हाईकोर्ट में घसीटने की दी धमकी, जानें क्या है माजरा
पटना : बिहार में शिक्षा विभाग के ACS (अपर मुख्य सचिव) केके पाठक और पटना के DM चंद्रशेखर सिंह के बीच तकरार इन दिनों थमने का नहीं ले रही है। स्कूल खोलने के सवाल पर दोनों आमने-सामने नजर आने लगे हैं। पटना DM के फरमान पर शिक्षा विभाग ने उन्हें कोर्ट में देख लेने की धमकी दे दी है। दरअसल कड़ाके के ठंड के बीच शिक्षा विभाग के आला अफसरों और पटना के जिलाधिकारी चन्द्रशेखर सिंह (Chandrasekhar Singh) के बीच अधिकारों को लेकर लड़ाई चरम पर नजर आने लगी है। सूबे में ठंड को देखते हुए डीएम चंद्रशेखर सिंह ने एक कड़ा पत्र माध्यमिक शिक्षा निदेशक को लिखा। उस पत्र में जिलाधिकारी ने अपने कार्यक्षेत्र से उन्हें अवगत कराया। डीएम ने ये भी कहा कि क्षेत्राधिकार से बाहर होने के कारण शिक्षा विभाग को अधिकार नहीं है कि वो धारा-144 लगाए। धारा-144 लगाने का अधिकार डीएम के पास ही है। उन्होंने शिक्षा विभाग को ये बात जान लेने की नसीहत दी।साथ ही डीएम ने ये भी कहा कि सीआरपीसी का अध्ययन करें। आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए दंडाधिकारी को जो शक्तियां मिली हैं। उसी के तहत हमने ये आदेश दिया है। उससे पूर्व केके पाठक की ओर से स्कूल को खोलने की बात कही गई थी। केके पाठक का पत्र अभी सभी जगह पहुंच ही रहा था कि पटना के जिलाधिकारी ने 23 जनवरी तक स्कूलों को बंद कर दिया। उसके बाद शिक्षा विभाग और जिलाधिकारी में सवाल-जवाब का दौर शुरू हो गया। जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह ने एक और पत्र जारी किया। उसके जवाब में निदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से एक कड़ा पत्र जारी किया है।आपको बता दें कि शिक्षा विभाग की ओर से जारी नए पत्र में ये भी पूछा गया है कि बच्चों को सिर्फ स्कूल जानें से क्यों रोका, घर से बाहर निकलने पर रोक क्यों नहीं लगाई गई। इसके लिए आदेश जारी क्यों नहीं हुआ। शिक्षा विभाग ने डीएम के आदेश पर कानूनी राय लेने की बात कही है। निदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव की ओर से पटना डीएम को लंबा-चौड़ा पत्र लिखा गया है। ये पत्र जिलाधिकारी के उस पत्र का जवाब है, जो पटना डीएम की ओर से शिक्षा विभाग को भेजा गया था। जिसमें उन्होंने स्कूलों को बंद करने का अधिकार खुद के क्षेत्र में आना बताया था। पटना डीएम ने ये भी कहा है कि पटना में तापमान को देखते हुए स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया था। इसमें शिक्षा विभाग से परमिशन लेने की कोई जरूरत नहीं है। उसके बाद निदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जिलाधिकारी को कड़ा जवाबी पत्र लिखा गया है। कहा जा रहा है कि ये पत्र केके पाठक के निर्देश पर ही लिखा गया है। आइए सबसे पहले देख लेते हैं, शिक्षा विभाग के पत्र में क्या लिखा गया है।निदेशक माध्यमिक शिक्षा कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव की ओर से जारी पत्र को जिलाधिकारी पटना को संबोधित करते हुए लिखा गया है। पत्र के विषय के रूप में दिया गया है कि- शीतलहर इत्यादि कारणों से विद्यालयों को बंद करने के संबंध में। पत्र में आगे लिखा गया है। आपके पत्र के जवाब में कहना है कि धारा-144 CrPC के तहत जिला प्रशासन, पटना द्वारा कई आदेश निकालते हुए विद्यालय बन्द किया गया था। पहले के आदेशों में कोचिंग इंस्टीट्यूट का उल्लेख नहीं था, लेकिन अंतिम आदेश (आपका ज्ञापांक-997, दिनांक-21.01.24) में यह उल्लेख है कि कोचिंग इंस्टीट्यूट भी बंद रहेंगे। पत्र में आगे है कि- उल्लेखनीय है कि अपर मुख्य सचिव के पत्रांक-12/गो०, दिनांक-20.01.24 द्वारा सभी प्रमंडलीय आयुक्त एवं सभी जिलाधिकारियों को यह कहा गया था कि धारा-144 CrPC के तहत विद्यालय बन्द करने की परम्परा गलत है और इस पर रोक लगनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया था कि जहां तक सरकारी विद्यालय बंद करने की बात है, तो इसमें कोई हस्तक्षेप करने से पहले विभाग से पूर्व अनुमति ले ली जाए। किन्तु आपने शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेशों का उल्लंघन करते हुए जानबूझकर अपना उपरोक्त ज्ञापांक-997, दिनांक-21.01.24 निर्गत किया।पत्र में आगे कहा गया है कि- आपने अपने आदेश में पटना जिले में शीतलहर के कारण बच्चों के स्वास्थ्य एवं जीवन के खतरे का उल्लेख किया है। इस प्रकार का निष्कर्ष पर पहुंचने का आपका निर्णय किन परिस्थितियों पर आधारित है। इसका उल्लेख न तो निर्गत आदेश में है और न ही इसकी जानकारी विभाग को दी गई है। शिक्षा विभाग का यह मानना है कि यदि धारा-144 लगानी चाहिए तो सामाजिक जीवन के सभी अवयवों पर समान रूप यह लागू होना चाहिए। आपके उक्त आदेश के आलोक में यदि विभाग माननीय उच्च न्यायालय में इस आदेश को चुनौती दे तो निम्नांकित बिन्दुओं पर आपको स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है। उसके आगे बिंदुवार तरीके से पत्र में बच्चों और स्कूल से जुड़ी बातों को लिखा गया है। (क)शीतलहर में केवल बच्चों का स्वास्थ्य और जीवन ही खतरे में पड़ता है और वृद्धों एवं बीमार लोगों का जीवन खतरे में नहीं पड़ता है ऐसा किस आधार पर - आपके द्वारा माना गया है। (ख)विद्यालय के अलावे व्यापारिक प्रतिष्ठानों, दुकानों, सिनेमा गृहों, मॉल, पार्क इत्यादि को बंद करना तो दूर, उनके समय अवधि में भी कोई बदलाव आपके द्वारा नहीं किया गया है।
ASHISH KUMAR·