मनरेगा बचाओ संग्राम : गिरिडीह में मजदूरों को दी गई नए कानून की जानकारी, केंद्र सरकार पर लगाया अधिकार हनन करने का आरोप
गिरिडीह:जिले के बेंगाबाद प्रखंड के चपुआडीह गांव में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत जन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मजदूरों से सीधा संवाद कर उन्हें मनरेगा कानून में किए गए बदलावों की जानकारी दी गई. बताया गया कि किस प्रकार केंद्र सरकार नए प्रावधानों के जरिए मजदूरों और पंचायतों के अधिकारों का हनन कर रही है.
'वीबी-जी राम जी' को बताया हक मारने का कानून
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सतीश केडिया ने कहा कि पुराने मनरेगा कानून के तहत प्रत्येक मजदूर को काम की गारंटी थी.काम मांगने के 15 दिनों के अंदर रोजगार नहीं मिलने पर मजदूर कानूनी रूप से भत्ते का हकदार होता था लेकिन, नए कानून में इस प्रावधान को खत्म कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि पहले मजदूर अपनी आवश्यकता के अनुसार जब चाहें काम मांग सकते थे, अब यह अधिकार भी छीना जा रहा है.
कमजोर राज्यों पर पड़ेगाअतिरिक्त आर्थिक बोझ
नए कानून के तहत ग्राम पंचायतों के अधिकारों का भी हनन हो रहा है. पहले योजनाओं का चयन ग्राम सभा और ग्राम पंचायत करती थीं जबकि, अब योजनाएं सीधे केंद्र सरकार द्वारा तय की जाएगी. साथ ही पहले मनरेगा योजनाओं का शत-प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, जिसे अब घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है. इससे कमजोर राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा.
कांग्रेस पार्टी करेगी आंदोलन
सतीश केडिया ने कहा कि इन्हीं मुद्दों को लेकर कांग्रेस पार्टी मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत आंदोलन करेगी. उन्होंने कांग्रेस की चार प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि गारंटीकृत काम की बहाली हो, मनरेगा में किए गए सभी बदलाव वापस लिए जाएं, काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली की जाए और राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये निर्धारित की जाए. उन्होंने बताया कि इन मांगों को लेकर कांग्रेस पार्टी सभी ग्राम पंचायतों तक आंदोलन करेगी.