पटना: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से जुड़ी उर्दू अनुवादक भर्ती के मामले में पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) की वर्ष2019 की भर्ती से जुड़े विवाद में अदालत ने एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों की श्रेणी की दोबारा जांच कर चयन प्रक्रिया में बदलाव करने का निर्देश भी निरस्त हो गया है।
यह मामला विज्ञापन संख्या01/2019 के तहत1,294 उर्दू अनुवादक पदों पर भर्ती से संबंधित है। विवाद इस बात को लेकर था कि विज्ञापन में अति पिछड़ा वर्ग के लिए अंग्रेजी मेंMBC शब्द का इस्तेमाल किया गया था, जबकि कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी श्रेणीBC यानी पिछड़ा वर्ग भर दी थी। बाद में उन्हेंEBC श्रेणी का लाभ नहीं मिलने पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
क्या है पूरा मामला?
बिहार कर्मचारी चयन आयोग ने वर्ष2019 में उर्दू अनुवादक के कुल1,294 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इनमें233 पद अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित थे, जिनमें90 पद इसी वर्ग की महिला अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित थे।
कुछ अभ्यर्थियों का कहना था कि विज्ञापन मेंEBC के स्थान परMBC शब्द का इस्तेमाल किए जाने से वे भ्रमित हो गए। इसी वजह से उन्होंने आवेदन फॉर्म में अपनी श्रेणीBC भर दी। काउंसलिंग के दौरान उन्हेंEBC श्रेणी का लाभ नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
एकल पीठ ने आयोग को दिया था जांच का निर्देश
7 जनवरी2026 को एकल पीठ ने अभ्यर्थियों के पक्ष में आदेश देते हुएBSSC को निर्देश दिया था कि वह जांच करे कि संबंधित अभ्यर्थी वास्तव मेंEBC श्रेणी से आते हैं या नहीं और उन्होंने निर्धारित कटऑफ अंक हासिल किए हैं या नहीं। दोनों शर्तें पूरी होने पर योग्य अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था।
आयोग ने इस आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की।
आयोग ने क्या दलील दी?
आयोग की ओर से दलील दी गई कि विज्ञापन के हिंदी संस्करण में अति पिछड़ा वर्ग का स्पष्ट उल्लेख था। इसलिए अभ्यर्थियों के लिए अपनी श्रेणी समझने में किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं थी।
आयोग के अनुसार, कुल70,824 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से31,344 अभ्यर्थियों नेEBC श्रेणी के तहत आवेदन किया। आयोग ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद श्रेणी बदलने की अनुमति देने से भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
खंडपीठ ने क्यों पलटा एकल पीठ का आदेश?
मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने14 अक्टूबर2026 को दिए फैसले में एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया।
अदालत ने विज्ञापन की शर्तों, हिंदी और अंग्रेजी में इस्तेमाल किए गए शब्दों तथा भर्ती प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध जानकारी पर विचार किया। खंडपीठ ने माना कि विज्ञापन में अति पिछड़ा वर्ग के लिए इस्तेमाल किए गएMBC औरEBC शब्द एक ही आरक्षित वर्ग को संदर्भित करते हैं। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों नेEBC श्रेणी के तहत आवेदन किया था।
खंडपीठ के अनुसार, अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन में अपनी श्रेणी का गलत चयन करने के बाद भर्ती प्रक्रिया पूरी हो जाने पर श्रेणी बदलने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने एकल पीठ के आदेश को रद्द करते हुए संबंधित अपील स्वीकार कर ली।
अंतिम मेरिट लिस्ट भी हो चुकी थी जारी
इस भर्ती की अंतिम मेरिट लिस्ट23 नवंबर2024 को जारी हुई थी। इसके बाद आयोग ने चयनित अभ्यर्थियों की अनुशंसा संबंधित विभाग को भेजी थी। ऐसे में खंडपीठ ने भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद श्रेणी में बदलाव की मांग को स्वीकार नहीं किया।
अभ्यर्थियों के लिए क्या है फैसले का मतलब?
इस फैसले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों के मामले पर पड़ेगा जिन्होंने आवेदन के समयBC श्रेणी भरी थी, लेकिन बाद मेंEBC श्रेणी का लाभ मांगते हुए अदालत का रुख किया था। खंडपीठ ने एकल पीठ के उस निर्देश को रद्द कर दिया, जिसके तहत आयोग को संबंधित अभ्यर्थियों की श्रेणी और कटऑफ अंकों की दोबारा जांच करनी थी।
यह फैसला भर्ती विज्ञापन की शर्तों का पालन करने और आवेदन के समय सही श्रेणी चुनने के महत्व को रेखांकित करता है।
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट

