कल्याण पदाधिकारियों का 7 सूत्री मांगों को लेकर विरोध, काली पट्टी बांधकर किया काम
पटना : बिहार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण पदाधिकारी संघ के आह्वान पर शुक्रवार को राज्यभर के कल्याण पदाधिकारियों ने सात सूत्री मांगों के समर्थन में काली पट्टी बांधकर अपने दायित्वों का निर्वहन किया. संघ ने सरकार को पूर्व में ही चेतावनी दी थी कि मांगों पर विचार नहीं होने की स्थिति में 11 सितंबर को काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया जाएगा.संघ के प्रतिनिधिमंडल ने 8 सितंबर को विभागीय मंत्री लखेंद्र पासवान एवं विभागीय सचिव से मुलाकात कर अपनी सात सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा था. संघ का कहना है कि मांगों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण निर्धारित कार्यक्रम के तहत राज्य के सभी जिलों में पदाधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया.क्या हैं प्रमुख मांगें?संघ ने प्रखंड एवं अनुमंडल स्तर पर कल्याण शाखाओं को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है. इसके तहत प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों के लिए कार्यालय कक्ष,लिपिक-सह-लेखापाल एवं डाटा ऑपरेटर की व्यवस्था तथा आवश्यक कार्यालय उपकरण और स्टेशनरी उपलब्ध कराने की मांग शामिल है.संघ ने सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना 388 पदाधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई विभागीय कार्रवाई को समाप्त करने की भी मांग की है. संघ का आरोप है कि 450 कार्यरत पदाधिकारियों में से 388 के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की गई और कई मामलों में दंड भी दिया गया. इसके अलावा 20 से अधिक जिला कल्याण पदाधिकारियों को पदावनत कर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित किए जाने का भी संघ ने आरोप लगाया है.सचिवालय में प्रतिनियुक्ति पर भी उठाए सवालकल्याण पदाधिकारी संघ ने सचिवालय में लंबे समय से प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं. संघ के अनुसार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण सेवा संवर्ग में कुल 632 पद सृजित हैं,जिनमें 450 पद कार्यरत हैं. इनमें 50 से अधिक पदाधिकारी वर्षों से सचिवालय में प्रतिनियुक्ति पर हैं.संघ ने दावा किया है कि लंबे समय तक सचिवालय में प्रतिनियुक्ति के कारण क्षेत्र में कार्यरत पदाधिकारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और इससे सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 5.4 करोड़ रुपये की वित्तीय क्षति हो रही है. संघ ने सचिवालय में कार्यरत मॉनिटरिंग सेल को समाप्त करने की मांग की है.सरकारी वाहन और यात्रा भत्ते की मांगसंघ ने प्रखंड एवं अनुमंडल स्तर के कल्याण पदाधिकारियों को सरकारी वाहन अथवा निश्चित यात्रा भत्ता देने की मांग भी उठाई है. संघ के अनुसार पदाधिकारियों को दूर-दराज के अनुसूचित जाति के टोलों में जाकर काम करना पड़ता है,लेकिन इसके लिए उन्हें सरकारी वाहन अथवा यात्रा भत्ता उपलब्ध नहीं कराया जाता. संघ ने कहा कि इससे विशेष रूप से महिला पदाधिकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.स्कूल-छात्रावास प्रबंधकों की अलग नियुक्ति की मांगकल्याण पदाधिकारियों ने आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों के प्रबंधकों की अलग से नियुक्ति की मांग की है. संघ के अनुसार कई पदाधिकारियों को एक से अधिक प्रखंडों का प्रभार देने के साथ गैर-विभागीय कार्य भी सौंपे गए हैं. ऐसे में उनके लिए विद्यालय अथवा छात्रावास में 24 घंटे उपलब्ध रहना संभव नहीं है.राजपत्रित पद का दर्जा देने की मांगसंघ ने सेवा संवर्ग नियमावली में सुधार करते हुए कल्याण पदाधिकारियों को राजपत्रित पदाधिकारी का दर्जा देने की मांग की है. साथ ही अनुमंडल कल्याण पदाधिकारियों को पूर्व में दिए गए वित्तीय अधिकारों को प्रभावी करने,प्रखंड कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति से संबंधित व्यवस्था समाप्त करने और वेतन विसंगति दूर करने की मांग की गई है.संघ ने सचिवालय और क्षेत्र में कार्यरत पदाधिकारियों के बीच संवाद की कमी दूर करने की भी मांग की है. संघ का कहना है कि विभागीय सचिव और क्षेत्रीय पदाधिकारियों के बीच नियमित संवाद नहीं होने के कारण स्थानांतरण,अर्जित अवकाश,मातृत्व अवकाश और शिशु देखभाल अवकाश जैसे मामलों के निपटारे में परेशानी होती है.संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को आगे भी चरणबद्ध तरीके से जारी रखा जाएगा.पटना से अंकिता की रिपोर्ट--
