तर प्रदेश, 36, 439 मामलों के साथ पश्चिम बंगाल और 34, 535 मामलों के साथ राजस्थान, उस मोर्चे पर तीन सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य थे। बिहार में 860 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए, जो राजस्थान में 5,310 से कम और यूपी में 2,769 दर्ज किए गए। वहीं महिलाओं के साथ छेड़छाड़ या तंग करने के इरादे से महिलाओं पर हमले के मामलों में, बिहार उन राज्यों में 21वें स्थान पर है जहां 2020 में सबसे अधिक घटनाएं हुई हैं। वर्ष 2020 के दौरान बिहार में बच्चों के खिलाफ अपराधों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट में एक और उम्मीद की किरण देखी गई। 2019 में, बिहार 9,320 ऐसे मामले दर्ज करते हुए चौथे स्थान पर रहा, लेकिन 2020 में, राज्य ने केवल 6,591 मामले दर्ज किए। इसी तरह, यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोक्सो) और वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध से संबंधित मामलों में, बिहार पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे कई राज्यों से पीछे था। कुल मिलाकर, बिहार ने 2019 की तुलना में भारतीय दंड संहिता और विशेष और स्थानीय कानूनों के तहत अपराधों की संख्या में 4.3% की कमी दर्ज की गई।
सुमित झा,कशिश न्यूज