आरा के भरत तिवारी एनकाउंटर मामला : पुलिस की कार्रवाई पर सवाल,थानेदार समेत कई पुलिसकर्मी निलंबित
BIHAR NEWS:आरा के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस की कार्रवाई के बाद जहां एक ओर कानून-व्यवस्था और पुलिस की सुरक्षा का मुद्दा सामने आया है, वहीं दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस की कार्यशैली भी चर्चा के केंद्र में आ गई है.
पीएमसीएच में मौत के बाद उठ रहे सवाल
भोजपुर पुलिस ने पहले भरत तिवारी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए उसके इलाज की बात कही थी। बताया गया था कि उसका उपचार मानसिक आरोग्यशाला में कराया जा रहा था, लेकिन बाद में पुलिस कार्रवाई में उसे गोली लगने और इलाज के दौरान पीएमसीएच में उसकी मौत हो जाने के बाद कई सवाल उठने लगे हैं।
भरत तिवारी ने पुलिस के सामने किया था आत्मसमर्पण
सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार भी सौंप दिया था। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष भी अभी सामने नहीं आया है।
मृतक के पिता का दावा-बेटे पर नहीं था कोई आपराधिक मामला
मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी का आरोप है कि उनके बेटे पर कोई आपराधिक मामला नहीं था और उसने कोई अपराध नहीं किया था। उनका कहना है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उस पर गोली चलाई गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई आवश्यकता से अधिक कठोर थी।
इस पूरे मामले में उठ रहे कई गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि संबंधित व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ था,जैसा कि पहले बताया गया था, तो क्या स्थिति को बातचीत और अन्य वैकल्पिक तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता था? वहीं दूसरी तरफ यह भी तथ्य है कि पुलिस का कहना था कि वह हथियार लेकर पुलिसकर्मियों को धमका रहा था, जिससे सुरक्षा का गंभीर खतरा पैदा हुआ था।
लोगों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
फिलहाल मामले को लेकर बहस तेज है। लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पुलिस की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी या नहीं। सच क्या है, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्यों और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही निकल सकेगा।