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BIHAR NEWS : उत्तर बिहार में नाबार्ड योजना का मिलेगा लाभ,अब नहीं झेललना पड़ेगा बाढ़ का कहर

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पटना:उत्तर बिहार के लोगों को हर साल बारिश के कहर का असर झेलना पड़ता है. बाढ़ के दिनों में इन ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट जाता था. कोसी, गंडक, बागमती और कमला जैसी सदानीरा नदियों के उफान के कारण बाढ़ की गंभीर समस्या से लोगों को गुजरना पड़ता है. लेकिन, वहां अब ग्रामीण विभाग के प्रयासों से बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. दशकों से बरसात के दिनों में टापू बन जाने वाले गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नाबार्ड योजना के तहत नदियों पर ग्रामीण पुलों का जाल बिछाया जा रहा है.

दरभंगा में74 पुलों का निर्माण

उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों में पुल निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. इस दिशा में पूर्वी चंपारण जिले में सर्वाधिक 50 ग्रामीण पुलों का निर्माण किया जा चुका है. वहीं, बाढ़ की मार झेलने वाले दरभंगा जिले में यातायात को सुगम और बाधा रहित बनाने के लिए 74 पुलों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 54 ग्रामीण पुल बनकर तैयार हो चुके हैं.

किसी भी गांव को संपर्कता से वंचित नहीं रखने का लक्ष्य

भौगोलिक दृष्टिकोण से संवेदनशील सीतामढ़ी जिले में 44 पुलों और मधुबनी जिले में 55 पुलों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है. इसके अतिरिक्त, समस्तीपुर जिले में भी 58 पुलों का निर्माण कर संपर्कता सुदृढ़ की गई है, ताकि कोई भी गांव संपर्कता से वंचित न रहे.

ग्रामीण कार्य विभाग की मेहनत लाएगी रंग

ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा नाबार्ड के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बारहमासी संपर्कता सुनिश्चित करने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है. पूर्व में इन इलाकों में हल्की सी बारिश या नदियों का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन का एकमात्र सहारा छोटी और असुरक्षित नावें हुआ करती थीं.

इन पुलों से हो रहा व्यापक परिवर्तन

अब नाबार्ड योजना के तहत निर्मित इन पुलों से व्यापक परिवर्तन आया है. इन पुलों के निर्माण से उत्तर बिहार के सुदूर गांवों को बारहमासी सड़क संपर्कता प्राप्त हुई है, जिससे इन गांवों के विकास की रफ्तार भी तेज हुई है.