पटनाः पटना पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बबलू कुमार के रूप में हुई है, जो फिजिक्स से स्नातक है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ देशभर में साइबर ठगी से जुड़ी 40 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। शुरुआती जांच में उसके बैंक खातों से करीब 50 से 60 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। पुलिस को आशंका है कि जांच का दायरा बढ़ने पर ठगी की कुल रकम और अधिक हो सकती है।
रामकृष्णानगर में छापेमारी कर आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने पटना के रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र स्थित आदर्श कॉलोनी में छापेमारी कर बबलू कुमार को गिरफ्तार किया। आरोपी मूल रूप से शेखपुरा जिले के सलैया गांव का रहने वाला है और पटना में किराए के मकान में रहकर कथित तौर पर साइबर ठगी के नेटवर्क के लिए काम कर रहा था।
पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से 15 एटीएम कार्ड, 7 बैंक पासबुक और 2 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। साइबर थाने की प्रभारी संगीता के अनुसार, एनसीआरबी पोर्टल पर आरोपी के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों से 40 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।
ऑनलाइन ट्रेडिंग में कर्ज के बाद ठगी के नेटवर्क से जुड़ने का आरोप
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि बबलू पहले गांव में ऑनलाइन ट्रेडिंग करता था। इस दौरान उसे कथित तौर पर 5 से 6 लाख रुपये का कर्ज हो गया। कर्ज चुकाने के लिए वह नौकरी की तलाश में राजस्थान गया, जहां पुलिस के मुताबिक, उसकी मुलाकात साइबर ठगी से जुड़े लोगों से हुई।
आरोप है कि इसके बाद वह इस नेटवर्क में शामिल हो गया। गिरोह ने उसे उत्तर प्रदेश के बस्ती में बैंक खाते खुलवाने के लिए भेजा था। पुलिस के अनुसार, 20 हजार रुपये के लालच में उसने आधार कार्ड में पता बदलवाकर दो बैंकों में खाते खुलवाए। बाद में खातों में बड़ी रकम आने के बाद बैंक ने उन्हें ब्लॉक कर दिया। इसके बाद आरोपी पटना आ गया और रामकृष्णानगर इलाके में रहकर कथित तौर पर गिरोह के लिए काम करने लगा।
फर्जी बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर करने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सक्रिय कथित सरगनाओं ने बबलू का संपर्क रोहतास जिले की एक महिला से कराया था। पुलिस को संदेह है कि महिला फर्जी या किराए के बैंक खाते उपलब्ध कराती थी। इन खातों के एटीएम कार्ड और चेकबुक कथित तौर पर बबलू के पास रहते थे।
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद बबलू पटना के अलग-अलग एटीएम से नकदी निकालता था। आरोप है कि इस काम के बदले महिला को प्रति खाते 10 हजार रुपये और बबलू को निकाली गई रकम का 5 से 8 प्रतिशत कमीशन मिलता था। निकाली गई रकम का शेष हिस्सा कैश डिपॉजिट मशीन के जरिए राजस्थान और उत्तर प्रदेश में मौजूद कथित आरोपियों के खातों में भेजा जाता था।
50 से 60 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जांच
पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपी के बैंक खातों से करीब 50 से 60 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली है। पुलिस को आशंका है कि अन्य बैंक खातों और संभावित पीड़ितों की जानकारी सामने आने पर साइबर ठगी की कुल रकम बढ़ सकती है।
फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है। साथ ही संदिग्ध बैंक खातों, एटीएम कार्डों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।
साइबर एसडीपीओ संगीता का बयान अहम
इस मामले में साइबर एसडीपीओ संगीता का बयान जांच की दिशा और गिरोह के काम करने के तरीके को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। पुलिस की जांच पूरी होने और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही इस अंतरराज्यीय नेटवर्क की पूरी संरचना तथा कथित ठगी की कुल रकम का खुलासा हो सकेगा।
पटना से विवेक कुमार की रिपोर्ट
BIHAR CRIME
अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा, फिजिक्स ग्रेजुएट आरोपी गिरफ्तार; 40 से अधिक शिकायतें दर्ज

