नक्सली हमले में शहीद हुए महिमा नंद शुक्ला को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, शहादत पर गर्व
PALAMU : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में 11 फरवरी 2025 को हुए आईईडी विस्फोट में झारखंड के पलामू जिले के वीर सपूत, सीआरपीएफ हवलदार महिमा नंद शुक्ला गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हमले में उनके दोनों पैर क्षतिग्रस्त हो गए थे, उन्हें रायपुर के अस्पताल में भर्ती किया गया बाद में बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के एम्स रेफर किया गया लेकिन कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद महिमा नंद शुक्ला 20 फरवरी को अपनी शहादत को प्राप्त हुए।परिवार पर दुखों का पहाड़, लेकिन शहादत पर गर्वमहिमा नंद शुक्ला की असमय शहादत ने उनके परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है, उनके भतीजे अभिषेक शुक्ला ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए घटना की जानकारी मिली। जैसे ही अस्पताल से खबर आई कि महिमा नंद शहीद हो गए परिवार में दुख की लहर दौड़ गई। शहीद महिमा नंद शुक्ला अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी को छोड़ गए। उनके परिजनों ने कहा हम गर्व महसूस करते हैं कि चाचा ने देश के लिए अपनी जान दी लेकिन उनका जाना हमारे लिए एक अपूरणीय क्षति है। परिजनों ने यह भी कहा कि उनका परिवार हमेशा नक्सलियों के खिलाफ खड़ा रहा है और भविष्य में भी इस संघर्ष में डटा रहेगा।राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, आईजी ने दिया कंधाशहीद महिमा नंद शुक्ला को शुक्रवार को उनके पैतृक गांव कमलकेडिया में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग उनके गांव पहुंचे। इस दौरान सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह, पलामू डीआईजी वाई एस रमेश, एसडीपीओ मनोज झा, पांकी सर्किल इंस्पेक्टर पूनम टोपनो और अन्य अधिकारियों तथा जवानों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम यात्रा में सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह और सीआरपीएफ इंस्पेक्टर कुमार राजीव ने शहीद के पार्थिव शरीर को कंधा दिया, और उनकी शहादत को सम्मानित किया।आईजी साकेत सिंह का बयान – "यह क्षति अपूरणीय, लेकिन नक्सलियों का खात्मा तय"अंतिम विदाई के दौरान सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह ने कहा नक्सलवाद के खिलाफ यह संघर्ष लंबे समय से जारी है और हमने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इस संघर्ष में कई वीर जवानों ने अपनी जान दी है, महिमा नंद शुक्ला की शहादत को हम कभी नहीं भूलेंगे। उन्होंने कहा हम शहीद के परिवार के साथ हर कदम पर खड़े हैं और रहेंगे। नक्सली अब गिने-चुने रह गए हैं और जल्द ही उनका खात्मा कर दिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा महिमा नंद शुक्ला की शहादत न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे झारखंड और देश के लिए एक गहरी क्षति है। उनकी शहादत हमेशा याद रखी जाएगी और उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।
Simran Chaudhary·