

बुधवार, 23 सितंबर 2026
LiveDESK : संचार क्रांति के युग में दुनिया ने काफी प्रगति की है एक क्लिक पर कई सारे काम चुटकियों में हो जाते है,,,,जी हाँ हम बात कर रहे है मोबाइल और हाई स्पीड इंटरनेट की,,,,मोबाइल और इंटरनेट ने दुनिया को एक तरफ जहां नए आयाम दिए है वही इसका दूसरा पाह;पहलू भी है,,,,और वो पहलु है बच्चो से जुडी हुई,,,,बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम ने अभिभावकों की चिंताए बढ़ा दी है,,,,और इसका दुष्प्रभाव भी देखने को मिल रहा है,,,, स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास पर बड़ा असर पड़ा है,,,,आज भले ही अभिभावक परेशान है की ये समस्या ख़त्म कैसे हो लेकिन कही न कहीं इसके पीछे पेरेंट्स ही ज़्यादा ज़िम्मेदार है,, बच्चों को छोटी उम्र से ही पैरेंट्स मोबाइल फोन की लत लगा देते हैं.जो बाद में चलकर उनके लिए कई समस्याओं का कारण बन जाता है.इससे बच्चे मानसिक रूप से कमजोर होने लगते हैं जिसे वर्चुअल ऑटिज्म कहते हैं. मोबाइल फोन, टीवी और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की लत की वजह से ऐसा होता है. स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल या लैपटॉप-टीवी पर ज्यादा समय बिताने से उनमें बोलने और समाज में दूसरों से बातचीत करने में दिकक्त होने लगती है. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, इस कंडीशन को ही वर्चुअल ऑटिज्म कहा जाता है. इसका मतलब यह होता है कि ऐसे बच्चों में ऑटिज्म नहीं होता लेकिन उनमें इसके लक्षण दिखने लगते हैं,,,,सवा साल से तीन साल के बच्चों में ऐसा बहुत ज्यादा दिख रहा है,,,अब इस तस्वीर को ही देख लीजिये बच्चे कैसे एक साथ जुटकर मोबाइल देखने में तल्लीन है,,,,इतनी गहनता से मोबाइल देखने पर तो प्रतिकूल प्रभाव पड़ना लाजमी है,,,,अब ज़रा इस तस्वीर को देखिये सड़क के बबगाल में कोलाहल के बीच ये बच्चा मोबाइल देखने के लिए किस तरह जगह ढूंढ लिया है ,,,ताकि कोई डिस्टर्वेंस न हो.जानकार मानते हैं कि आजकल एकल परिवार के चलते बच्चों को माता-पिता का समय नहीं मिल पाता। अपनी व्यस्तता के बीच मां-बाप खुद ही बच्चे को मोबाइल थमा देते हैं। इससे वह आभासी दुनिया को ही अपनी असली दुनिया समझने लगते हैं। साथ ही माता पिता से जुड़ाव भी खत्म होने लगता है,,,,ऐसे में ज़रुरत है इस बात की सभी काम करते हुए भी अपने बच्चों को उचित समय दे ताकि उनका स्क्रीन टाईम काम हो सके और आनेवाली पीढ़ी का समग्र विकास हो।अमित सिंह की रिपोर्ट
कैमूर : कहते हैं जोड़ियां ऊपर से ही बनकर आती है और ये बात भी सही है क्योंकि कैमूर की कहानी जब हम आपको बताएँगे तो आप यही कहेंगे क्योकि यहां दूल्हा द्वारपूजा के बाद मंडप की जगह सीधा थाने पहुंच गया। अब ज़रा तफ्सील ये पूरी घटना आपको बताते है। मामला कैमूर जिले का है जहां अपने प्रेमी की शादी के बारे में सुन प्रेमिका गाजीपुर जिले के नवली गांव से सीधे प्रेमी के विवाह मंडप में पहुंच गई। और अपने प्रेमी की खूब खिंचाई शुरू कर दी। नतीजा ये हुआ की शादी होते होते रह गई और दूल्हे के पिता को हर्जाना भरने की बात कहकर बारात वापस लौटानी पड़ी।दरअसल रामगढ़ थाना क्षेत्र के अकोढीं गांव के रहने वाले रामदुलार राम के पुत्र सरवन कुमार की शादी दुर्गावती थाना क्षेत्र के कल्हनुआ गांव निवासी अंगद राम की पुत्री प्रिया कुमारी के साथ तय थी। समय पर लड़की के घर बारात भी आई और जयमाला स्टेज पर बड़े ही धूम धाम से शादी की रस्में अदा की जा रही थी। लेकिन दूल्हे को क्या पता था कि उसकी प्रेमिका को शादी की तारीख मालूम है। इधर प्रेमिका भरे शादी के मंडप में पहुंचकर दूल्हे को खरी-खोटी सुनाते हुए शादी रुकवा दी। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस प्रेमिका ने भरे मंडप में शादी को रुकवा दी उस प्रेमिका की शादी भी करीब 10 साल पहले किसी और के साथ हुई थी। लेकिन महज 3 साल के भीतर प्रेमिका को अपने प्रेमी के साथ प्यार हुआ और प्रेमिका ने अपनी पति का घर छोड़ दिया।मामला थाना पहुंचते ही पुलिस इसकी हर पहलू की जांच कर रही है लेकिन इस पूरे एपिसोड को देखकर आप समझ गए होंगे की किस तरह अजब प्रेम की गजब कहानी में एक साथ कई लोग परेशान हो रहे है और दूल्हा दोहरे प्रेम के चक्कर में शादी मंडप के बदले थाने पहुंच गया।
DESK : बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन जेल से आज रिहा हो गए। वो गोपालगंज के DM रहे जी कृष्णैया की हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। 10 दिन पहले ही बिहार की नीतीश सरकार ने जेल रूल्स में एक बदलाव किया, जिसके बाद आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ हो सका।इनकी रिहाई को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर भी खूब चल रहा है सियासत भी ज़ोरों पर हो रही है। आइये आपको बताते है आनंद मोहन की पूरी कहानी...बिहार के सहरसा जिले में एक गांव है नाम है पनगछिया। इस गांव में 26 जनवरी 1956 को आनंद मोहन का जन्म हुआ। इनके दादा का नाम दादा राम बहादुर सिंह था जो स्वतंत्रता सेनानी थे। ये 17 साल के थे तब बिहार में जेपी आंदोलन शुरू हुआ और यहीं से उसके राजनीतिक करियर की शुरुआत भी हुई।1978 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के एक भाषण के दौरान आनंद मोहन ने काले झंडे दिखाए थे। साल 1979-80 में कोसी रीजन में यादवों के खिलाफ मोर्चा खोलकर वो लाइमलाइट में आ गया। इसके साथ ही पहली बार उनका नाम गैर कानूनी गतिविधियों में पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। अपनी राजनीति को आगे ले जाने के लिए साल 1980 में आनंद मोहन सिंह ने समाजवादी क्रांति सेना का गठन किया। इस दौरान इनकी राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की गैंग के साथ भी काफी अनबन चल रही थी। कहा जाता है कि उस वक्त कोसी के इलाके में गृह युद्ध जैसे हालात हुआ करते थे। 1990 के विधानसभा चुनाव में आनंद मोहन जनता दल के टिकट पर महिषी से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के लहतान चौधरी को 62 हजार से ज्यादा वोट से हराया।जिस समय आनंद मोहन ने अपनी चुनावी राजनीति शुरू की, उसी समय बिहार के मुजफ्फरपुर में एक नेता हुआ करते थे छोटन शुक्ला। आनंद मोहन और छोटन शुक्ला की दोस्ती काफी गहरी थी। 1994 में छोटन शुक्ला की हत्या हो गई। छोटन शुक्ला की अंतिम यात्रा के बीच से एक लालबत्ती की गाड़ी गुजर रही थी, जिसमें उस समय के गोपालगंज के DM जी कृष्णैया सवार थे। भीड़ ने जी कृष्णैया को पीट-पीटकर मार डाला। जी कृष्णैया की हत्या का आरोप आनंद मोहन पर लगा। 2007 में निचली अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुना दी। आनंद मोहन देश के पहले पूर्व सांसद और पूर्व विधायक हैं, जिन्हें मौत की सजा मिली थी।हालांकि, पटना हाईकोर्ट ने दिसंबर 2008 में मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी जुलाई 2012 में पटना हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। तब से आनंद मोहन जेल में ही थे।1996 में लोकसभा चुनाव के दौरान आनंद मोहन जेल में थे। जेल से ही उसने समता पार्टी के टिकट पर शिवहर से चुनाव लड़े और जनता दल के रामचंद्र पूर्वे को 40 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। 1998 में फिर शिवहर से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार राष्ट्रीय जनता पार्टी के टिकट पर। ये चुनाव भी जीत लिया.1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में भी आनंद मोहन खड़ा हुए, लेकिन हार गए। इसके बाद दोषी साबित हो गए और चुनाव लड़ने पर रोक लग गई। आनंद मोहन ने 13 मार्च 1991 को लवली सिंह से शादी की। लवली स्वतंत्रता सेनानी माणिक प्रसाद सिंह की बेटी हैं। शादी के तीन साल बाद 1994 में लवली आनंद की राजनीति में एंट्री उपचुनाव से हुई। 1994 में वैशाली लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए, जिसमें लवली आनंद यहां से जीतकर पहली बार संसद पहुंचीं।ये तो हुई आनद मोहन के सफर की बात आइये अब बात करते है रिहाई की ... जनवरी में नीतीश कुमार ने एक पार्टी इवेंट में मंच से कहा था कि वो आनंद मोहन को बाहर लाने की कोशिश कर रहे हैं। जिसके बाद आनंद का नाम फिर से अखबारों की सुर्खियां बना। हालांकि, रिहाई में कानून आड़े आ रहा था। बिहार सरकार ने 10 अप्रैल को कानून में संशोधन कर उस अड़चन को भी दूर कर दिया।नीतीश सरकार ने बिहार जेल मैनुअल, 2012 के नियम 484 (1) में बदलाव किया। सरकार ने इसमें से सिर्फ 5 शब्द हटाए- a civil servant on duty यानी ऑन ड्यूटी सरकारी कर्मचारी की हत्या वाली धारा हटा दी, क्योंकि आनंद मोहन इसी के तहत दोषी थे। नियमों में इस बदलाव की वजह से आनंद मोहन के अलावा 26 अन्य कैदी भी समय से पहले रिहा हो सकते हैं। हालांकि रिहाई पर सियासत भी खूब हो रही है लेकिन सरकार की ओर से आमिर सुब्हानी ने सफाई देते हुए कहा गया कि ये बिलकुल नियम के तहत है। बिहार में राजपूत एक प्रभावशाली जाति है। राजपूतों की आबादी बिहार में करीब 8% है। राज्य की करीब 30 विधानसभा सीटों और 8 लोकसभा सीटों पर राजपूत हार या जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने 5 राजपूतों को टिकट दिया था और ये सभी जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। JDU और RJD सवर्ण जातियों तक पहुंच बनाकर अपने OBC केंद्रित वोटर बेस को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। आनंद मोहन सिंह इसका जरिया हैं,,,बिहार में राजपूत वोटों के समीकरण की वजह से आनंद मोहन की रिहाई पर BJP ने खामोशी अख्तियार कर ली है उनके पक्ष में खड़ी है। देखना दिलचस्प होगा कि 2024 चुनाव से पहले नीतीश सरकार का ये दांव कितना कारगर साबित होगा।अमित सिंह की रिपोर्ट
पटना : बिहार में इन दिनों सियासत चरम पर है और अब बात यहां तक पहुंच गई है की अप्रत्यक्ष रूप से कार्रवाई के संकेत भी मिल गए है। ताज़ा घटना क्रम की बात करे तो मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने दो तुक कह दिया है कि जहां मर्जी है चले जाएं। बांका में समाधान यात्रा के तहत पहुंचे नीतीश कुमार से जब कुशवाहा को लेकर सवाल पूछा गया तो उनका तेवर काफी आक्रामक था। सीएम ने इसी बहाने इशारों में बीजेपी पर भी हमला कर दिया ।दूसरी तरफ कुशवाहा की ओर से मीटिंग बुलाए जाने के बाद ललन सिंह ने कुशवाहा के करीबियों को पार्टी ऑफिस बुलाया और उनसे मुलाकात की इतना ही नहीं ललन सिंह ने तो कुशवाहा को लेकर बड़ा बयान दे दिया और कह दिया की जड़ यु में में संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष ही नहीं है । कुशवाहा प्रकरण को लेकर अब आइये आपको थोड़ा फ्लैशबैक में लेकर चलते है। यु तो ये खींचतान महागठबंधन बनने के बाद से ही चल रही है लेकिन हाल के दिनों में ये खुलकर सतह पर आ गया। जिसका उदहारण पिछले दिनों शहीद जगदेव प्रसाद की जयंती पर पार्टी से अलग उपेंद्र कुशवाहा की तरफ से भी कार्यक्रम का आयोजन के दौरान दिखा हालांकि कार्यक्रम को लेकर जो उमेश कुशवाहा पहले आक्रामक थे बाद में उनका रुख नरम दिखा। हालांकि की इस पुरे प्रकरण पर जेडीयू के अंदर ही दो सुर दिखने लगे। विधानपार्षद रामेश्वर महतो ने उपेंद्र कुशवाहा का समर्थन किया है। रामेश्वर महतो ने कहा कि मुख्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा से बात कर मामले को समझ कर उसका निदान करें। वरना जेडीयू के कई कुशवाहा नेता पार्टी को छोड़ने का फैसला ले सकते है। वही इस पुरे मामले में जदयू बीजेपी पर हमलावर है वही बीजेपी कुशवाहाका समर्थन कर रही है उपेंद्र कुशवाहा को लेकर जिस तरीके से जड़ यु ने कार्रवाई के संकेत दिए है अब लग रहा है की कोई आधिकारिक घोषणा जल्द हो सकती है क्योकि जद यु कुशवाहा के भाजपा प्रेम को भाप गई है शायद यही वजह है की अब कड़ा रुख अपना रही है। वही उपेंद्र कुशवाहा की फिलहाल सियासत की जिस धुरी के इर्द गिर्द घूम रहे है उसे देख कर कहा जा सकता है ये उनकी ज़रूरी भी है और मजबूरी भी।
पटना : देश में इन दिनों एक बड़ी समस्या से लोग परेशान है या यूं कहे कि सीधे सीधे लोगो के जीवन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है. जी हाँ हम बात कर रहे है वायु प्रदूषण की,दूषित हवा लोगों को अकारण बीमार बना रहा है. सबसे ज़्यादा ख़राब हालात इस वक़्त दिल्ली और नोएडा के है, प्रदूषण और घना कोहरा लोगों की मुसीबतें बढ़ा रहा है। लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। वहीं चालकों के लिए सड़क पर गाड़ी चलाना मुश्किल हो गया है। नोएडा में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण के स्तर के खतरनाक स्थिति पर पहुंचने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ने समीक्षा की और निर्देश दिए।दिल्ली की तरह पटना में भी हवा जहरीली होती जा रही है,प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. पटना में एक्यूआई 260 से लेकर 340 तक पहुंच गया है जो काफी खतरनाक है. इनकम टैक्स चौराहा, सचिवालय, डाकबंगला के आसपास एक्यूआई 200 से 300 के बीच रिकॉर्ड किया गया है. पटना सिटी में हालात ज्यादा खराब हैं. हालत यह है कि सुबह और शाम में प्रदूषण सबसे ज्यादा लोगों को परेशान कर रहा है,बढ़ते प्रदूषण को लेकर सीएम नीतीश ने भी सुझाव दिए है।बिहार में पटना के बाद बात मुज़फरपुर की करे तो यहां भी प्रदुषण की समस्या ने लोगों को परेशान कर रहा है,शहर का प्रदूषण ग्राफ रेड जोन में है सबसे ज्यादा खतरनाक हाल जिला स्कूल के आसपास इलाके का बना है। जिला स्कूल का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 301 पर रहा।प्रदूषण से बचाव के उपाए-वाहनों की नियमित प्रदूषण जांच कराते रहें।-शहर में अनियंत्रित यातायात नहीं हो, इसका पूरा ख्याल रखें, जाम में वाहनों को बंद कर दें- घर से निकलने वाले कचरे को खुले में इधर-उधर नहीं जलाएं।- धुआं देने वाले पुराने वाहनों के परिचालन पर रोक।कुल मिलकर देखा जाए तो वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है.एहतियातन उपाए के दावे भी किये जा रहे है,लेकिन बड़ा सवाल ये है कि इसके ज़िम्मेदार काफी हद तक हम ही हैं क्योकि आधुनिकता के इस दौर में बिना सावधानी बरते प्रकृति के साथ जम कर खिलवाड़ हो रहा है ऐसे में ज़रुरत इस बात की है अब भी हमे एहतियात बरतना चाहिए ताकि स्वच्छ और साफ़ हवा में सांस ले सके।अमित सिंह की रिपोर्ट
PATNA- देश में इन दिनों एक बड़ी समस्या से लोग परेशान है या यूं कहे कि सीधे सीधे लोगो के जीवन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है.जी हाँ हम बात कर रहे है वायु प्रदूषण की,दूषित हवा लोगों को अकारण बीमार बना रहा है.सबसे ज़्यादा ख़राब हालात इस वक़्त दिल्ली और नोएडा के है, प्रदूषण और घना कोहरा लोगों की मुसीबतें बढ़ा रहा है। लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। वहीं चालकों के लिए सड़क पर गाड़ी चलाना मुश्किल हो गया है। नोएडा में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण के स्तर के खतरनाक स्थिति पर पहुंचने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ने समीक्षा की और निर्देश दिए। दिल्ली की तरह पटना में भी हवा जहरीली होती जा रही है,प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है.पटना में एक्यूआई 260 से लेकर 340 तक पहुंच गया है जो काफी खतरनाक है.इनकम टैक्स चौराहा, सचिवालय, डाकबंगला के आसपास एक्यूआई 200 से 300 के बीच रिकॉर्ड किया गया है.पटना सिटी में हालात ज्यादा खराब हैं.हालत यह है कि सुबह और शाम में प्रदूषण सबसे ज्यादा लोगों को परेशान कर रहा है,बढ़ते प्रदूषण को लेकर सीएम नीतीश ने भी सुझाव दिए है।बिहार में पटना के बाद बात मुज़फरपुर की करे तो यहां भी प्रदुषण की समस्या ने लोगों को परेशान कर रहा है,शहर का प्रदूषण ग्राफ रेड जोन में है सबसे ज्यादा खतरनाक हाल जिला स्कूल के आसपास इलाके का बना है। जिला स्कूल का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 301 पर रहा। प्रदूषण से बचाव के उपाए -वाहनों की नियमित प्रदूषण जांच कराते रहें।-शहर में अनियंत्रित यातायात नहीं हो, इसका पूरा ख्याल रखें, जाम में वाहनों को बंद कर दें- घर से निकलने वाले कचरे को खुले में इधर-उधर नहीं जलाएं।- धुआं देने वाले पुराने वाहनों के परिचालन पर रोक।कुल मिलकर देखा जाए तो वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है.एहतियातन उपाए के दावे भी किये जा रहे है,लेकिन बड़ा सवाल ये है कि इसके ज़िम्मेदार काफी हद तक हम ही हैं क्योकि आधुनिकता के इस दौर में बिना सावधानी बरते प्रकृति के साथ जम कर खिलवाड़ हो रहा है ऐसे में ज़रुरत इस बात की है अब भी हमे एहतियात बरतना चाहिए ताकि स्वच्छ और साफ़ हवा में सांस ले सके। अमित सिंह की रिपोर्ट
हाजीपुर : खबर हाजीपुर से है जहां अभी नाबालिग से दुष्कर्म का मामला शांत भी नहीं हुआ था की जंदाहा थाना क्षेत्र से ही हैवानियत का एक और माला सामने आया है,,,,, यू कहे की जंदाहा थाना क्षेत्र में 2 वारदात पहले ही हो चुकी है जिसमे पुलिस पूरी तरह नहीं सुलझा पाई है वही तीसरी घटना सामने आ गई है,,,,लेकिन इस मामले में पुलिस एफआईआर ही नहीं दर्ज़ कर रही है,,,,,दरअसल पीड़ित महिला का पति बहार काम करता है और पति द्वारा भेजे गए पैसा , निकालने के लिए महिला गांव के मोबाइल दुकानदार के पास गई जिसके बाद बातचीत के दौरान आरोपी ने घर सहित पूरी जानकारी ले ली और अचानक रात में र 2 लोगों के साथ,पहुंचकर हथियार के बल पर महिला के साथ दरिंदगी की घटना को अंजाम दिया,,,, और इसका वीडियो बनाकर वाइरल कर दिया।अब इस घटना के बाद 3 महीने से महिला न्याय के लिए दर दर भटक रही है,,,,पीड़ित का कहना है कि थान जाने के बाद महिला को गाली-गलौज कर भगा दिया जाता है,,,,,महिला स्थानीय थाना के अलावा स्पेशल हरिजन थाना और जिले के एसपी ऑफिस तक गुहार लगा चुकी है लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ.वही इस पुरे मामले पर राज्य की पूर्व उपमुख्यमंत्री रेनू देवी ने सरकार पर जमकर हमला बोला और महिला को नये दिलाने के लिए आंदोलन की बात कही.सूबे की सरकार महिलाओं के उत्थान को लेकर लगातार बाते करती है और उनको हर स्तर पर सम्मान देने की बात भी होती है लेकिन हाजीपुर के जंदाहा थाना क्षेत्र में जिस तरीके से महिला के साथ दरिंदगी हुई और उसके इज़्ज़त को तार तार करने के बाद भी वो न्याय के लिए दर दर भटक रही है जहां न्याय के बदले उसे धिक्कार मिला रहा है उससे तो यही लगता है कि प्रशासनिक महकमे को इससे कोई संवेदना नहीं है। अमित सिंह की रिपोर्ट
पटना : बिहार में इन दिनों लूट और छिनतई की घटना बढ़ गई है,,,,पिछले 1 सप्ताह की बात करे तो बिहार भर में कई लूट की घटनाएं हुए है जिनमे प्रमुख रूप से पटना, मुजफ्फरपुर और मधुबनी की घटना है,,,,सबसे पहले बात राजधानी पटना की करे तो यहां भी अपराधियों का तांडव देखने को मिला बैंक से पैसा निकासी कर घर लौट रही महिला से बाइक सवार दो अपराधियों ने पैसे से भड़ा बैग झपट लिया,,,,,ये घटना शुक्रवार की सुबह 11 बजे की है घटना की सूचना मिलते ही राजीव नगर थाने की पुलिस जांच के लिए पहुंची लेकिन बाइक सवार अपराधी फरार हो गए,,,,,वही पटना के बिहटा में सोमवार को एक साथ कई लोगों से मोबाइल और चेन की छ्हिनताई हुई तो मुजफ्फरपुर में आईआईसीआइ बैंक से 15 लाख की लूट हो गई. लूट का ये सिलसिला यही नहीं रुका ताज़ा मामला मधुबनी का है जहां दरभंगा के समैला निवासी रहिका PHC से रिटायर नर्स गिरिजा देवी आज SBI की मुख्य शाखा से 10 लाख रुपए की निकासी कर ऑटो से घर जा रही थी उसी दौरान नगर थाना क्षेत्र के भौआरा में बाइक सवार अपराधियों ने महिला के हाथ से 5 लाख रुपए से भरा झोला झपट कर भाग निकले। आरा में भी उस वक्त अफरातफरी मच गई जब मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में एक महिला से पांच लाख से भरा बैग लेकर रफूचक्कर हो गए,,,,शहर के नवादा थाना क्षेत्र अंतर्गत गोढना रोड निवासी सुरेश प्रसाद शर्मा और उनकी पत्नी सुनैना देवी पकड़ी स्टेट बैंक से पांच लाख रूपए निकल कर घर जा रहे थे तभी इनके साथ लूट की घटना हुई। बिहार में लूट की बढ़ी घटनाओ पर विपक्ष के नेताओं ने भी सरकार पर हमला बोला है,,,,और अपराध और अपराधियों के बेलगाम होने की बात कही है.अपराध पर भले ही बयानबाजी हो सरकार पर हमला हो ये अपनी जगह है लेकिन बड़ा सवाल ये है की जब पुलिस इतनी तत्परता की बात करती है तब भी अपराधी सरेआम इस तरह एक के बाद एक लूट की घटनाओ को कैसे अंजाम दे देती है ज़रूत है कानून व्यवस्था को और सख्त करने की ताकि इस तरह की घटनाओं पर लगाम लग सके। अमित सिंह की रिपोर्ट
PATNA : बिहार में जब से महागठबंधन की सरकार बनी है तब से आरोप प्रत्यारोप खूब तेज़ हो गया है। बीजेपी जहां सरकार को भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति याद दिलाती रहती है। वही महागठबंधन के नेता इसे सत्ता से बाहर होने की खीज बताते नहीं थकते वर्तमान में पीएम मोदी के ताज़ा बयान के बाद ये मामला और गरमा गया है। दरअसल पीएम मोदी ने केरल के एक रैली में नीतीश कुमार का बिना नाम लिए कहा कि भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के बाद कुछ लोग नए गठजोड़ में लग गए है। बस फिर क्या था इस बयान के बाद बिहार में सियासी सरगर्मी तेज़ हो गई।वहीं इस मसले पर मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि हम भ्रष्टाचारियों को कभी बचा सकते हैं क्या हमारे राज्य में क्या हो रहा है यह सबको पता है। अन्य राज्यों में क्या हो रहा है यह भी लोगों को दिखना चाहिए। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि पीएम मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं। बल्कि अपने विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे है। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि कई बीजेपी के लोग भ्रष्टाचारी हैं। लेकिन उनपर कोई कार्रवाई नही हुई। वहीं तेजस्वी यादव ने जांच एजेंसियों की लगातार हो रही कार्रवाई पर कहा कि बेवजह सबको परेशान किया जा रहा है। देश में सबसे ज्यादा बीजेपी के सांसद और विधायक हैं लेकिन उन लोगों के यहां छापेमारी नहीं हो रही है,उन्हें कौन बचा रहा है।कुल मिलाकर बिहार में नई सरकार के गठन के बाद जिस तरीके से जदयू की भूतपूर्व सहयोगी और वर्तमान विपक्ष बीजेपी हमलावर हुई है सरकार की परेशानी बढ़ गई है क्योकि हर कदम पर भाजपा भ्रष्टाचार और अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति की याद दिलाती रहती है। ऐसे में बिहार की वर्तमान सियासी नूराकुश्ती से तो यही लगता है की सभी पार्टियां चुनावी रंग में खुलकर आ गई है।
पटना : बिहार में इन दिनों गंगा में उफान से लोग परेशान है। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने लोगो के जीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है। बात राजधानी पटना की करे तो गंगा नदी में उफान से कई इलाकों में पानी फैल गया है। गंगा पथ वे के इलाकों में भी गंगा नदी का पानी फैल गया है। जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है। बात हाजीपुर की करे तो जिले के महनार में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रहे बढ़ोतरी को देखते हुए निचली इलाके के वाशिंदे दहशत में आ गये हैं। गंगा नदी से सटे महनार नगर परिषद वार्ड संख्या 21 के सैकड़ो दलित परिवार का घर जलजमाव से घिर चुका है। लोग ऊँचे जगहों पर शरण लेना शुरू कर दिए हैं। वही बेगूसराय जिले के 6 प्रखंडों में गंगा के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिले के बछवारा, तेघरा, मटिहानी, बलिया, साहेबपुर कमाल प्रखंड , शाम्हो प्रखंड के दियारा क्षेत्रों में गंगा के जलस्तर बढ़ने से जहां फसलें डूब गई है वहीं अब घरों में भी पानी प्रवेश कर गया है। सिमरिया बिंद टोली के दर्जनों घरों में गंगा के बढ़ते जलस्तर से घरों में पानी प्रवेश कर गया है। हालाकि अभी तक जिला प्रशासन के द्वारा कोई राहत कार्य नहीं चलाया गया है,जिससे लोगों में आक्रोश है। स्थानीय सांसद सह केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के प्रतिनिधि प्रभाकर कुमार राय के पहल पर ग्रामीण कार्य विभाग पुल को बचाने में मरम्मति कार्य करा रह है । भागलपुर में भागलपुर गंगा का जलस्तर बढ़ने से सबौर प्रखंड के तटवर्ती इलाकों में जान माल की हो रही तबाही से बाढ़ से घिरे लोग किसी तरह कर रहे अपना गुजर-बसर, ग्रामीण मचान बनाकर अपना आशियाना तैयार कर रहे है,,,,एनएच के दोनों तरफ पानी जमा हो गया है,,,,सबसे खराब हालत सबौर प्रखंड के रजनदीपुर पंचायत के बगडेर की है। जहां गांव में 4 से 5 फीट पानी बाह रहा है. वहीं जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है उसकी तैयारी की जा चुकी है परंतु कई क्षेत्रों में गंगा का पानी घुस आया है कई गांव के लोग गंगा के जलस्तर के बढ़ने के चलते परेशान हैं उन्हें प्रशासनिक सहायता जल्द से जल्द पहुंचाई जाएगी। बिहार के लोग पहले सुखाड़ से परेशान थे किसानो की फसलें बर्बाद हो गई और अब बाढ़ जैसे हालत बची फसलों को भी बर्बाद करने पर लगे है गंगा के बढ़ते जलस्तर से एक ओर किसानों की परेशानी बढ़ी है वही निचले इलाकों में रहने वालों का जनजीवन भी अस्त व्यस्त हो गया है। अमित सिंह की रिपोर्ट
मुजफ्फरपुर : कटरा प्रखंड के डुमरी गांव की दशा आज सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है,,,, वैसे तो यहाँ के लोग हंसी खुशी से रहते हैं,,,, लेकिन एक बात है, जो इस गांव के विकास को काफी पीछे धकेल देती है,,,, वह है पुल। आजादी को 75 साल बीतने को आये पर इस गांव के लोगों को एक पुल नसीब नहीं हुआ बाढ़ के समय आवागमन में काफी परेशानी होती है,,,दशकों से नेता मंत्रियों और विधायकों से फरियाद लगाते रह गए, सब जगह से आश्वासन मिला। लेकिन, किसी ने पुल नहीं बनवाया। अब ग्रामीणों ने खुद चंदा जमा कर पुल बनवा दिया।"खुदी को कर बुलंद इतना के हर तकदीर से पहले खुदा बन्दे से खुद पूछे के बता तेरी रज़ा क्या है" जी हां कटरा प्रखंड के डुमरी गांव के लोगों के लिए ये पंक्ति बिलकुल सटीक है,,,दृढ इच्छा शक्ति और 20 दिनों की मेहनत से इन लोगों ने ये कर दिखाया,,,,ज़रा आप इस तस्वीर को देखिये किस तन्मयता से पुल बनवाया जा रहा है,,,,,बनने के बाद इसे दुल्हन की तरह सजाया भी गया है डुमरी गांव के लोगों के इस प्रयास की हर ओर तारीफ हो रही है. करीब आठ लाख चंदा इकठ्ठा कर इनलोगों ने ये पुल बनवाया है इसकी ख़ुशी तो इन्हे है ही लेकिन इससे ज़्यादा ख़ुशी इस बात की है कि अब इन्हे कभी सरकार या किसी नेता मंत्री से पुल के लिए फ़रियाद नहीं करना होगा। लेकिन इससे ज़रुरत है सरकार और सिस्टम को भी सीख लेने की। अमित सिंह की रिपोर्ट
इस तस्वीर को ज़रा गौर से देखिये जिस तरीके से कतारबद्ध होकर कई सारे बुलडोजर धड़ाधड़एते हुए आगे बढ़ते जा रहे हैं इसको देखकर निश्चित तौर पर ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है की किसी बड़ी करवाई की तैयारी है। और तैयारी ऐसी जिसके तामील होते ही हज़ारों सपने पल भर में ज़मींदोज़ हो जाय। जी हाँ हम बात कर रहे है राजीव नगर की जहां रहने वाले हज़ारो लोगों के लिए रविवार की सुबह ऐसी मुसीबत बन कर आई जो उनके ज़िन्दगी की गाढ़ी कमाई के एक एक पैसे जोड़कर बनाये गए आशियाने को पल भर में उजाड़ दिया। ज़रा गौर से देखिये कल तक गुलजार रहने वाले राजीवनगर के ये वही आशियाने हैं जो अब मलबे में तब्दील हो चुके हैं और इन गलियों की हंसती हुई ज़िंदगियों और बच्चों की किलकारियों की जगह मातमी सन्नाटा बेरहम कार्रवाई की गवाही दे रहा है। आज जब कार्रवाई के लिए जब 2000 फ़ोर्स के साथ वरीय अधिकारी पहुंचे तो ये इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। लोगों ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए जिसमे सिटी एसपी घायल हो गए काफी देर तक जदोजहद की स्थिति रही। कई लोग घायल भी हुए आखिरकार प्रशाशन के सामने लोगो को अपनी बेबसी और लाचारी के साथ अपने सपने के आशियाने को धराशायी होते देखने के आलावा कोई उपाए नाहीं सूझ रहा था। अब आइये आपको थोड़ा ये मामला बता देते हैं। दरअसल ये मामला काफी पुराना है। आवास बोर्ड ने 1024 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन उसपर विवाद हो गया मामला कोर्ट गया, 2014 में कैबिनेट से नियमावली भी पास हुई लेकिन वो लागू नहीं हो पाया। ऐसा नहीं है की जिनके मकान बने हैं उन्होंने कोई गलती नहीं की है। उन्होंने ने भी सभी चीज़ों को नहीं देखा लेकिन इस वक़्त जो कार्रवाई हो रही है वो कई सारे सवाल खड़े कर रही है। मकानों को अवैध बताकर तोड़ तो दिया गया लेकिन इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए इतनी बड़ी संख्या में लम्बे समय से मकानों का निर्माण कैसे हुआ अवैध मकान बने शुरू हुए तभी क्यों नहीं कार्रवाई की गई एक बाद एक इतनी संखया में मकान कैसे बन गए अवैध होने के वाबजूद इन इलाकों में सरकारी सुविधा कैसे पहुँची सरकारी फंड से सड़कों और नालों का निर्माण कैसे हुआ वोटर लिस्ट में इनका नाम कैसे जुड़ गया बारिश के दिनों में बेघर करना कितना सही है सरकार ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की टूटे हुए सपने और उजड़े हुए आशियाने राजीव नगर के लोगों के लिए आज की रात को और भारी कर देगी, लेकिन ज़िंदगी अब नए संघर्ष के लिए जदोजहद शुरू करेगी। इसकी बानगी इस बच्ची का बयान है जो बड़ी मुश्किल से बयान देते वक़्त अपनी आंसू को रोककर झूठी हंसी के सहारे अपनी हिमायत को बरकार रखी है।कुल मिलकर गलती किसी एक की नहीं है कमीं दोनों और से है लेकिन बड़ा सवाल ये है की सरकार के पास कई सारे संसाधन है व्यवस्था है हल निकला जा सकता था लेकिन इसके बदले सपनों के आशियानों को उजाड़ने का ही विकल्प क्यों चुना गया।
पटना : संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC 2021 का रिजल्ट सोमवार को जारी हो गया,,,यूपीएससी में इस बार भी बिहारी प्रतिभा ने अपना लोहा मनवाया है ,,,,सिविल सेवा परीक्षा 2021 में सेकेण्ड टॉपर अंकिता अग्रवाल रही है जो मंउल रूप से मधेपुरा के बिहारीगंज की रहने वाली है,,,,अंकिता के दादा जी मालीराम अग्रवाल बिहारीगंज के बड़े हार्डवेयर व्यवसायी रहे हैं,,,हालांकि फिलहाल अंकिता और उनका परिवार कोलकाता में रहता है.वहीँ मोतिहारी के पताही प्रखंड के नारायणपुर निवासी शुभंकर प्रत्यूष पाठक को 11वीं रैंक लाकर अपने ज़िले और राज्य का नाम रोशन किया है शुभंकर ने आईआईटी धनबाद से बीटेक किया है,,,,शुभंकर के पिता आरके पाठक भारत सरकार में तकनीकी विकास बोर्ड में सचिव हैं। मुंगेर की अंशु प्रिया यादव ने 16वी रैंक लेकर काफी खुश है और अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देती है अंशु के पिता शैलेंद्र कुमार यादव पेशे से सरकारी शिक्षक हैं। पटना के बिस्कोमान कॉलोनी के रहने वाले आशीष को सिविल सेवा परीक्षा में 23 वां स्थान मिला है ,,,,आशीष ने ये सफलता पहले प्रयास में हासिल की है,,,,,आशीष सिटी कॉर्पोरेशन की नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी में जुटे थे। इस बार के सिविल सेवा परीक्षा में लोकतंत्र की जननी वैशाली की धरती से एक बेटी ने अपने मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति से जिले और राज्य गौरव प्रदान किया है,,,, हाजीपुर के सुल्तानपुर पंचायत मंगूरही की श्रेया श्री ने यूपीएससी में 71 वा स्थान हासिल किया है,,,,इसके बाद घर में जश्न का माहौल बन गया है.मुजफ्फरपुर के मीनापुर के टेंगराहा के रहने वाले अभिनव ने यूपीएससी की परीक्षा में 146 वां रैंक लाकर अपने माता पिता का नाम रोशन किया है ,,,अभिनव ने आईआईटी रुड़की से स्नातक किया और जॉब करते हुए ये सफलता पाई,,,अभिनव को आईआईटी में गोल्ड मैडल भी मिल चूका है अभिनव ने कशिश न्यूज़ से ख़ास बातचीत में बताया की वो पुलिस सेवा में जाना चाहते है। मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड के मुकसुदपुर के रहने वाले विशाल कुमार को 484वां रैंक मिला है,,,,, विशाल के पिता बिकाऊ प्रसाद की मौत के बाद परिवार कर्ज में डूब गया था,,,,मैट्रिक की परीक्षा में जिला टापर रहे विशाल फिर पूर्व DGP अभयानंद के मार्गदर्शन में पढ़ाई की और IIT कानपुर में केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद तैयारी कर रहे थे. अररिया के फारबिसगंज के खवासपुर के रहने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक श्यामलाल भगत के पुत्र कुमार सानू ने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा क्वालीफाई किया और आल इंडिया सामान्य कोटी में 505वां रैंक लाया,,,,सानू की इस उपलब्धि से घर पर माता-पिता को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।बेगूसराय के राहुल आनंद ने यूपीएससी की परीक्षा में प्रथम प्रयास में ही 321वां रैंक लाया है जिससे परिजनों में काफी खुशी है,,, 21 वर्षीय राहुल आनंद अपने पहले प्रयास में ही यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली है,,, परिजनों ने राहुल आनंद को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटी। राहुल ने बताया कि लगातार कठिन परिश्रम से पहले प्रयास में ही ये सफ़लता मिली। वहीं, रोहतास के अमन आकाश ने 360वां रैंक प्राप्त किया है,,,,अमन बिक्रमगंज शहर के शांति नगर मुहल्ला के निवासी हैं,,,,इनकी प्रारंभिक शिक्षा बिक्रमगंज के गांधी इंटर स्कूल से हुई है,,,,अमन ने MP में SBI के मैनेजर पद पर कार्यरत रहते हुए यह रैंक हासिल किया है. कुल मिलकर देखा जाए तो यूपीएससी की परीक्षा में इस बार भी बिहारी छात्र छात्रों ये ये बता दिया की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बुलंद हौसला और कड़ी मेहनत के बल पर बड़ा मुकाम भी आसानी से हासिल किया जा सकता है।अमित सिंह की रिपोर्ट
पटना : भोजपुरी की लोक गायिका देवी का आज जन्मदिन है। बिहार के छपरा में इनका जन्म हुआ था बताया जाता है कि जब देवी का जन्मदिन हुआ था तब भी 10 अप्रैल को रामनवमी का त्योहार था। चैत्र नवरात्र के नवमी के दिन जन्म होने की वजह से ही इनके माता पिता ने इनका नाम देवी रखा। देवी भोजपुरी की जानी मानी गायिका है इन्हे अपनी करियर में काफी सफलता मिली और इनके गाने को लोगों ने खूब पसंद किया जिससे इन्हे काफी शोहरत भी मिली। देवी का बचपन से ही संगीत की ओर रुझान था। दसवीं के बाद देवी संगीत की शिक्षा हासिल करने के लिए दिल्ली चली आई और गन्धर्व संगीत महाविद्यालय से संगीत की शिक्षा प्राप्त करने लगी साथ ही श्रीराम भारतीय कलाकेंद्र से कत्थक डांस भी सीखा। संगीत की शिक्षा पूरी करने के बाद देवी ने करियर में सफलता पाने के लिए काफी मेहनत की। वहीँ शुरुआत के दिनों में देवी को संघर्ष भी करना पड़ा लेकिन 2003 में जाकर इन्हे सफलता मिली और फैंस का भरपूर प्यार मिला। इसके बाद देवी ने एक के बाद एक कई हिट एल्बम दिए जिसे लोगों ने खूब सराहा और देवी स्टार बन गई। आज जन्मदिन के मौके पर कशिश न्यूज़ की तरफ से लोक गायिका देवी को बहुत बहुत बधाई। अमित सिंह की रिपोर्ट
राजधानी की सड़को पर अब डीजल बसें और ऑटो नहीं चलेंगी जी हाँ बिलकुल सही सुना आपने 1 अप्रैल से 12000 से अधिक गाड़िया शहर से बहार हो जायेंगीं,,,दरअसल इस वक़्त राजधानी के अंदर 12000 हजार डीजल ऑटो और 250 डीजल बसें है जिसे हटाने की कवायद चल रही है ,,,आपको बता दे की ये फरमान कोई नया नहीं है हुआ यूँ की साल 2019 में पटना वायु प्रदूषण के मामले में देश में टॉप पर पहुँच गया था, यहां का एक्यूआई लेवल 400 के पार चला गया था इसके बाद सरकार ने डीजल गाड़ियों पर प्रतिबन्ध लगाने का फैसला लिया था. पहले 31 जनवरी 2020 से ही बंद होने वाला था जिसके बाद बढ़ा कर 31 मार्च 2021 किया गया फिर 30 सितम्बर और अब 31 मार्च 2022 तय किया गया है ताकि लोग अपनी गाड़ी को सीएनजी में कन्वर्ट करा ले। और इस बार परिवहन विभाग मोहलत देने की मूड में बिलकुल भी नहीं दिख रहाहालाकि सरकार सीएनजी में कन्वर्ट करवाने पर अनुदान भी दे रही है। इसको लेकर लोगो की अपनी अपनी राय है.आइये आपको ग्राफिक्स के माध्यम से दिखते है सीएनजी में कन्वर्ट करने पर सरकार क्या मदद कर रही है। * 16 और 24 सीटों वाली बसों के लिए अनुदान मिलेगा * कीमत का 50 फीसदी या अधिकतम 7.50 लाख मिलेगा * पुरानी परमिट पर नई सीएनजी बस चला सकेंगे * 7 लोगों की क्षमता वाले तिपहिया वाहनों को सीएनजी में कन्वर्ट करवाने पर 40 हज़ार अनुदान * 7 लोगों की क्षमता वाले पेट्रोल ऑटो को सीएनजी रिट्रोफिटमेंट करने पर 20 हज़ार अनुदान *7 लोगों की क्षमता वाले तिपहिया वाहन को बैट्री चलित वाहन से प्रतिस्थापित करने पर 25 हज़ार अनुदान * व्यावसायिक कैब में कब में सीएनजी किट के रिट्रोफिटमेंट करने पर 20 हज़ार का अनुदान मिलेगा। आइये एक नज़र डालते है फिलहाल राजधानी में गाड़ियों की स्थिति पर * सीएनजी ऑटो --15 हज़ार * डीजल ऑटो--12 हज़ार* पेट्रोल ऑटो --8 हज़ार* सीएनजी बस --70 * इलेक्ट्रिक बस --26 * डीजल बस --250 राजधानी की सड़को पर अब डीजल बसें और ऑटो नहीं चलेंगी जी हाँ बिलकुल सही सुना आपने 1 अप्रैल से 12000 से अधिक गाड़िया शहर से बहार हो जायेंगीं,,,दरअसल इस वक़्त राजधानी के अंदर 12000 हजार डीजल ऑटो और 250 डीजल बसें है जिसे हटाने की कवायद चल रही है ,,,आपको बता दे की ये फरमान कोई नया नहीं है हुआ यूँ की साल 2019 में पटना वायु प्रदूषण के मामले में देश में टॉप पर पहुँच गया था, यहां का एक्यूआई लेवल 400 के पार चला गया था इसके बाद सरकार ने डीजल गाड़ियों पर प्रतिबन्ध लगाने का फैसला लिया था. पहले 31 जनवरी 2020 से ही बंद होने वाला था जिसके बाद बढ़ा कर 31 मार्च 2021 किया गया फिर 30 सितम्बर और अब 31 मार्च 2022 तय किया गया है ताकि लोग अपनी गाड़ी को सीएनजी में कन्वर्ट करा ले। और इस बार परिवहन विभाग मोहलत देने की मूड में बिलकुल भी नहीं दिख रहाहालाकि सरकार सीएनजी में कन्वर्ट करवाने पर अनुदान भी दे रही है। इसको लेकर लोगो की अपनी अपनी राय है.आइये आपको ग्राफिक्स के माध्यम से दिखते है सीएनजी में कन्वर्ट करने पर सरकार क्या मदद कर रही है। * 16 और 24 सीटों वाली बसों के लिए अनुदान मिलेगा * कीमत का 50 फीसदी या अधिकतम 7.50 लाख मिलेगा * पुरानी परमिट पर नई सीएनजी बस चला सकेंगे * 7 लोगों की क्षमता वाले तिपहिया वाहनों को सीएनजी में कन्वर्ट करवाने पर 40 हज़ार अनुदान * 7 लोगों की क्षमता वाले पेट्रोल ऑटो को सीएनजी रिट्रोफिटमेंट करने पर 20 हज़ार अनुदान * 7 लोगों की क्षमता वाले तिपहिया वाहन को बैट्री चलित वाहन से प्रतिस्थापित करने पर 25 हज़ार अनुदान * व्यावसायिक कैब में कब में सीएनजी किट के रिट्रोफिटमेंट करने पर 20 हज़ार का अनुदान मिलेगा। आइये एक नज़र डालते है फिलहाल राजधानी में गाड़ियों की स्थिति पर * सीएनजी ऑटो --15 हज़ार * डीजल ऑटो--12 हज़ार* पेट्रोल ऑटो --8 हज़ार* सीएनजी बस --70 * इलेक्ट्रिक बस --26 * डीजल बस --250 तो देखा आपने की राजधानी पटना में कितनी गाड़िया है जो प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने का करक बन रही है हालांकि ऑटो चालकों और का मन्ना है की इसके लिए समय और देना चाहिए और साथ ही महंगाई की दुहाई भी दे रहे हैं..कुल मिलकर देखा जाये तो जिस तरीके से प्रदुसजहन का स्टार बढ़ रहा है और लोगों के जीवन पर प्रभाव पद रहा है ऐसे में ज़रूरी है की इस दिशा में ठोस पहल हो और राजधानी से डीजलगाडियों के हटाने का फैसला भी इसी का एक हिस्सा है। अमित सिंह की रिपोर्ट
बगहा : ये है नेहा की पाठशाला जी हाँ बिलकुल सही सुना आपने,,,बगहा नगर के बनकटवाके सुदूर इलाके में रहने वाली वो नेहा जिसकी ज़िद है की मलिन बस्ती के बच्चों के जीवन में भी ज्ञान का प्रकाश फैले और ये लोग शिक्षित हों ,,,,बनकटवा के पूर्व टोला की रहने वाली नेहा गरीबों के बीच शिक्षा की अलख जगा रही है,,,पेशे से राजमिस्त्री का काम करने वाले हिरामन ठाकुर की पुत्री नेहा पिछले दो सालों से गरीबों के बीच शिक्षा का प्रसार कर रही है ,,,बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने के साथ ही सामाजिक सगठन के सहयोग से उन्हें मुफ्त में पाठ्य सामाग्री भी उपलब्ध करा रही हैं,,,नेहा ऐसे परिवारों के बच्चों के बीच शिक्षा की रौशनी पहुँचा रही है जिनके पास स्कूल भेजने से लेकर घर में जरूरत की सामग्री का घोर आभाव है या यूँ कहे की इन लोगों के पास इतना सामर्थ्य नहीं है,,,,ऐसे में नेहा की ये कोशिश इन्हे शिक्षा के करीब ला रही है जिसकी हर और तारीफ हो रही है.दरअसल नेहा अपने बचपन में काफी संघर्ष से पढ़ी है सो उन्हें पढाई का महत्त्व और गरीबी की वजह से आने वाली परेशानी दोनों पता है इसलिए नेहा ने अपना मिशन बना लिया की अब वो गरीब बच्चों को पढ़ाएंगी ताकि पैसे के आभाव में पढाई से वंचित न होना पड़े.दरअसल नेहा मुख्यमंत्री नितीश कुमार के बेटियों के पढाई के गंभीरता से काफी प्रभित हुई और इसी से प्रेरणा लेकर इन गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने का फैसला लिया।यूँ तो नेहा की दृढ़ इच्छा शक्ति और बुलंद हौसले ही बनकटवा के इन मासूमो के शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए काफी है लेकिन मुख्यमंत्री की पोशाक और साईकिल योजना ने भी नेहा के मनोबल को और बढ़ाया ,,,जिस तरह से नेहा खुद एक स्टूडेंट होते हुए बनकटवा के सुदूर मलिन बस्ती में मासूमो के बीच मुफ्त शिक्षा दे रही है वो वाकई कबीले तारीफ है ऐसे में हम भी नेहा के इस मज़बूत इरादे बुलंद हौसलों को सलाम करते है. अमित सिंह की रिपोर्ट
मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार का प्रमुख शहर है यु तो ये शाही लीची के लिए काफी प्रसिद्ध है लेकिन इसके अलावा ये एक और खासियत के लिए मशहूर है वो है कपडा व्यवसाय,,,,और इसका प्रमुख केंद्र है सूतापट्टी,,,शहर के बीचोबीच स्थित इस कपडे की मंडी में कई सारे थोक और खुदरा दुकाने है ,,,लोग भी बिहार के अलग अलग हिस्सों से यहाँ खरीददारी करने आते है लेकिन यहां आने के बाद जितनी वेराइटी अवसर अलग अलग दुकानों में मिलती है उतनी ही ज़्यादा दिक्कत और असुविधा यहाँ की तंग गलियों में दिखती है,,,,एक ओर जहां इसे हेरिटेज घोषित करने की बात हो रही है वहीं दूसरी ओर सरकारी उदासीनता सूतापट्टी के समृद्ध इतिहास को नज़रअंदाज़ कर रही है ,,,,जब कशिश की टीम इस मशहूर लेकिन तंग गलियों का ज़ायज़ा लेने पहूची तो यहां के व्यवसाई हसरतभरी निगाहों से देखने लगे की अब हमारी इस लम्बे आरसे से चले आ रहे मांग और समस्या को एक बार फिर आवाज़ मिलेगी,,,,हलाकि यहां के विकास की बात सालों साल से होती आ रही है चुनवी मुद्दा भी कई बार बना मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी के कतार में भी खड़ा हुआ लेकिन बावजूद इसके सूतापट्टी की सूरत बदल न सकी,,,ऐसे में यहां के व्यवसाइयों की सिस्टम से शिकायत लाज़मी है.ये सूतापट्टी की एक प्रमुख दूकान है एच बी रीटेल्स जिसका है हनुमान प्रसाद बिहारीलाल दूकान के संचालक जानकी टिकमानी बताते है कि 50 से 60 साल पुरानी इनकी दूकान है और लम्बे समय से सूतापट्टी की विकास की बाते सुनते आ रहे है यहां से करोड़ो का व्यवसाय होता है सरकार को काफी राजस्व भी मिलता है लेकिन लेकिन अब तक यहां सरकार की नज़रे इनायत नहीं हुई.अब आइये ज़रा इनकी दूकान की खासियत भी आपको बता देते है टिकमानी जी बताते है कि एच बी रीटेल्स का व्यापार का अलग तरीका है यहां ग्राहकों के लिए खास व्यवस्था की गई है,,,यहां उत्पादक से उपभोक्ता तक सीधा सम्बन्ध स्थापित करवाते है जिससे ग्राहकों को काफी फायदा मिलता है इतना ही नहीं यहाँ अलग अलग वेराइटी के लिए अलग अलग सेक्शन बनाये गए है जिससे ग्राहकों को कोई परेशानी न हो,,,,पहले यहां केवल थोक कारोबार ही होता था लेकिन अब खुदरा कारोबार होने से ग्राहकों को सुविधा मिल रही है,,,,अलग अलग ज़िलों से आये ग्राहकों का मानना है यहां उचित दर पर व्यापक रेंज मिल जाता है इसलिए एच बी रीटेल्स हमारी पहली पसंद है,,,,एच बी रेटेल्स में जहां अलग अलग वेराइटी की साड़ियां सलवार सूट, सूटिंग्स शीर्टिंग्स, वेडिंग स्पेशल कलेक्शन्स के साथ मेंस वियर की विशाल रेंज उपलब्ध है वही किड्स और रेडीमेड सेक्शन भी एक ही छत के नीचे उपलब्ध है।कुल मिलकर देखा जाए तो सूतापट्टी की सूरत बदलने का इंतज़ार वर्षों से लोगो को है लेकिन बार बार इसकी अनदेखी की गई है,,,,इस उपेक्षा से आमलोग तो नाराज़ है ही व्यापारियों को भी काफ़ी परेशानी होती है,,,,नेताओं के चुनावी वादे और प्रशासनिक अधिकारियों के दिलासे के भरोसे अब लोग इंतज़ार करने के मूड में नहीं है.ऐसे में अब सरकार को भी भारी राजस्व देने वाले सूतापट्टी की सुध लेनी चाहिए। अमित सिंह की रिपोर्ट
पटना : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हर ओर महिलाओं की उपलब्धियों की चर्चा हो रही है और उन्हें विशेष सम्मान भी दिया जा रहा है,,,,,लेकिन ये तस्वीर जो हम आपको दिखा रहे है ये बिहार विधानसभा परिसर की है जहाँ महिला विधायक अपने हक़ को लेकर आवाज़ उठा रही है और इसमें खास बात ये है की इन महिलाओं का हौसला इसलिए भी बढ़ा है कि नितीश सरकार ने ही महिलाओं को पंचायतीराज व्यवस्था में आरक्षण दिया जिससे इनका मनोबल बढ़ा है और आज ये अपनी मांगों को मज़बूती से उठा रही है,,,,,,बिहार में महिलों को आगे बढ़ने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अहम् भूमिका निभाई है,,,और शायद यही वजह है की नितीश के महिला मॉडल की बिहार में ही नहीं देश भर में चर्चा हो रही है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सरकार बनने के बाद महिलों के उत्थान के लिए कई सारे काम किये जिनमे साईकिल योजना पोषक योजना और जीविका योजना प्रमुख है। और इन योजनाओं के लाभ बारे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अक्सर अपने सम्बोधन कहते भी है। वही इससे लाभान्वित महिलाये भी सीएम का आभार व्यक्त करती है.जब साईकिल चलाते हुए बच्चियां एक समान पोशाक में स्कूल जाती है तो ऐसा लगता है जैसे पुरातन सोच पर सरकार ने करारा प्रहार किया है और बेटियों को अपने सपनो की उड़ान भरने के लिए पंख दे दिए ,,,,पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देकर और सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण देकर महिलाओं को सबल बनाने की सीएम नीतीश की कोशिश का असर भी साफ़ तौर पर दिखता है,,,,पंचायत प्रतिनिधि भी इसको लेकर अपनी ख़ुशी का इज़हार करते है,,,,,हाल ही में बिहार पुलिस को मिले 595 दरोगा बिहार के बेटियों के सशक्तिकरण की परिभाषा बयां करती है। बिहार में महिलाओं के विकास मॉडल की देश भर में तारीफ हो रही है और मौजूदा सरकार इनके विकास को लेकर लगातार योजनाए भी ला रही है जिससे की महिलाये पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलकर नहीं बल्कि एक कदम आगे चले। अमित सिंह की रिपोर्ट
पटना : खबर पटना से है जहाँ बिहार में जल्द ही डायल 112 की शुरुआत होने जा रही है,,,,उम्मीद की जा रही है कि अप्रैल तक ये सेवा शुरू हो जाएगी,,,दरअसल केंद्र सरकार की इनरजेन्सी रेस्पॉन्स सिस्टम के तहत इसकी शुरुआत होने जा रही है,,,इस सेवा का मकसद यही है की पहले से चल रहे 100 ,101 ,102 नंबर के बदले एक ही नंबर 112 लाना,,,अब इसको आप ऐसे समझ सकते है की किसी भी परेशानी में आप मदद के लिए 112 नंबर डायल कर सकते है मदद आपके पास तुरंत पहुंचेगी। 112 की सेवा सुचारु और सटीक तरीके से चलने के लिए राज्य सरकार सेना के रिटायर्ड ड्राइवरों में से 1255 लोगो की सेवा लेने जा रही है,,,दरअसल डायल 112 की सेवा शुरू करने केलिए तयारी लगभग पूरी हो चुकी है। इस सेवा को खास अंदाज़ में डिजाइन किया गया है जिसके तहत आपात इस्थिति में आम लोगो के द्वारा वॉयस काल,एसएमएस,इ मेल ,पानिक एसओएस रिक्वेस्ट और वेब रिक्वेस्ट इस पर आसानी से भेजी जा सके। डॉयल 112 पर जैसे ही कोई कॉल आएगा अपनेआप कम्प्यूटर में एक मामला रजिस्टर्ड हो जायेगा और एक यूनिक आईडी जेनरेट होगा इतना ही नहीं इसकी सूचना एसएमएस के द्वारा पीड़ित के मोबाइल पर चली जाएगी और साथ ही कलर का डिटेल यानि नंबर और लोकेशन कंट्रोल रूम के मॉनिटर पर दिखने लगेगा। यु तो पहले से ही 100 101 और 102 नंबर के सेवा लोगो को मदद पहुँचने के लिए है लेकिन इसका फायदा बहुत ज़्यादा नहीं मिल पा रहा है,,यानि कुल मिलकर कहा जा सकता है की अब बिहार में लोगों को किसी भी संकट में फसने पर त्वरित मदद मिल पायेगी। अमित सिंह की रिपोर्ट