पटना: पटना हाईकोर्ट ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से जुड़े करीब50साल पुराने भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने पटना जिला प्रशासन द्वारा उनकी जमीन की जमाबंदी रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही,जमाबंदी बहाल करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से लंबे समय से न्याय की मांग कर रहीं मीरा कुमार को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति खतीम रज़ा की एकल पीठ ने की। याचिका में राज्य सरकार और राजस्व अधिकारियों की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। अदालत ने जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया में कानूनी अधिकारों और निर्धारित प्रक्रिया के पालन के सवाल पर विचार किया।
1976में नाला निर्माण के लिए हुआ था जमीन का अधिग्रहण
मामला पटना के शास्त्री नगर और फुलवारी क्षेत्र से जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार,वर्ष1976में नाला निर्माण के लिए मीरा कुमार की माता इंद्राणी देवी की18कट्ठा10धुर जमीन का अधिग्रहण किया गया था।
आरोप है कि अधिग्रहण के बाद भी जमीन के बदले मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया। करीब पांच दशक बीत जाने के बाद भी मुआवजे की मांग लंबित रहने के कारण यह विवाद अदालत तक पहुंचा।
जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई को दी गई चुनौती
मुआवजे की मांग के बीच जिला प्रशासन ने संबंधित जमीन को गैरमजरुआ आम अथवा नदी की भूमि बताते हुए पुरानी जमाबंदी रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ मीरा कुमार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिका में दलील दी गई कि जमाबंदी रद्द करने का आदेश बिना उचित कानूनी आधार और आवश्यक प्रक्रिया का पालन किए पारित किया गया। याचिकाकर्ता का पक्ष सुने बिना इस तरह की कार्रवाई किए जाने पर भी सवाल उठाए गए।
धारा4(h)के तहत जिलाधिकारी के अधिकार पर सवाल
मामले में बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950की धारा4(h)के तहत जिलाधिकारी के अधिकारों का मुद्दा प्रमुख रहा। याचिका के अनुसार,संबंधित बंदोबस्ती वर्ष1941की थी और इस पर उक्त धारा लागू नहीं होती थी।
बताया गया कि जिलाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने वर्ष2016में ही बंदोबस्ती से संबंधित रिपोर्ट दी थी। इसके बावजूद बाद में जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई की गई।
हाईकोर्ट ने मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के पालन पर विचार करते हुए जिलाधिकारी के आदेश को निरस्त कर दिया।
12अप्रैल2023का आदेश रद्द,जमाबंदी बहाल करने का निर्देश
अदालत ने पटना के जिलाधिकारी द्वारा12अप्रैल2023को पारित जमाबंदी रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही,मीरा कुमार की जमाबंदी बहाल करने का निर्देश दिया।
इस फैसले से भूमि अभिलेखों को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।
मुआवजे की मांग पर भी अहम सवाल
इस मामले में भूमि अधिग्रहण के बाद लंबे समय तक मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। याचिकाकर्ता की ओर से भूमि अधिग्रहण,पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013के तहत मुआवजे की मांग की गई है।
हालांकि,मुआवजे की अंतिम राशि,उसके निर्धारण की प्रक्रिया और भुगतान से संबंधित आदेश की सटीक शर्तों की पुष्टि मूल न्यायिक फैसले से किया जाना जरूरी है।
प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण मामला
मीरा कुमार से जुड़ा यह मामला भूमि अधिग्रहण,राजस्व अभिलेखों में बदलाव और प्रभावित जमीन मालिकों के कानूनी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। अदालत के आदेश से यह स्पष्ट होता है कि राजस्व संबंधी कार्रवाई में अधिकारियों को अपने कानूनी अधिकारों के दायरे में रहकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट

