एक ऐसा गांव जहां सड़क, पानी समेत सरकारी सुविधा का घोर अभाव, ग्रामीणों ने पहाड़ काटकर सड़क बनाने की शुरु की प्रक्रिया
जमशेदपुर : खबर है जमशेदपुर की जहां पूर्वी शिहभूम जिला के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गुड़ाबांधा के तांतीपाड़ा गांव के लोगों ने दूसरे दशरथ मांझी का इतिहास लिखने जा रहा है. इस गांव के लोगों का जीवन बद से बदतर है. लेकिन अब गांव के लोगों ने ठान ली है कि सरकार विकास करें या ना करें हम अपने कंधों पर अपने गांव के विकास की कहानी लिखेंगे. जी हां हम बात कर रहे हैं उस नक्सल प्रभावित गांव का जहां आज तक विकास की किरण नहीं पहुंची. आज भी इस गांव के लोग सड़क, पानी, बिजली के साथ सरकारी सुविधा से कोसों दूर है. लेकिन गांव के लोगों ने पहाड़ काटकर सड़क बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. बिहार के गया जिला के गलहौर गांव के रहने वाले दशरथ मांझी ने अकेले पहाड़ी को खोदकर सड़क बना ली. लेकिन पूरा गुड़ाबांधा के तंतिपडा गांव पूरा का पूरा दशरथ मांझी बन गया है. दरअसल प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाकर इस गांव के लोग थक चुके हैं. अब तो ग्रामीणों ने पहाड़ खोदकर रास्ता बनाने का काम शुरू कर दिया. हालांकि रास्ता अभी कच्चा है लेकिन ग्रामीणों की सुविधा के लिए बेहतर है. यहां की आबादी ज्यादा नहीं है लेकिन यहां के ग्रामीण एक नजीर पेश की है. गुड़ाबांधा का यह गांव चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा है और इस गांव में अब तक सुविधा नहीं पहुंची. जनप्रतिनिधि सिर्फ वोट के लिए आते हैं. 2018 से पहले घोराबांधा प्रखंड का यह गांव अतिनक्सल प्रभावित गांव हुआ करता था. अब नक्सलियों की धमक कम हुई लेकिन विकास इस गांव तक नहीं पहुची.आपको बता दें कि इसमें 30 से ज्यादा गांव के लोग प्रतिदिन पहाड़ को खोदने में लगे हैं. और अब तक ढ़ाई किलोमीटर सड़क बन चुकी है. हालांकि 6 सप्ताह बीत चुका है. वैसे ग्रामीण अब कार्यस्थल पर चावल मंगा कर खाना पकाते और दिन रात पहाड़ की खुदाई में लग जाते हैं. वैसे 2017 में एक बार प्रशासन यहां पहुंची लेकिन उसके बाद अब तक कोई नहीं आया. गांव में शुद्ध पेयजल नहीं है. यहां तक कि मेडिकल और शिक्षा की व्यवस्था भी नहीं है. 13 किलोमीटर दूर लोगों को बाहर दूसरे गांव में इलाज के लिए जाना पड़ता है. अब तो गांव के 30 लोग दशरथ मांझी बन गए और उन्हीं की प्रेरणा लेकर पहाड़ की खुदाई शुरू कर दी. वैसे इस पर स्थानीय प्रशासन और सरकार को ध्यान देने की जरूरत है. यह सवाल सिर्फ सरकार पर ही नहीं जनप्रतिनिधि और प्रशासन पर भी आखिर एक पहाड़ 30 दशरथ मांझी को जन्म दे दिया.
