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बिहार पंचायती राज विभाग का सख्त रुख : 1 प्रतिशत से कम खर्च करने वाले मुखिया और पंचायत सचिवों पर गिरेगी गाज

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पटना: बिहार में पंचायतों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर पंचायती राज विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन पंचायतों ने छठे वित्त आयोग की अनुशंसा पर मिली राशि का एक प्रतिशत से भी कम खर्च किया है, वहां के मुखिया और पंचायत सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया।

पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की अध्यक्षता में आयोजित प्रशिक्षण-सह-समीक्षात्मक बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पंचायतों में विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सचिव मनोज कुमार ने कहा कि 15 लाख रुपये से अधिक की लागत वाली योजनाओं में बिना निविदा प्रकाशित किए कार्य कराना नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में छह जर्जर पंचायत सरकार भवनों के मामलों को भी गंभीरता से लिया गया। इन मामलों में संबंधित जिला पंचायत राज पदाधिकारियों (डीपीआरओ) पर विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना में लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों पर आर्थिक दंड लगाने का भी फैसला लिया गया।

मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि पिछले छह महीनों में विभाग ने 28 हजार करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण-पत्र जमा कराए हैं। उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को प्राथमिकता के आधार पर राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि विकास कार्यों में तेजी आए और पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बने।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि डाकघरों को चरणबद्ध तरीके से पंचायत सरकार भवनों में स्थानांतरित किया जाएगा। वहीं, पंचायत भवनों के निर्माण में घटिया गुणवत्ता बरतने वाली एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने और स्थानीय स्तर पर ही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।