बोधगया में विदेशी श्रद्धालुओं की आस्था का अद्भुत संगम, सनातन और बौद्ध परंपरा से पितरों की आत्मा की शांति हेतु विशेष पूजा
बोधगया : बिहार के बोधगया में सनातन और बौद्ध धर्म की आस्था का एक अनोखा संगम देखने को मिला. बोधगया मठ में ताइवान और थाईलैंड से पहुंचे विदेशी तीर्थयात्रियों ने अपने पितरों की आत्मा की शांति और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर विशेष पूजा-अर्चना की. इस दौरान करीब 3000 दीप जलाकर विशेष धार्मिक अनुष्ठान किया गया. पूजा में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार भी शामिल हुए और विदेशी श्रद्धालुओं के साथ इस विशेष आयोजन का हिस्सा बने.इस धार्मिक आयोजन में ताइवान के 14 और थाईलैंड के 2 श्रद्धालु शामिल हुए. वहीं पूजा-अर्चना में 108 बौद्ध भिक्षुओं, थाईलैंड के मोंक, ऋषिकेश से पहुंचे 33 ब्राह्मणों और बोधगया मठ के संत-साधुओं ने विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया.2022 में शुरू हुई आस्था की कहानीबिहार पर्यटन विभाग के गाइड बाल गंगाधर के मुताबिक, वर्ष 2022 में ताइवान से दो पर्यटक बोधगया आए थे. इसी दौरान उनकी मुलाकात उनसे हुई. दोनों बौद्ध धर्म को मानने वाले थे. बाल गंगाधर उन्हें बोधगया मठ लेकर पहुंचे, जहां उन्होंने पहली बार सनातन परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना देखी और इसमें शामिल हुए.उनका कहना है कि विदेशी श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की पूजा-पद्धति काफी पसंद आई. इसके बाद वे अपने देश वापस लौटे और उन्होंने बताया कि उनकी व्यक्तिगत और कारोबारी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया. इसके बाद से वे साल में दो बार बोधगया आकर बौद्ध और सनातन दोनों परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं.ताइवान तक पहुंची बोधगया की सनातन आस्थागाईड के अनुसार, शुरुआत में केवल दो विदेशी श्रद्धालु आए थे, लेकिन अब उनकी संख्या बढ़कर 16 तीर्थयात्रियों तक पहुंच गई है. ये श्रद्धालु ताइवान में भी सनातन धर्म और इसकी पूजा-पद्धति के बारे में लोगों को बता रहे हैं.बोधगया मठ में हुआ यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन और बौद्ध परंपराओं के बीच आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव की एक अनोखी तस्वीर भी पेश करता नजर आया. एक ओर बौद्ध भिक्षु और थाईलैंड के मोंक मंत्रोच्चार करते दिखे, तो दूसरी ओर ऋषिकेश के ब्राह्मण और बोधगया मठ के संत-साधु सनातन परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना में जुटे रहे.3000 दीपों की रोशनी में विदेशी श्रद्धालुओं की आस्था, बोधगया की धरती पर सनातन और बौद्ध परंपरा का यह संगम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा.“दो विदेशी श्रद्धालुओं से शुरू हुई आस्था की कहानी, अब 16 विदेशी पहुंचे बोधगया मठ—3000 दीपों के बीच सनातन और बौद्ध परंपरा का अद्भुत संगम.”बोधगया से मनोज सिंह की रिपोर्ट
