BIHAR NEWS : यूनिसेफ ने बिहार के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए विधायकों के साथ किया संवाद,कई पहलुओं पर चर्चा

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पटना:यूनिसेफ ने बिहार के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए विधायकों के साथ संवाद आयोजित किया.बाल अधिकारों पर विधायी संवाद का आयोजन किया गया.जिसमें विधायकों, समिति अध्यक्षों और नीति विशेषज्ञों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया. विधायी निगरानी को सशक्त बनाने केउद्देश्य सेइस परामर्श बैठक का आयोजन किया गया था. इसके तहत बिहार में बच्चों के समग्र विकास के लिए ठोस कदमों पर चर्चा किया गया.

विधानसभा अध्यक्ष कीअध्यक्षता मेंकार्यक्रम

पटना के होटल चाणक्या में बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किया गया.संवाद में बाल स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा और सीखने के स्तर, स्वच्छता, बाल संरक्षण, किशोर विकास और वंचित वर्गों की समावेशिता जैसे प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया.

बच्चों के भविष्य कीचुनौतियां बाकि

सभा को संबोधित करते हुए बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि यूनिसेफ के सहयोग से केंद्र सरकार और बिहार सरकार ने राज्य में विद्यालयों में नामांकन, टीकाकरण कवरेज और बाल पोषण में उल्लेखनीय प्रगति की है. हालांकि,उन्होंने स्वीकार किया है कि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं. बच्चों को राज्य की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए उन्होंने सरकार, समुदाय और परिवारों के समन्वित प्रयासों पर बल दिया, ताकि बिहार के सभी बच्चे सुरक्षित, स्वस्थ्य और समान अवसरों से युक्त भविष्य सुनिश्चित किया जा सके.

विधायकों से बच्चों को “चैंपियन” बनाने का आह्वान

यूनिसेफ बिहार प्रमुख आर्टाशेस मिर्ज़ोयान ने विधायकों से बच्चों को “चैंपियन” बनाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आपके पास बच्चों के जीवन को आकार देने की असाधारण शक्ति है. ऐसी शक्ति जिसे कोई एनजीओ, कोई यूएन एजेंसी या कोई विभाग दोहरा नहीं सकता. आप कानून बनाते हैं, बजट स्वीकृत करते हैं और राज्य की सर्वोच्च परिषदों में जनता की आवाज़ हैं, इसलिए बिहार के विकास एजेंडा के केंद्र में बच्चों को रखना आवश्यक है” उन्होंने यह भी कहा कि विधायी निगरानी को मजबूत करने से नीतियों का वास्तविक लाभ सुनिश्चित होगा, खासकर सबसे वंचित और कमजोर वर्गों के बच्चों तक.

'बच्चों के अधिकार और कल्याण की रक्षा के लिए ठोस नीति का आग्रह'

अल्पसंख्यक समिति के अध्यक्ष एवं विधायक अख़तरुल ईमान ने कहा कि बच्चों का कल्याण नीति-निर्माताओं की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए. यूनिसेफ़ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मंच बच्चों और किशोरों की वास्तविक समस्याओं को समझने का अवसर प्रदान करते हैं. उन्होंने विधायकों से इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए बच्चों के अधिकारों और उनके कल्याण की रक्षा के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने का आग्रह किया.ॉ

'बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सक्रिय पहल की जरूरत'

वहीं, एससी/एसटी कल्याण समिति की सदस्य एवं विधायक ज्योति देवी ने कहा कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में की थी और टीकाकरण अभियानों में यूनिसेफ के साथ काम किया है. बाल कल्याण में संगठन के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने सहकर्मी विधायकों से बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सक्रिय पहल करने का आह्वान किया.

बच्चों के अभिभावक बनकर सोचने का आग्रह

बिहार विधानसभा की सचिव ख्याति सिंह ने अपने संबोधन में विधायकों से राज्य के हर बच्चों के अभिभावक बनकर सोचने का आग्रह किया. ताकि बच्चे हर क्षेत्र में आगे बढ़ सके.इस अवसर पर यूनिसेफ बिहार के सोशल पॉलिसी एंड सोशल प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट अभय कुमार ने एक तकनीकी प्रस्तुति दी. उन्होंने कुपोषण, सीखने की कमी, स्वच्छता तक पहुंच, बाल विवाह, बाल श्रम तथा किशोर सहभागिता और संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता जैसे मुद्दों को रेखांकित किया. बच्चों से जुड़े कार्यक्रमों पर सार्वजनिक व्यय और अपेक्षित परिणामों पर भी विस्तार से चर्चा की गई.

'वंचित वर्गों के बीच अब भी कई महत्वपूर्ण अंतर'

विशेषज्ञों ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और पोषण से जुड़ी पहलों के माध्यम से बिहार ने प्रगति की है, लेकिन खासकर वंचित वर्गों के बीच अब भी कई महत्वपूर्ण अंतर बने हुए हैं। संवाद के अंत में इस बात पर सहमति बनी कि विधायकों, सरकारी विभागों और विकास साझेदारों के बीच समन्वय को और सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि राज्य का विकास एजेंडा के केंद्र में बच्चों को रखा जा सके।कार्यक्रम का समापन यूनिसेफ़ बिहार के वॉश विशेषज्ञ प्रभाकर सिन्हा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया.