Patna : पटना हाईकोर्ट ने चर्चित आईएएस संजीव हंस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिशु श्री के अर्जी पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से16बिंदुओं पर जवाब तलब किया है. जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की एकलपीठ ने रिशु श्री की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद सवाल जवाब किया है.
कोर्ट को बताया गया कि आवेदक रिशु श्री कंपनी के निदेशक हैं और वे फिलहाल एसयूवी केस में गत17जून से हिरासत में हैं. उनका कहना था कि मामले की जड़ रूपसपुर थाना केस18/2023है, जो संजीव हंस और गुलाब यादव पर रेप के आरोप में दर्ज हुआ था.
इसमें रिशु श्री आरोपी नहीं थे. यही नहीं हाईकोर्ट ने इस प्राथमिकी को6अगस्त,2024को निरस्त कर दिया और इसी प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने केस दर्ज कर16जुलाई,2024को आवेदक के कार्यालय और घर पर छापेमारी कर मोबाइल और सेल डीड जब्त किया.
उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी ने पीएमएलए की धारा50के तहत दर्ज बयानों पर जबरन हस्ताक्षर करा लिया, जो अनुच्छेद20(3) का उल्लंघन है और इसी जांच के आधार पर ईडी ने धारा66के तहत जानकारी साझा कर एसयूवी केस05/2024और फिर एसयूवी केस05/2025दर्ज कराया.
इसमें टेंडर में हेरफेर कर265.73करोड़ के अपराध की बात कही गई और68.09करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली गई.
आवेदक की ओर से दी गई दलील सुनने के बाद कोर्ट ने ईडी से जनाना चाहा कि जब आवेदक रूपसपुर केस में आरोपी नहीं था तो फिर उसके यहां छापा क्यों मारा गया.
जब आवेदक के खिलाफ साक्ष्य था, तो विजिलेंस केस में उसे आरोपी क्यों नहीं बनाया. ईडी क्या बिना प्रस्थमिकी के किसी को समन कर सकती है. क्या बिना ईसीआईआर दिखाए गिरफ्तारी के आधार की जांच रिमांड कोर्ट कर सकता है.
कोर्ट ने ईडी के संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया.
अगली सुनवाई9अक्टूबर को होगी.
कोर्ट ने ईडी से निम्न16 प्रश्न पूछे.
(i) किस साक्ष्य के आधार पर16जुलाई2024को कंपनी और घर पर छापा मारा गया?
(ii) 18जुलाई, 18सितंबर, 20सितंबर, 21सितंबर और1अकटूबर2024को दर्ज बयानों में बिक्री विलेख और मोबाइल जब्ती पर उसने क्या खुलासा किया?
(iii-iv) जब20अगस्त2024को ईडी ने धारा66पीएमएलए के तहत विजिलेंस को सूचना दी, जिस पर विजिलेंस केस05/2024दर्ज हुआ, तो आवेदक को नामजद क्यों नहीं बनाया गया? और20सितंबर2024को दर्ज संसोधन में भी नाम क्यों नहीं दिया गया?
(v-vi) क्या20सितंबर2024तक ईडी के पास कोई साक्ष्य नहीं थी? यदि थी तो विजिलेंस द्वारा नाम न जोड़ने पर आपत्ति क्यों नहीं की?
(vii-ix) 21सितंबर24और1अकटुबर24के बयानों में क्या खुलासा हुआ जिसके आधार पर ईओयू को सूचना दी गई और एसयूवी केस05/2025दर्ज हुआ? क्या अज्ञात सरकारी अधिकारियों की जांच हुई या सिर्फ संजीव हंस ही शामिल थे? ईडी ने अन्य अधिकारियों के नाम दिए थे क्या?
(x) क्या ईसीआईआर जांच में नाम आने पर ईडी समन कर सकती है या पुलिस जांच का इंतजार करेगी?
(xi) क्या ईसीआईआर कॉपी दिए बगैर धारा19के तहत गिरफ्तारी के आधार की जांच रिमांड कोर्ट कर सकती है?
(xii) ईसीआईआर के आधार पर प्राथमिकी बनती है?
(xiii) टेंडर हेरफेर अकेले संभव है या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत है?
(xiv) जब एसयूवी केस05/2024ईडी की सूचना पर ही बना तो अतिरिक्त जानकारी की जरूरत क्यों पड़ी?
(xv-xvi) ईसीए आईआर4और अतिरिक्त जानकारी में अवेफक के खिलाफ क्या सामग्री है जिसके आधार पर उसे सप्लीमेंट्री कंप्लेंट13/2025में आरोपी बनाया गया? ईसीआईआर-13में आरोपों में क्या अंतर है?
कोर्ट ने इन मुद्दों पर ईडी से स्थिति सपष्ट करने का निर्देश दिया.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
