रांची:नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति अब तक लंबित रहने और राज्य सूचना आयोग का कामकाज शुरू नहीं होने को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है.
मरांडी ने कहा कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के संबंध में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट रूप से सवाल किया था.उस समय मुख्यमंत्री ने जल्द नियुक्ति का आश्वासन दिया था.इसके बावजूद सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बाद भी मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली है और आयोग में अपीलों एवं शिकायतों की सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भरोसा करके ही उन्होंने नियुक्ति संबंधी अनुशंसा पर अपनी सहमति और हस्ताक्षर किए थे.उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति ही लंबित रखी जानी थी और आयोग का कामकाज शुरू नहीं होना था, तो नियुक्ति प्रक्रिया का लाभ आम नागरिकों को कैसे मिलेगा.
मरांडी ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि इस मामले से संबंधित जनहित याचिका उच्च न्यायालय में सरकार द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के आश्वासन के आधार पर निष्पादित हुई थी.उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व है कि राज्य सूचना आयोग को पूरी तरह कार्यशील बनाया जाए, ताकि नागरिकों को अपनी अपीलों और शिकायतों की सुनवाई के लिए दोबारा न्यायालय का दरवाजा न खटखटाना पड़े.
उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार नागरिकों को सरकारी कामकाज से संबंधित जानकारी मांगने और जवाब प्राप्त करने का अधिकार देता है.आयोग में सुनवाई नहीं होने से यह अधिकार व्यवहार में प्रभावित हो रहा है और सूचना मिलने में देरी से कई मामलों में उसका उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है.
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से मुख्य सूचना आयुक्त के चयन के लिए संबंधित समिति की बैठक अविलंब बुलाने, नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और राज्य सूचना आयोग में अपीलों एवं शिकायतों की नियमित सुनवाई शुरू कराने की मांग की है.साथ ही उन्होंने इन कार्यों की स्पष्ट समयसीमा से अवगत कराने का आग्रह किया है.
रांची से राजीव मोहन श्रीवास्तव की रिपोर्ट--
