1880से चली आ रही परंपरा के तहत डोली में विराजमान कर निकाली गई मां भवानी के कलश विसर्जन की रस्म,आस्था और अनुशासन का दिखा अनूठा संगम

रांची: राजधानी रांची स्थित जैप-01परिसर में मां भवानी की अनोखी पूजा का आज विधि-विधान के साथ समापन हो गया। वर्ष1880से चली आ रही परंपरा के तहत मां भवानी के कलश को डोली में विराजमान कर विसर्जन के लिए ले जाया गया। इस दौरान जैप के जवानों ने फायरिंग कर मां भवानी को सैनिक सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी।

प्रतिमा नहीं,कलश स्थापित कर होती है पूजा

जैप-01परिसर में मां भवानी की पूजा की परंपरा वर्षों पुरानी है। यहां मां की प्रतिमा स्थापित करने के बजाय कलश की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के दौरान पूरे श्रद्धाभाव के साथ मां भवानी की आराधना की गई। पूजा के समापन पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कलश विसर्जन की रस्म निभाई गई।

डोली में कलश लेकर निकले जवान,फायरिंग कर दी सलामी

मां भवानी के कलश विसर्जन के दौरान जवानों ने कलश को डोली में विराजमान किया और उसे लेकर आगे बढ़े। इस अवसर पर जैप के जवानों ने पारंपरिक तरीके से फायरिंग कर मां भवानी को सलामी दी और सैनिक सम्मान के साथ विदाई दी।

पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ पुलिस बल का अनुशासन और परंपरा के प्रति सम्मान देखने को मिला। मां भवानी की विदाई का यह अनूठा दृश्य श्रद्धा और भावनाओं से जुड़ा रहा।

146साल पुरानी परंपरा का निर्वहन

जैप-01में मां भवानी की पूजा और कलश विसर्जन की यह परंपरा संस्थान की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्ष1880से चली आ रही इस परंपरा में धार्मिक आस्था,अनुशासन और सैनिक सम्मान का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

इस वर्ष भी जवानों ने परंपरा का निर्वहन करते हुए मां भवानी को सम्मानपूर्वक विदाई दी। यह आयोजन जैप-01 की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाता है।

रांची से नैयर की रिपोर्ट