मृत्युंजय तिवारी ने RJD से दिया इस्तीफा : नाराजगी जताते हुए कहा-40 वर्षों तक निष्ठा और समर्पण के साथ काम करने के बावजूद नहीं मिला सम्मान
पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक पार्टी के प्रवक्ता रहे मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफा बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। उन्होंने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए कहा कि करीब 40 वर्षों तक निष्ठा और समर्पण के साथ काम करने के बावजूद उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला। कशिश न्यूज़ से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि लगातार उपेक्षा के कारण उन्हें यह फैसला लेना पड़ा।
मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफाRJD के लिए बड़ा संकेत
राजनीतिक दृष्टि से यह इस्तीफा कई संकेत देता है। सबसे पहले, विधानसभा चुनाव से पहले किसी वरिष्ठ और मुखर नेता का पार्टी छोड़ना RJD के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। मृत्युंजय तिवारी लंबे समय तक पार्टी का पक्ष मीडिया में मजबूती से रखते रहे हैं। ऐसे में उनका जाना संगठन के भीतर असंतोष और नेतृत्व शैली को लेकर सवाल खड़े कर सकता है।
RJD मेंअंदरूनी कलह तो नहीं!
दूसरी ओर, विपक्ष इस इस्तीफे को RJD में बढ़ती नाराजगी और अंदरूनी कलह के मुद्दे के रूप में उठाने की कोशिश कर सकता है। यदि आने वाले दिनों में अन्य नेताओं की ओर से भी इसी तरह की नाराजगी सामने आती है, तो इसका राजनीतिक असर और व्यापक हो सकता है।
मृत्युंजय तिवारी का अगला राजनीतिक कदम पर टिकी निगाहें
हालांकि, किसी एक नेता के इस्तीफे से पार्टी की चुनावी स्थिति पर कितना असर पड़ेगा,इसका आंकलन अभी करना जल्दबाजी होगी। यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि RJD नेतृत्व इस स्थिति को कैसे संभालता है और मृत्युंजय तिवारी का अगला राजनीतिक कदम क्या होता है। यदि वे किसी अन्य दल में शामिल होते हैं या सक्रिय राजनीतिक भूमिका निभाते हैं, तो बिहार की चुनावी राजनीति में इसका प्रभाव और अधिक दिखाई दे सकता है। फिलहाल, उनका इस्तीफा चुनावी मौसम में RJD के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।