Patna : पटना हाईकोर्ट ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा पीजी मीडिया स्टडीज के छात्र आकाश कुमार के खिलाफ जारी अनिश्चितकालीन निष्कासन आदेश को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने विश्वविद्यालय को आदेश दिया है कि छात्र को तुरंत बहाल किया जाए और उसे परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी जाए.

ये मामला विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षण कर्मचारी की पदोन्नति में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है. छात्र आकाश कुमार ने सोशल मीडिया पर इस प्रशासनिक अनियमितता को उजागर किया था, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें पहले निलंबित किया. फिर अनिश्चित काल के लिए परिसर से निष्कासित कर दिया.

इस कार्रवाई के दौरान छात्र को न तो जांच रिपोर्ट दी गई और न ही निष्कासन को लेकर कोई स्पष्ट कारण बताओ नोटिस दिया गया. विश्वविद्यालय की इस एकतरफा कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए जस्टिस हरीश कुमार ने कहा कि किसी छात्र पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाना उसके भविष्य को बर्बाद करने जैसा है.

हाईकोर्ट ने इस सजा को छात्र के अकादमिक कैरियर की हत्या करार देते हुए कहा कि यह किसी भी स्थिति में कानूनी रूप से मान्य नहीं है. कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अनिश्चित काल के लिए निष्कासन जैसी अत्यधिक कठोर सजा देने से पहले—जो प्रथम दृष्टया अधिनियम और अध्यादेश के तहत अधिकृत भी नहीं लगती—याचिकाकर्ता को जांच रिपोर्ट के साथ कारण बताओ नोटिस तक नहीं दिया गया.

यह कार्रवाई निष्पक्षता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती और प्राकृतिक न्याय का स्पष्ट उल्लंघन है.हाईकोर्ट ने ओएसडी (प्रशासन) द्वारा जारी14अगस्त, 2024के निष्कासन आदेश को निरस्त करते हुए विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि आकाश कुमार को तुरंत उनके कोर्स में वापस लिया जाए.

साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि छात्र से आगे अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-