नीतीश एज ए पीएम मटेरियल.....प्रस्ताव कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए या फिर कुछ और.....
पटना। रविवार को जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक हुई। जिसमें कई राजनीतिक प्रस्ताव पारित किये गए। उनमें से एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर था। जिसमें नीतीश कुमार को पीएम मटेरियल बताया गया, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया कि वे पीएम पद के दावेदार नहीं है। इस प्रस्ताव के बाद बिहार में यह चर्चा होनी लाजिमी है कि आखिर इस समय ऐसे प्रस्ताव का क्या मतलब है।
लंबे समय से या फिर यूं कहे कि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के समय से ही समय समय पर यह बताने की कोशिश हो रही है कि नीतीश कुमार पीएम मटेरियल हैं। यानि उनमें प्रधानमंत्री बनने के सारी काबिलियत है। एक बार एनडीए सरकार में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी बयान दिया था कि नीतीश कुमार पीऐएम मटेरियल है। सुशील मोदी का बयान उस समय आया था जब नरेन्द्र मोदी बीजेपी की ओर से पीएम पद के दावेदार लगभग तय हो गए थे। सुशील मोदी के बयान पर उस समय जबरदस्त राजनीतिक बवाल मचा था।
हालांकि, जेडीयू की ओर से भी समय समय पर नीतीश कुमार को पीएम मटेरियल बताया जाता रहा है। कभी ललन सिंह, कभी उपेन्द्र कुशवाहा तो कभी और कई नेता भी। इसपर बीजेपी के नेताओं की ओर से नाराजगी भी जाहिर की गयी है। कुछ समय पहले जब उपेन्द्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार को पीएम मटेरियल बताया था तो बीजेपी के मंत्री सम्राट चौधरी ने यह कहकर राजनीतिक गर्माहट बढा दी थी कि 2024 तक के लिए पीएम पद के कोई वैकेंसी नहीं है। जेडीयू हमेशा से यह जताने की भी कोशिश करता रहा है कि वह बीजेपी की विश्वस्त सहयोगी है। लेकिन कई ऐसे मुद्दे भी है कि जिसपर बीजेपी के स्टैंड से जेडीयू का स्टैंड अलग रहता है। ऐसे में बीजेपी कहीं न कहीं एक दबाव बना रहता है।
अब जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद के जरिए फिर से यह मामला उभरा है। कुछ राजनीतिक जानकार यह मान रहे हैं कि इस समय इस तरह का राजनीतिक प्रस्ताव सिर्फ कार्यकर्ताओं का मनोबल बढाने के लिए ही लाया गया है। जेडीयू ने यह फैसला किया है कि आने वाले दिनों में पांच राज्यों में चुनाव होने को है और जेडीयू उन चुनावों पर अपना भाग्य आजमाने उतरेगी। इससे पहले कई राज्यों के चुनाव में जेडीयू ने हिस्सा लिया, लेकिन उसका खाता तक नहीं खुला। ऐसे में पार्टी ने यह महसूस किया होगा कि जबतक जनता और कार्यकर्ताओं में जोश नहीं भरेंगे, तबतक पार्टी की पुरानी छवि वापस नहीं आ सकेगी।
नीतीश कुमार के पीएम पद के लिए स्वीकार्यता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या दूसरे दल इसे स्वीकार करेंगे या नहीं। अभी तो जेडीयू बीजेपी के साथ है तो ऐसे में इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। और अगर भविष्य में बीजेपी से अलग होकर कोई समीकरण बनेगा। उसमें बाकी के दल क्या नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार करेंगे या नहीं, यह भी एक काल्पनिक प्रश्न ही है।
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