झारखंड के देवघर से सिंदूर और सुहाग के अटूट बंधन की एक बेहद खास तस्वीर सामने आई है। मौका था सिमरा स्थित ऐतिहासिक बंगाली समाज के दुर्गा मंदिर में 'डाला सिंदूर' की परंपरा का, जहां सुहागिन महिलाओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। माता रानी के विसर्जन से ठीक पहले निभाई जाने वाली इस खास परंपरा में शामिल होने के लिए अहले सुबह से ही महिलाओं का तांता लग गया। स्थिति यह थी कि अपनी बारी का इंतजार करने के लिए मंदिर परिसर से लेकर बाहर तक महिलाओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। इस ऐतिहासिक परंपरा की ख्याति सिर्फ देवघर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हिस्सा लेने के लिए पश्चिम बंगाल समेत दूर-दराज के कई इलाकों से सुहागिनें सिमरा पहुंचीं।
माँ के चरणों में समर्पित इस अनुष्ठान को लेकर महिलाओं में गजब का उत्साह और गहरी आस्था दिखाई दी। मान्यता है कि 'डाला सिंदूर' के इस अनुष्ठान के जरिए सुहागिनें माता रानी से अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और पूरे परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में माता को अर्पित सिंदूर को हर महिला अपने सुहाग की निशानी के रूप में बेहद पवित्र मानकर धारण करती है। परंपरा के अगले चरण में महिलाओं ने मंदिर में चढ़ाए गए विशेष प्रसाद को भी ग्रहण किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा है, और यही वजह है कि हर साल इस खास मौके पर सिमरा के इस दुर्गा मंदिर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।
