पटना : बिहार में पुलिस की डिजिटल कार्यप्रणाली को लेकर पुलिस मुख्यालय की समीक्षा रिपोर्ट में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई है. क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) पर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (एसडीपीओ), सर्किल इंस्पेक्टर, थानाध्यक्षों और अनुसंधान पदाधिकारियों की उदासीनता उजागर हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन प्रणाली के प्रभावी इस्तेमाल में कमी के कारण पुलिस के कामकाज और मामलों की डिजिटल निगरानी प्रभावित हो रही है.


समीक्षा में यह भी सामने आया है कि सर्किल इंस्पेक्टर और पर्यवेक्षी पदाधिकारियों के कार्यालयों में कई जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है. वर्ष2023से अब तक दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया पर इसका असर पड़ा है. थानाध्यक्षों की ओर से अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मियों के कार्यों की नियमित निगरानी नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं.


पुलिस मुख्यालय ने अनुसंधान पदाधिकारी से लेकर डीएसपी रैंक तक के लापरवाह अधिकारियों को चिह्नित कर नियमानुसार कार्रवाई करने की जरूरत बताई है. एसएसपी और एसपी कार्यालयों की अपराध शाखाओं के अधिकारियों के अनुसंधान में सीमित योगदान पर भी चिंता जताई गई है. क्षेत्रीय अधिकारियों को सीसीटीएनएस का काम तेज करने और मासिक प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय भेजने का निर्देश दिया गया है.


ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड करने में जमुई-गया आगे


सीसीटीएनएस की जनवरी से सितंबर2026तक की रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिकी, आरोप-पत्र और अंतिम रिपोर्ट अपलोड करने में जमुई, गया, शेखपुरा, बेगूसराय और पूर्णिया शीर्ष पांच जिलों में शामिल हैं. इसके विपरीत रेल मुजफ्फरपुर, रेल जमालपुर, किशनगंज, शिवहर और सारण का प्रदर्शन सबसे खराब रहा. पटना में भी कामकाज संतोषजनक नहीं पाया गया.


रिपोर्ट में स्टेशन डायरी, आरोप-पत्र और अंतिम रिपोर्ट अपलोड करने में हाल के महीनों में सुधार दर्ज किया गया है. निर्धारित60 से90 दिनों के भीतर मामलों के निष्पादन में भी वृद्धि हुई है. हालांकि, पुलिस मुख्यालय ने डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और निगरानी व्यवस्था में और सुधार की आवश्यकता जताई है.

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-