पटना: बिहार में आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच को तेज करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU), बिहार, पटना के विस्तार एवं क्षमता संवर्धन के लिए 143 नए पदों के सृजन की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस संबंध में सरकार की ओर से 4 नवंबर 2026 को आदेश जारी किया गया है।
सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य आर्थिक अपराध इकाई के वर्तमान ढांचे को मजबूत करना और क्षेत्रीय स्तर पर उसकी कार्यक्षमता बढ़ाना है। आदेश में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक अपराध से संबंधित मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। अपराध के तरीके बदल रहे हैं और वित्तीय अनुसंधान की जटिलता भी बढ़ रही है। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के कारण आर्थिक अपराधों की प्रभावी जांच की आवश्यकता बढ़ी है।
इसी को ध्यान में रखते हुए आर्थिक अपराध इकाई के क्षेत्रीय कार्यालयों के प्रशासनिक नियंत्रण, अनुश्रवण और कार्यान्वयन को बेहतर बनाने के लिए नए पदों का सृजन किया गया है।
स्वीकृत 143 पदों में पुलिस उप-महानिरीक्षक का एक, पुलिस अधीक्षक का एक, पुलिस उपाधीक्षक के 12, पुलिस निरीक्षक के 33, सहायक अवर निरीक्षक के 24 और आशु सहायक अवर निरीक्षक के 12 पद शामिल हैं। इसके अलावा हवलदार के 12, चालक सिपाही के 24 तथा सिपाही (कंप्यूटर ऑपरेटर) के 24 पद स्वीकृत किए गए हैं।
सरकार का मानना है कि इन पदों के सृजन से आर्थिक अपराध इकाई को पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे वित्तीय धोखाधड़ी, सरकारी धन के दुरुपयोग और अन्य आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की जांच में तेजी आएगी। साथ ही बिहार पुलिस की आर्थिक अपराधों से निपटने की क्षमता भी मजबूत होगी।
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट

