
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
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2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहन दास करमचंद गांधी एक नाम, एक व्यक्तित्व और एक कभी अप्रासंगिक ना होने वाली सोच है। आज जब समस्त विश्व और मानव सभ्यता हिंसा, द्वेष और असुरक्षा की भावनाओं से ग्रस्त है, उस वक्त बापू और भी ज़रूरी हैं। एक शक्ति जिसके पास अपने दौर के सारे विध्वंसक हथियार थे, एक विशाल और विश्वयुद्ध जैसे युद्ध में जीत दर्ज करने वाले सेना का साहस था, एक संसद जिसके बारे में कहा जाता था कि वो इस दुनिया में कुछ भी कर सकती है सिवाए पुरुष को स्त्री और स्त्री को पुरुष बनाने के, एक विंस्टन चर्चिल जैसा राजनेता जिसके लिए भारत सांप और सपेरों का केवल एक जंगल था, और अंततः एक ऐसा साम्राज्य जिसके राज में कभी सूर्य अस्त नहीं होता था। और फिर, उस कभी ना डूबने वाले साम्राज्य की टकराहट होती है एक दुबले-पतले, धागे से बंधे ऐनक पहनने वाले और चर्चिल की ही भाषा में ' आधे नंगे फकीर' से जिसकी अकाट्य सत्यता और कभी ना झुकने वाली दृढ़ता इंग्लैंड की धरती पर आधे ढंके तन के साथ उसी साम्राज्य के शहंशाह को कहता है कि 'हमारे इस भूख और नंगेपन के पीछे आपकी ही हवस और ज़ुल्म का हाथ है'। ये शक्ति उनमें आई उनकी नैतिकता और जीवन में बनाए और निभाए गए उनके सिद्धांतों की वजह से, ना किसी तीर और तलवार से चलाए जा रहे किसी शासन की सेना के सेनाध्यक्ष होने की वजह से।आज पूरी दुनिया गांधी को उनकी 154वीं जयंती पर याद कर रही है, और वो इसलिए नहीं की ऐसा करना परंपरा है, बल्कि इसलिए क्यूंकि आवश्कता है।गांधी और तात्कालिक दुनियायाद कीजिए पहला विश्वयुद्ध और पूरी दुनिया दो भागों में बंटी और एक दूसरे को मिटा देने को बेचैन। उस समय में 10 अप्रैल 1917 को एक शख्स हाथ में एक छड़ी तन पर एक धोती और अपने मानस में एक साम्राज्य से टकराने का लोहा लेने की हिम्मत और वो भी दो ऐसे हथियारों से जिसका उपयोग और प्रयोग दोनों इस तरह से पहली दफा मानव इतिहास में होने जा रहा था, और वो थे- अहिंसा और सत्य।गांधी और तात्कालिक भारतीय नेतामहात्मा गांधी जहां सुभाषचंद्र बोस के लिए बापू थे, गुरुदेव रबिंद्रनाथ टैगोर के लिए महात्मा, तो वहीं पंडित जवाहरलाल नेहरू के लिए रोशनी और रूहानी पिता, सरदार पटेल के लिए एक दोस्त और मार्गदर्शक, वहीं मौलाना आजाद के लिए एक आदर्श और बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के लिए एक चतुर नेता थे। पर इनमें से कोई भी गांधी की सच्चाई, उनकी कार्यवनिष्ठा और सबसे बढ़कर उनकी देश के प्रति समर्पण से इंकार नहीं कर सकता है।' डरो मत 'पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी शानदार पुस्तक ' द डिस्कवरी ऑफ इंडिया ' में महात्मा गांधी के बारे में लिखा है कि वो एक रोशनी की तरह थे। उन्होंने आगे लिखा कि गांधी जी ने जो सबसे बड़ा और सबसे महान योगदान भारत के स्वतंत्रता संग्राम में दिया है वो है भारत की सदियों से दबी और कुचली हुई आवाम को नहीं डरने का मंत्र ये कह कर कि 'डरो मत'.गांधी और आजचाहे वो अमेरिका के काले लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले डॉक्टर मार्टिन लूथर किंग हों या, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की नीति के खिलाफ लोहा लेने वाले नेल्सन मंडेला हों या फिर तिब्बत के बौद्धों के लिए लड़ने वाले दलाई लामा हों, सबों ने कहीं ना कहीं गांधी और गांधीवाद को ही अपना आदर्श माना है।गांधी और आज का भारतजहां आज हम कई छेत्रों में एक विश्व शक्ति बनकर उभरे हैं, जैसे, सामरिक, तकनीकी, कई मामलों में फसलों की पैदावार और एक विशाल बाज़ार के रूप में। परंतु आज भी भारत जिस एक शख्स के नाम से जाना जाता है उसे हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से जानते हैं। चाहे G-20 में आए हुए देश हों या विश्व के शक्तिशाली राज्यों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री हों उनका सब का सफ़र गांधी के ही किसी घाट, बैठकी या समाधि से शुरू होता है।
जनवरी 1977 की शाम, इमरजेंसी का 18 महीने का आतंक और उसमे दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की सभा। और उस पर भी कयामत ये कि अटल बिहारी वाजपेई के भाषण का खुमार। विपक्ष के सारे नेता स्टेज पर मौजूद, सामने रामलीला मैदान में हजारों की भीड़, और 4 बजे शाम रात के 9 बजे 5 घंटे के बाद, सभा में एक आवाज़ गूंजती है, बाद मुद्दत के मिले हैं दीवाने.. कहने-सुनने को बहुत हैं अफसाने... और वहीं इस आवाज़ के साथ, हाथों का एक जंगल वाजपेई के इस्तकबाल में उठ जाता है।सुपरहिट बॉबी अटल के स्टारडम के सामने हुई फ्लॉपतात्कालिक सरकार को इस बात की जानकारी पहले से ही थी की जनता का जनसैलाब अटल बिहारी वाजपेई के भाषण से बहुत प्रभावित होगा और उसका सीधा असर इमरजेंसी के फौरन बाद होने वाले चुनाव पर पड़ेगा। सो, सरकार ने ठीक उसी दिन फिल्म बॉबी जो उस ज़माने की ब्लॉकबस्टर हिट फिल्म थी उसे टीवी पर प्रसारित करने का फ़ैसला किया, और उस दिन ये सिद्ध हो गया के अटल के सामने बॉबी फ्लॉप साबित हो गई।कहने-सुनने को बहुत हैं अफसानेभीड़ को शांत करने के लिए वाजपाई ने अपने दोनों हाथों को उठाए और आंखे बंद कर लीं, और फिर मुस्कराकर बस उन्होंने केवल एक लाइन कही... 'बाद मुद्दत के मिले हैं दीवाने'..इस पंक्ति के बाद वाजपाई ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में एक पॉज लिया और फिर दूसरी पंक्ति पढ़ी, 'कहने सुनने को बहुत है अफसाने'..लोग के बीच फिर शोर होने लगा, हर कोई अटल बिहारी वाजपेई जिंदाबाद के नारे लगाने लगे, फिर अटल ने पूरी लाइन बोली 'खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी भला कौन जाने' वाजपाई की पुण्यतिथि, और उनकी एक पंक्तिवाजपेई अगर एक शानदार राजनेता थे तो साथ ही साथ एक लाजवाब कवि भी थे। ग्वालियर की 1924 की क्रिसमस की शाम में अटल बिहारी वाजपेई का जन्म होता है और सफ़र शुरू होता है जो 16 अगस्त 2018 तक चलता है, पर उनका राजनितिक सफ़र उससे कुछ दिन पहले ही जिसे 2004 तक माना जा सकता है, खत्म हो गया था जिसमे कुछ योगदान उनके स्वास्थ्य और कुछ हद तक उसके बाद पार्टी पर वाजपेई की कमज़ोर पड़ गई पकड़ का भी है। एक पत्रकार, कवि और राजनेता गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों में अटल बिहारी वाजपेई पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने अपना कार्यकाल 1999 से 2004 तक का पूरा किया थाl कवि हृदय होने के बावजूद, अटल बिहारी वाजपेई एक कुशल राजनेता रहे, जिनकी सत्ता में रहते हुए विपक्ष से और विपक्ष में रहते हुए सत्ता से मतभेद होने के बावजूद भी कभी मनभेद नहीं हुआ। जब इंदिरा सरकार को भारत का पक्ष रखने के लिए विदेश भेजने की ज़रूरत पड़ी तो उन्होंने सरकार से नहीं बल्कि अपने धुर राजनितिक विरोधी अटल बिहारी वाजपई को भेजा और वहीं जब वाजपाई जनता सरकार में विदेश मंत्री बने तो उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रहे जवाहर लाल नेहरू की उनके ऑफिस से हटाई तस्वीर को दुबारा लगवा दिया था। और जब वाजपाई की तबियत बिगड़ी थी तो उन्हें सबसे पहले राजीव गांधी ने ही स्वास्थ लाभ के लिए विदेश में इलाज करवाने के लिए उन्हें सारी सरकारी सुविधाएं मुहैया कराई थी। इसलिए आज जब राजनितिक मतभेद व्यक्तिगत रिश्ते को खत्म कर देता है, तो आज अटल बिहारी वाजपेई और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। आज वाजपाई की पुण्यतिथि है और उनकी एक पंक्ति के साथ हम उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं:'हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में,अगर असंख्यक बलिदानों में,उद्यानों में, वीरानों में,अपमानों में, सम्मानों में,उन्नत मस्तक, उभरा सीना,पीड़ाओं में पलना होगा।क़दम मिलाकर चलना होगा।'
Nitish Kumar on Independence Day : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान में झंडोत्तोलन करने के बाद कई बड़ी घोषणाएं की और कहा कि हम काम करने में ही विश्वास करते हैं और आगे भी काम करते रहेंगे। इसके साथ ही सीएम नीतीश ने 10 प्रमुख घोषणाएं भी की। 10 लाख सरकरी नौकरी देने का वादाचुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संकल्प लिया और प्रदेशवासियों से कहा कि 10 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी अगले साल तक उपलब्ध हो जाएंगे। नियोजित शिक्षकों को दिलाया भरोसावहीं, शिक्षकों के मुद्दे पर नीतीश कुमार ने दो टूक कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियोजित शिक्षकों के संबंध में फैसला लिया जाएगा और उन्हें सरकार से जोड़ने पर अंतिम फैसला होगा। अभी इस मसले पर विचार-विमर्श भी चल रहा है। शिक्षा पर सीएम नीतीश का जोरगांधी मैदान में झंडोत्तोलन करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षकों से कहा कि वे मन लगाकर बच्चों को पढ़ाएं। जो टीचर मन लगाकर बच्चों को पढ़ाएगा, उनके लिए भविष्य में भी बेहतर अवसर उपलब्ध रहेंगे। वहीं, स्कूलों से लापता रहने वाले शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आगे की राह भी उनके लिए मुश्किल हो जाएगी। स्कूलों में शैक्षणिक माहौल बनाने और उनकी आधारभूत संरचना के लिए हर स्तर पर काम होगा। इन अस्पतालों का होगा विस्तारमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में अबतक 3.62 लाख नये पद का सृजन किया गया है। इनपर नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि PMCH, DMCH के अलावा NMCH, SKMCH, ANMCH का भी विस्तार किया जाएगा। ये भी 2500-2500 बेड के अस्पताल होंगे। इससे राज्य के मरीजों को इलाज में सहूलियत मिलेगी। सहरसा को दी बड़ी सौगातसहरसा में मेडिकल कॉलेज भी खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ सभी प्रमंडलीय मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। भविष्य में हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने का सरकार का लक्ष्य है। वर्तमान में 11 मेडिकल कॉलेज हैं। अभी 13 मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है। किसानों के लिए भी बड़ी घोषणाइसके साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए भी बड़ी घोषणा की और कहा कि कम बारिश से जूझ रहे बिहार के किसानों को आकस्मिक खेती के लिए नि:शुल्क बीज मिलेंगे। जिन जिलों में कम बारिश हुई है, वहां डीज़ल अनुदान की राशि मिलेगी। प्रदेश में किसानों को 16 घंटे बिजली की आपूर्ति देने का भी आदेश दिया गया है।धार्मिक स्थलों की होगी सुरक्षा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की भी घोषणा की और कहा कि मंदिरों की चहारदीवारी के निर्माण को लेकर 60 साल से अधिक पुराना मंदिर होने की बाध्यता को खत्म कर दिया गया है। अब 60 साल से कम पुराने मंदिरों की भी चहारदीवारी होगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर कब्रिस्तानों की भी घेराबंदी की गई है। जीविकोपार्जन के लिए अब दो लाख की मदद इसके साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कृषि रोड मैप का जिक्र करते हुए कहा कि तीन कृषि रोडमैप के बाद प्रदेश में किसानों की स्थिति काफी सुधरी है। धान, गेहूं, मक्के का उत्पादन दोगुना हुआ। दूध, अंडा, मछली, मांस का उत्पादन भी काफी बढ़ा है। मछली का उत्पादन भी तीन गुणा बढ़ा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाए जाने से मक्का किसानों को लाभ हो रहा है। सतत जीविकोपार्जन के लिए अब दो लाख की मदद मिलेगी। जातीय गणना के बाद बनेंगी योजनाएंवहीं, मुख्यमंत्री ने जातीय गणना को लेकर कहा कि गिनती का काम लगभग तक पूरा हो चुका है। इसमें आर्थिक स्थिति का भी जायजा लिया गया है। जिनकी माली हालत खराब होगी, उनकी स्थिति में सुधार करने के लिए भी प्रयास होंगे। इसी मकसद से अपने खर्च पर बिहार सरकार ने ये काम कराया है ताकि लोगों की सही स्थिति का आकलन हो सके और उसके मुताबिक ही योजनाएं बनायी जा सकें। विकसित बिहार बनाने का संकल्पइस मौके पर मुख्यमंत्री ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की बात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलने पर हम और तरक्की करते लेकिन सीमित संसाधनों के बाद भी हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। विकास की गति को बनाए रखना है ताकि हम आगे बढ़ सकें।
आज देश अपना 77वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस ख़ुशी में पूरा देश झूम रहा है, और आज़ादी के खुमार में डूबा हुआ है लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज हम भले ही स्वतंत्रता दिवस में ध्वजारोहण, लाल क़िले पर हिंदुस्तान की खूबसूरती बिखेरती झांकियां या देश के कोने-कोने में झंडोत्तोलन के बाद लहराते हमारे तिरंगे की सुंदरता देख कर मंत्रमुग्ध हैं। पर जब हमारे देश को आज़ादी मिली थी, तब जिस शख्स के सिर पर इस गुलामी को ख़त्म करने का सेहरा है, यानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी वो 14 और 15 अगस्त 1947 को दिल्ली की आतिशबाजी और जश्न से बहुत दूर नवाखली में दंगे में मारे गए लोगों के साथ उनके दुख और दर्द को बांट रहे थे।पटेल और नेहरू के बुलावे पर भी जश्न में शामिल नहीं हुए थे बापूजब सारे राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद 15 अगस्त को उस समय के कांग्रेस के दो सबसे दिग्गज नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बापू को चिट्ठी लिखी और उसमें गुज़ारिश की कि देश अपना पहला जश्न-ए-आज़ादी मना रहा है, उसमें राष्ट्रपिता का इस समारोह से दूर रहना बहुत दुखी करने वाला है तो इस पर बापू ने जवाब में कहा कि 'जब कलकत्ता में हिन्दू-मुस्लिम एक-दूसरे की जान ले रहे हैं, ऐसे में मैं जश्न मनाने के लिए कैसे आ सकता हूं? मैं दंगा रोकने के लिए अपनी जान दे दूंगा।'जिस भाषण को पूरी दुनिया ने सुना..उसे राष्ट्रपिता ने अनसुना कर दियाक्या आप जानते हैं कि अपना ऐतिहासिक महत्व रखने वाला पंडित जवाहरलाल नेहरू का वो भाषण, जिसे खुद नेहरू ने 'भाग्य के साथ मिलन' या 'Tryst With Destiny' नाम दिया था, उसे उस शख्स ने ही नहीं सुना, जिसकी अकाट्य व्यूह रचना में फंसकर ब्रिटिश शासन ने हिंदुस्तान में दम तोड़ दिया था, यानी उस रात बापू 9 बजे रात में ही सो गए थे।कहीं ना कहीं ये एक ऐतिहासिक सत्य है कि जिस दिन ब्रिटिश साम्राज्य की हिंदुस्तान में नकेल उखाड़ी गई थी, उस दिन कहीं ना कहीं आज़ादी के संघर्ष के कई जगमगाते सितारों में सबसे रौशन सितारा कहीं छुप गया था।
DESK : अपने बयानों के लिए अक्सर विवादों में रहने वाले राहुल गांधी का फिर एक बयान सुर्ख़ियां बटोर रहा है। अभी-अभी राहुल गांधी का ब्रिटेन में दिया बयान सुर्ख़ियो में रहा था जिसमें उन्होंने देश और देश के लोकतंत्र को खतरे में बताया था। वहीं अब उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए कहा की अगर प्रधानमंत्री भगवान के साथ भी होंगे तो वो भगवान को बताएंगे कि ब्रह्मांड कैसे चलता है। भगवान भी कंफ्यूज हो जाएंगे की ब्रह्मांड कैसे चलता है।'देश में हो रहा सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग'वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए आगे उन्होंने कहा की सरकार सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। आगे बात करते हुए उन्होंने कहा की हमने देश में नफ़रत के खिलाफ़ एक यात्रा निकाली और उसे भी रोकने का प्रयास किया। अपनी बात को फिर आगे बढ़ाते हुए उन्होंने फिर उन्हीं शब्दों को दोहराया जो उन्होंने कर्नाटक चुनाव की जीत के बाद कहा था जिसमें उन्होंने कहा था की हमने नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान खोली है।उधर बयान इधर सियासतजैसे ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिका में ये बयान दिया बस भारत में राजनीति शुरू हो गई।जहां शिवसेना सांसद संजय राउत ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा की राहुल गांधी ने कोई ग़लत बात नहीं की है बल्कि सही कहा है।फिर वहीं राहुल पर पलटवार करते हुए हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा की पूरी दुनिया के नेता प्रधानमंत्री की तारीफ़ करते नहीं थकते पर हमारे देश का एक अदना सा नेता राहुल गांधी विदेशी धरती पर जाकर प्रधानमंत्री को अपमानित करता है। ऐसे नेता का हर भारतवासी को बहिष्कार करना चाहिए।'संविधान पर हो रहा हमला'राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 'वास्तविक मुद्दे बेरोजगारी, महंगाई, घृणा और नफरत, एजुकेशन सिस्टम का कमजोर होना, महंगी शिक्षा और स्वास्थ्य है। बीजेपी इन मुद्दों पर बातचीत नहीं करती है। राहुल ने कहा कि भारत के लोग नफरत और हिंसा में विश्वास नहीं रखते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि संविधान पर हमला किया जा रहा है।'
DESK : बढ़ते हुए कोरोना के मामले के मद्देनज़र केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने राहुल गाँधी से अपील की है की देश हित में 'भारत जोड़ो यात्रा' रोक दें.ये अपील स्वास्थ्य मंत्री ने राहुल गाँधी से एक चिट्ठी के ज़रिये की है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया ने चिट्ठी में राहुल गाँधी से कहा के यात्रा में कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया जाए. और अगर ज़रूरी हो तो अभी देश हित में इस यात्रा को रोक दिया जाए. उधर कांग्रेस नेताओं का कहना है की भाजपा असल में इस यात्रा को मिल रहे जन समर्थन से घबरा गई है और कोरोना के बहाने से इस यात्रा को बंद कर देना चाहती है.कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा 'की इस मुद्दे पर राजनीति करना बंद करे भाजपा'. और प्रोटोकॉल सब पर लागू कीजिये.वहीं कांग्रेस के लोक सभा सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने भी भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए कहा 'भारत जोड़ो यात्रा से मोदी सरकार बौखलाई हुई है, और आम लोगों का ध्यान भटकाने के लिए तरह-तरह के सवाल उठा रही है'. आगे उन्होंने कहा की 'क्या गुजरात चुनाव में प्रधानमंत्री मास्क लगाकर, सारे प्रोटोकॉल मानते हुए घर-घर गए थे?'.कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा 'की 21 दिसम्बर को राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा पूरी हो गई'. उन्होंने आगे कहा के भारी भीड़ और जन समर्थन देख कर भाजपा और मोदी सरकार इतनी घबरा गई है, की स्वास्थ्य मंत्री राहुल गाँधी को कोरोना में प्रोटोकॉल पूरा करने के लिए चिट्ठी लिख रहे हैं.आपको बताते चलें के 'भारत जोड़ो यात्रा' 7 सितंबर 2022 से कन्याकुमारी से शुरू हुई जो 150 दिन चलेगी.
पटना महागठबंधन के प्रमुख घटक राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने अख़बार को दे रहे एक इंटरव्यू में कहा के बड़े पद के लिए छोटे को छोड़ दें नीतीश कुमार. उन्होंने ये बयान नीतीश कुमार के उस बयान के संदर्भ में दिया जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन की कमान तेजस्वी यादव को सौंपने की बात कही थी. विश्वनाथ प्रताप सिंह की याद दिलाते हुए उन्होंने आगे कहा के 'याद कीजिये किस तरह पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने किस तरह राजीव गाँधी की सरकार से इस्तीफा देने के बाद पूरे देश में घूम-घूम कर विपक्ष को एकजुट किया था और फिर 1989 में देश के प्रधानमंत्री बने थे. आगे उन्होंने कहा के भाजपा जैसी विभाजनकारी शक्ति से लड़ने के लिए सम्पूर्ण विपक्ष को एकजुट होना होगा जिसमें उन्होंने नवीन पठनायक और ममता बनर्जी का भी ज़िक्र किया. उन्होंने आगे कहा की 'पर यह तब तक मुमकिन नहीं है जबतक के बड़े पद का इच्छुक व्यक्ति छोटे पद के उलझनों में फंसा रहेगा. राजीव गाँधी की सरकार में रक्षा मंत्री रहे विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बोफोर्स कांड में हुए घोटाले को आधार बना कर अप्रैल 1987 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और फिर 1989 में देश के आठवें प्रधानमंत्री बने थे. ये घोटाला रक्षा सौदों से सम्बंधित था जिसमे एक स्विडेन की कम्पनी एबी बोफोर्स से 1437 करोड़ रुपय का सौदा हुआ था. इसमें 400 तोपों की खरीद हुई थी और 60 करोड़ के कमीशन की बात कही गई थी.
बिहार में ज़हरीली शराब से हो रही मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है. मिडिया रिपोर्ट्स का आंकड़ा लगभग 80 को पार कर रहा है. जिसमें सारण से लगभग 70, सिवान से 6 और बेगूसराय से 2 लोगों के मौत की ख़बर आ रही है. जबकि सरकारी आंकड़ा अभी 30 के आसपास है.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है के मैं पूरे राज्य में शराबबंदी पर जागरूकता फैलाऊंगा और उन्होंने प्रशासन से भी कहा है की पूरी कड़ाई से शराबबंदी कानून को लागू करें. पर इसका ख़्याल ज़रूर रखें की समाज का ग़रीब तबक़ा इस में बिना वजह परेशान ना हो.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है 'आयोग ख़ुद एक जाँच टीम बनाएगी जिसे उसके ही एक सदस्य हेड करेंगे और ऑन-स्पॉट इन्क्वायरी होगी.' आगे आयोग ने यह भी कहा आयोग जानना चाहती है की जो लोग ज़हरीली शराब पीने से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं, उनका सही और सुचारु इलाज चल रहा है या नहीं सरकार करवा रही है या नहीं. साथ-साथ ये भी देखा जायेगा की सरकार ने जो भी तरीका इस सामाजिक बुराई को मिटाने के लिए अपनाया है क्या वो इसे जड़ से उखाड़ने में सफल होगी या नहीं, जैसी घटनायें बिहार में घट रही हैं.आयोग ने कहा की शराबबंदी बिहार में अप्रैल 2016 से लागू है पर फिर भी मिल रही है, ये कहीं ना कहीं राज्य मशीनरी की असफलता है.
सारण में ज़हरीली शराब से बढ़ रही मौतों की संख्या जो 70 का आंकड़ा पार कर गई है, इस घटना ने बिहार समेत पूरे देश को इस पर सोचने को मजबूर कर दिया है. आरोप-प्रत्यारोप के बीच लोगों की मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है.सिवान में अभी 5 लोगों की मौत और बेगूसराय में 2 लोगों की मौत को भी ज़हरीली शराब से ही जोड़ा जा रहा है. उसके अलावा अभी 30 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिसमें 12 की स्थिति बहुत गंभीर है.जहां सदन में इस पर हंगामा बरपा है वहीं मानवाधिकार आयोग ने भी मिडिया रिपोर्ट्स के आधार पर बिहार सरकार को नोटिस भेजा है.सारण ज़िलाधिकारी राजेश मीणा ने कहा है की अभी तक प्रशासन ने 213 लोगों को हिरासत में लिया है, पर अभी तक प्रशासन ने इन गिरफ्तारियों और हो रही ज़हरीली शराब से इन मौतों का प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं किया है.मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री ने कहा की लोगों को ख़ुद भी जागरूक होना चाहिए. जब शराबबंदी राज्य में लागू है तो फिर आप शराब क्यूँ पी रहे हैं. आगे कहते हुए तेजस्वी ने कहा की 'कोई जब पीने जाता है तो हमसे पूछ कर नहीं जाता है.'
बिहार के छपरा ज़िले में ज़हरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 57 तक पहुंच गई है. अभी सिवान में भी 4 लोगों की मौत हुई है आशंका ज़हरीली शराब का पीना ही बताया जा रहा है. बेगूसराय में भी हुई दो मौतों का कारण ज़हरीली शराब का सेवन ही बताया जा रहा.मसला मसला यह है की जब राज्य में शराबबंदी है तो फिर शराब मिल कैसे रही है. सरकार ने इस मामले की जाँच के लिए SIT का गठन किया है. और दो पुलिस वालों को भी सस्पेंड किया है.इस मामले में पुलिस ने जिन 126 लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें से अभी तक पुलिस ने उनके इस ज़हरीली शराब पीने से हुई मौत से कोई संबंध स्थापित नहीं किया है. पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार का कहना है की अभी इन बातों के सामने आने से आगे की करवाई में बाधा हो सकती है.इस मामले में विपक्ष जिस बात पर सबसे ज़्यादा सरकार को घेर रहा है तो वह है नीतीश कुमार का ये बयान जो उन्होंने ज़हरीली शराब पीने से हुई मौत पर कहा की 'जो पिएगा वो मरेगा, लोगों को ख़ुद सचेत रहना होगा.'ज़हरीली शराब से हुई इस दर्दनाक मौत का हंगामा जहाँ बिहार विधानसभा में जब से शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई है तब से ही छाया हुआ है, वहीं इस पर बहस संसद के दोनों सदनों में भी देखने को मिली.पुलिस प्रशासन ने पूरे ज़िले में जिन लोगों पर भी शराब कारोबार में संलिप्त होने का शक है उनके यहां छापेमारी की है और 126 लोगों को गिरफ्तार भी किया है.पटना से काशिफ मलिक की रिपोर्ट
PATNA : 13 दिसंबर से शुरू हुए बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में वार और पलटवार का सिलसिला तेज़ होता चला जा रहा है।आज सत्र के दूसरे दिन शराबबंदी पर विधानसभा में ज़बरदस्त तरीके से टीका-टिप्पणी हुई। जिस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष सबसे ज़्यादा आमने-सामने नज़र आए वो था बिहार में शराबबंदी को लागू करने का मामला।जहां विपक्ष खुलकर नीतीश सरकार के शराबबंदी के क़ानून को पूरी तरह विफल बता रहा है वहां सीएम नीतीश कुमार ने शराबबंदी को बिहार में पूरी तरह से कामयाब बताया है।नीतीश कुमार ने शराबबंदी के फायदे गिनाते हुए बताया के हमारी इस पहल से बिहार के 1 करोड़ 64 लाख लोगों ने अपनी शराब की लत को छोड़ा है।विपक्ष के इस आरोप पर के शराबबंदी कानून से सबसे ज़्यादा जेल ग़रीब तबके के लोगों को हुई है, उन्होंने कहा कि कानून को और सख्त करने की ज़रूरत है और अधिकारियों को ये आदेश दिया गया है के ग़रीबों के साथ कोई ज़्यादती नहीं हो। आगे सीएम नीतीश कुमार ने कहा की इन्हीं शराब माफिया ने ही कर्पूरी ठाकुर की सरकार को भी गिराया था।
जहां एक तरफ़ कुढ़नी विधानसभा सीट हारने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्ष के निशाने पर हैं वहीं रविवार को खुले अधिवेशन में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ़ ललन सिंह ने 2024 तक बीजेपी मुक्त भारत बनाने का सपना देख रहे हैं. ललन सिंह पर पलटवार करते हुए भाजपा के राजयसभा सांसद और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा के कहीं ऐसा ना हो के 2025 तक बिहार ही जदयू मुक्त हो जाए. सिलसिलेवार ढंग से चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच बिहार की राजनीती पूरी तरह गर्माई हुई है. जहां नीतीश कुमार एक तरफ़ सारे बड़े विपक्षी नेताओं को एक साथ लाकर भाजपा के खिलाफ एक मज़बूत विकल्प खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं भाजपा बिहार को 2025 तक जदयू मुक्त कराने की बात कर रही है. भाजपा ने कहा की तीन उपचुनावों में से दो सीट पर जीत इस बात का संकेत है के अब बिहार में राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं, और बिहार की जनता बदलाव चाहती है. वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय परिषद की बैठक और जदयू के खुले अधिवेशन में अपने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा के एक हार या नतीजे से निराश होने की ज़रूरत बिल्कुल नहीं है. नीतीश ने आगे कहा के अगर वो विपक्ष को एक साथ और पूरे दम-ख़म से खड़ा करने में सफल हुए तो 2024 में कोई थर्ड फ्रंट नहीं बल्कि हम मेन फ्रंट बनेंगे. कई राजनीतिक पंडितों ने ये भी दावे किए हैं की अगस्त में राजग को छोड़ महागठबंधन में शामिल हुए नीतीश कुमार ने 2024 में केंद्र की सत्ता के मद्देनज़र अपने राजनीतिक भविष्य को तय करने के लिए भी ये फ़ैसला लिया था.
PATNA : सियासत का सुपर संडे कह सकते हैं इसे आप। पटना की सड़क गवाह बनी है इसकी। सड़क पर ही वॉर छिड़ गया है। पोस्टर वॉर है ये । दरअसल पोस्टर के जरिए एक दूसरे पर सियासी वॉर करने की परंपरा पटना में नयी नहीं है लेकिन ये सियासत का दूसरा अंदाज है। यहां एक दूसरे पर वॉर नहीं बल्कि अपने-अपने नेताओं के सम्मान में पोस्टरों से पाटने की परंपरा का निर्वहन है। पटना एयरपोर्ट से लेकर ज्ञान भवन तक का इलाका इसका गवाह बना है। हालांकि पोस्टरों की होड़ में कौन आगे निकला ये आगे बताएंगे।राजधानी पटना में आज दो बड़े सियासी कार्यक्रम आयोजित किए गये। पहला तो जेडीयू का खुला अधिवेशन तो दूसरा कांग्रेस के नये प्रदेश अध्यक्ष का स्वागत समारोह। दोनों ही कार्यक्रम गांधी मैदान के इलाके में आयोजित किए गये। पहले बात करते हैं जेडीयू के खुला अधिवेशन की । इस अधिवेशन में बड़ी-बड़ी सियासी बातें हुई । कार्यक्रम में जेडीयू का आगे क्या कार्यक्रम है। किस तरह दिल्ली फतह करना है। आगे की क्या रणनीति है । इसका खुलासा हुआ। दरअसल ये कार्यक्रम भी नये अध्यक्ष के चुनाव से ही जुड़ा है। जेडीयू में फिर से राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की ताजपोशी हुई है ऐसे में जेडीयू की तरफ से ये कार्यक्रम आयोजित हुआ।अपने नये-नवेले अध्यक्ष के स्वागत में कार्यकर्ताओं ने पटना को बैनर-पोस्टरों से पाट दिया। पोस्टरों में जेडीयू कार्यकर्ताओं के द्वारा सीएम नीतीश कुमार को फिर से ललन सिंह को अध्यक्ष बनाने पर धन्यवाद दिया गया।जेडीयू के पोस्टर वीरचंद पटेल पथ स्थित पार्टी कार्यालय से शुरु होकर इनकम टैक्स गोलंबर और डाकबंगला चौराहा होते हुए गांधी मैदान स्थित श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल तक पटे पड़े नजर आए।अब बात कांग्रेस की। कांग्रेस के नये प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी के बाद पहली बार पटना पहुंचे अखिलेश कुमार सिंह का भव्य स्वागत किया गया। पटना एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने के लिए कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उमड़ पड़े। एय़रपोर्ट से लेकर सभास्थल ज्ञान भवन तक रास्ते में दर्जनों जगह पर उनका जोरदार अभिनंदन किया गया। इस दौरान पूरा इलाका भी पोस्टरों से भरा पड़ा नजर आया। पोस्टरों में पार्टी कार्यकर्ता अपने नेता को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते नजर आए।तो इस तरह से सुपर संडे को सुपर पोस्टर वॉर दिखा। दोनों ही पार्टियों ने अपने नये अध्यक्ष के स्वागत में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ा। लेकिन आखिर इस फ्रेंडली पोस्टर वॉर में बाजी किसके हाथ लगी इसकी बात करें तो कांग्रेस भारी नजर आयी । हालांकि मामला उन्नीस और बीस का ही नजर आया । कुल मिलाकर कहे तो पोस्टरों के मामले में कांग्रेस जेडीयू के उपर बीस पड़ी। बाकी सियासत में कौन आगे ये तो साल 2024 में ही तय होगा। पटना से अनुराग की रिपोर्ट ...
सारण : ख़बर आई है की सारण ज़िला के बनियापुर थाना क्षेत्र के भकरा भिट्ठी से ज़मीन के आपसी विवाद में पिता-पुत्र की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई है.विवाद ये है की सुबह बजे जब गिरीशदेव दुबे अपने पुत्र शोभाकांत दुबे के साथ अपने खेत पर दूसरे पक्ष के लोगों को जो वहां पहले से ही जुताई कर रहे थे, तब गिरीश दूबे और शोभाकांत दुबे ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो दूसरे पक्ष के लोगों ने उन पर चाकू से ज़बरदस्त हमला करके उन्हें मौत के घाट उतार दिया.पिता-पुत्र की मौत के अलावा इस दर्दनाक हमले में दो और लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. उनको उनके परिजनों और गाओं वालों ने पीएचसी लाया जहां से उन्हें बेहतर उपचार के लिए सदर अस्पताल छपरा रेफर कर दिया गया है.इस घटना को पुलिस प्रशासन की नाकामी बताते हुए आक्रोशित स्थानीय लोगों ने घटनास्थल भकरा भट्टी चौक को बांस और बल्लों से पूरी तरह बंद कर दिया. न्याय की मांग करते हुए भीड़ ने सारण एसपी संतोष कुमार से अति शीघ्र आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की है.
पटना बिहार के लगभग सारे शहर की हवाएं ज़हरीली हो चुकी हैं. लेकिन उनमें भी सबसे ज़्यादा और टॉप पर बिहार के पटना, गया, बेगूसराय और दरभंगा है, जिसमें दरभंगा पहले नंबर पर आया है. एयर क्वालिटी इंडेक्स जो वायु गुणवत्ता मापने का इंडेक्स है उसमें ये चारों शहर 400 के ऊपर हैं, और ये किसी भी शहर के लिए बहुत घातक होता है. आज 12 बजे का ये इंडेक्स बताता है की प्रदूषण तो हमेशा से समस्या रही है पर हर बीतते समय के साथ इसकी भयावहता और बढ़ती जा रही है. जो की इंसानी ज़िन्दगी के लिए बहुत ही खतरनाक है.ठंड के शुरुआत से ही इस इंडेक्स में बढ़ोतरी होती जा रही है जो पहले की अपेक्षा बहुत बढ़ गई है, जो इस इंडेक्स में 400 का मानक पार कर गई है. ऐसा नहीं है की इस केटेगरी में बिहार के केवल 4 शहर ही आते हैं, बल्कि इस सूची में पश्चिमी चम्पारण, समस्तीपुर, कटिहार, पूर्णिया, भोजपुर, नालंदा और भागलपुर में भी प्रदूषण का स्तर बहुत ऊँचा है.
प्रयागराज: प्रयागराज के दो बस अड्डों को पूरी तरह किया जा रहा है हाइटेक. इसके लिए 149 करोड़ रुपय के ख़र्च आने की है संभावना. ज़ीरो रोड और सिविल लाइन्स बस अड्डों को हाईटेक बनाने के लिए टेंडर निकाला गया है. इस योजना के तहत दोनों बस अड्डों को अत्याधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी. ज़ीरो रोड और सिविल लाइन्स बस अड्डों को पूरी तरह अति आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा.उम्मीद की जा रही है के ये प्रोजेक्ट 2025 के महाकुम्भ से पहले सम्पूर्ण हो जाएगा. इसमें 149 करोड़ रुपय तक ख़र्च आने का अनुमान लगाया जा रहा है. इसमें सिविल लाइन्स का 18000 वर्ग मीटर के ख़र्च का अनुमान 110 करोड़ और ज़ीरो रोड का ख़र्च 39 करोड़ तय किया गया है जिसमें 6265 वर्ग मीटर का हाईटेक बस अड्डा तैयार होगा. जहां 5 जनवरी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, 30 जनवरी तक टेंडर पूरी खोल दिया जाएगा.इस योजना को पीपीपी मॉडल यानी निजी सहभागिता पद्धति द्वारा हाईटेक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा. आगे आपको बताते चलें की इस योजना के तहत राज्य के 23 शहरों में ऐसे हाईटेक सुविधा वाले बस अड्डों को पूरा करवाने की मंज़ूरी मिल गई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 दिसंबर को G 20 की अध्यक्षता से संबंधित चर्चा के लिए देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक बुलाई थी, और इसमें नीतीश कुमार भी शामिल हुए थे. पर इसी बैठक से संबंधित एक चर्चा में जिसमें प्रधानमंत्री ने सारे मुख्यमंत्रियों की एक फिज़िकल मीटिंग बुलाई थी, पर उसमें जदयू की तरफ़ से कोई शामिल नहीं था. इसी को आधार बना कर नीतीश कुमार को सुशील कुमार मोदी ने आड़े हाथों ले लिया. उन्होंने कहा के नीतीश कुमार पहले वाली बैठक में इसीलिए शामिल नहीं हुए, क्यूंकि वो प्रधानमंत्री से नज़र मिला पा रहे थे. और कुढ़नी में हारने के बाद उन्होंने नीतीश कुमार पर अपने फैसले पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर होना बताया.पूर्व डिप्टी CM सुशील मोदी ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया के हवाले से कहा की 'नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले महागठबंधन को हाल के तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में से 2 में हार मिली है. मोकामा में अनंत सिंह की व्यक्तिगत जीत हुई है.' सुशील मोदी ने आगे कहा 'नीतीश कुमार को शायद इस बात का आभास हो गया है के लालू यादव से उनके हाथ मिलाने से ना तो उनकी पार्टी जदयू ख़ुश है और ना ही उनके कार्यकर्ता'सुशील मोदी ने 5 दिसंबर को हुए सर्वदलीय मुख्यमंत्रियों की मीटिंग में नीतीश कुमार की अनुपस्थिति पर और फिर 9 दिसंबर की ऑनलाइन मीटिंग में उनके शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा 'नीतीश कुमार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रत्यक्ष रूप से सामना करने की हिम्मत नहीं है. उन्होंने बीजेपी को बार-बार धोखा दिया है. फिज़िकल मीटिंग में हम फेस-टू-फेस मिलते हैं. पर ऑनलाइन मीटिंग में ऐसी कोई समस्या नहीं है.
पटना : आज जदयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक जदयू कार्यालय के कृपुरी सभागार में होने वाली है. उसके बाद पार्टी का खुला अधिवेशन रविवार को श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में होगा. जिसमें 2024 और 2025 के होने वाले चुनाव पर मंथन होगा.मुज़्ज़फ़्फ़रपुर के कुढ़नी विधानसभा सीट पर भाजपा के हाथों मिली शिकस्त के बाद महागठबंधन और विशेषकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के विश्वास को झटका लगा है. पार्टी और गठबंधन के अंदरखाने एक हड़कंप मचा हुआ है. विपक्ष तो मुख्यमंत्री से 'नैतिकता' के आधार पर इस्तीफे तक की मांग कर रहा है.कुढ़नी उपचुनाव से पहले सम्पूर्ण विपक्ष को एकसाथ कर भाजपा के सामने एक मज़बूत विकल्प का दावा करने वाले नीतीश कुमार और उनकी पार्टी बहुत हद तक रक्षात्मक स्थिति में नज़र आ रही है. जहाँ विपक्ष से सुशील कुमार मोदी मुख्यमंत्री से इस्तिफे की मांग कर रहे हैं, वहीं अब महागठबंधन के प्रमुख घटक राजद के कुढ़नी से पूर्व विधायक अनिल सहनी ने भी हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए नीतीश से त्यागपत्र मांग लिया है. और तेजस्वी को आगे आ कर सत्ता की कमान संभालने का न्योता दे दिया है.नीतीश कुमार के नेतृत्व पर उठ रहे सवालों के बीच ललन सिंह का फिर से दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना राजनीतिक रूप से नीतीश, महागठबंधन और उनकी पार्टी के लिए कितना सुकून और राहत पहुंचाने वाला होगा ये तो बाद की बात है.अगस्त में भाजपा का साथ छोड़ कर आए नीतीश कुमार जहाँ एक तरफ़ विपक्ष की तरफ़ से 2024 में प्रधानमंत्री कैंडिडेट बनने का सपना संजो रहे हैं, वहां दूसरी तरफ़ जहाँ राजद और भाजपा ने नवंबर में हुए उपचुनावों में एक-एक सीट जीत कर अच्छा प्रदर्शन किया था वहीं महागठबंधन की जीती हुई सीट हार कर जदयू को भारी धक्का लगा है.आज होने वाली जदयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक और रविवार को होने वाले पार्टी के खुले अधिवेशन में इस बात पर गहन मंथन और समीक्षा होगी की कैसे नकारात्मक बन रही इस स्थिति पर क़ाबू पाया जा सकता है.
पटना: आज पटना में जदयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक होने वाली है. इस बैठक में ललन सिंह के दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर आज लग जाएगी मुहर. इस बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उपस्थित रहेंगे. मुज़्ज़फ़्फ़रपुर के कुढ़नी विधानसभा सीट से महागठबंधन प्रत्याशी और जदयू से टिकट लेकर लड़ रहे मनोज कुशवाहा की हार के बाद महागठबंधन में एक हड़कंप मचा हुआ है. सब एक दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ रहे हैं. वहीं आपको बताते चलें के कुढ़नी में राजद के अनिल सहनी के IRCTC घोटाले में संलिप्त पाए जाने के बाद सीट रद्द होने के बाद वहां हुए उपचुनाव में केदार प्रसाद गुप्ता ने भाजपा से जीत दर्ज की है.आज होने वाले बैठक में ललन सिंह के दोबारा ताजपोशी होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महागठबंधन और पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएंगे और मार्गदर्शन करेंगे.