लोहरदगा में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही : गर्भवती महिला को स्कूटी पर रिम्स ले जाने का मामला
लोहरदगा: सदर अस्पताल से एक गर्भवती महिला कोगंभीर स्थिति में रिम्स रेफर करने पर उसे स्लाइन चढ़ाते हुए स्कूटी पर बैठाकर ले जाने का मामला सामने आया है. घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है.
जिले के कैरो प्रखंड के तोड़ांग गांव की गर्भवती महिला को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जांच के दौरान ड्यूटी पर मौजूद महिला चिकित्सक ने पाया कि प्रसव की निर्धारित तिथि बीत जाने के 17 दिन बाद भी प्रसव पीड़ा नहीं होने पर महिला की स्वास्थ्य स्थिति को गंभीर समझते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स रेफर कर दिया गया.
चिकित्सक और मेडिकल स्टॉफ ने महिला को 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने की सलाह दी थी. हालांकि, स्वजनों ने डॉक्टर और चिकित्साकर्मियों को कथित रूप से बताया कि उनके पास खुद का चौपहिया वाहन उपलब्ध है. इसके बाद जो दृश्य सामने आया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए. महिला को स्लाइन लगी हुई अवस्था में ही एक व्यक्ति द्वारा स्कूटी पर बैठाकर अस्पताल परिसर से बाहर ले जाया गया.
बताया जा रहा है कि स्कूटी पर तीन लोग सवार थे और महिला की स्थिति गंभीर होने के बावजूद एंबुलेंस का उपयोग नहीं किया गया. जो व्यक्ति महिला को स्कूटी में लेकर गया, वह महिला का रिश्तेदार भी नहीं था. इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है. चर्चा यह भी है कि महिला को रिम्स ले जाने के बजाय शहर के ही एक निजी अस्पताल में ले जाया गया.
मामले में निजी अस्पतालों के कथित बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पूर्व में भी सदर अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पतालों के एजेंटों द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं. तत्कालीन उपायुक्त डॉ. ताराचंद ने ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए सदर अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की लाइव मानिटरिंग अपने कार्यालय से कराने की व्यवस्था की थी. हालांकि, उनके स्थानांतरण के बाद एक बार फिर बिचौलियों की सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई.