बिहार शिक्षक भर्ती में विवाहित महिलाओं के आरक्षण पर नया नियम, पिता के स्थायी पते से जुड़े प्रमाणपत्र जरूरी, पति के पते से नहीं मिलेगा लाभ
बिहार में सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहीं विवाहित महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम सामने आया है। आरक्षण का लाभ लेने के लिए महिला अभ्यर्थी के जाति, निवास और नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र उसके पिता के स्थायी पते के आधार पर होने चाहिए। केवल बिहार में शादी हो जाने या पति के बिहार का निवासी होने से महिला को बिहार के आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।नियम के अनुसार, विवाहित महिला की पात्रता निर्धारित करते समय उसके मूल निवास की स्थिति को भी देखा जाएगा। यानी शादी के बाद पति का बिहार में निवास महिला के लिए अपने आप बिहार का मूल निवास या आरक्षण का आधार नहीं बन जाएगा।यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 की प्रक्रिया चल रही है। इस भर्ती में शुरुआत में 32,388 पद घोषित किए गए थे। बाद में 932 अतिरिक्त पद जोड़े गए हैं। इसके बाद कुल रिक्तियों की संख्या बढ़कर 33,320 हो गई है।नए जोड़े गए 932 पदों में कक्षा 9 से 10 तक के शिक्षकों के 493 पद और कक्षा 11 से 12 तक के शिक्षकों के 439 पद शामिल हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शिक्षक बनने के लिए आवेदन और चयन प्रक्रिया में शामिल हैं।विवाहित महिला अभ्यर्थियों के लिए प्रमाणपत्रों की स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गई है। आरक्षण का दावा करने वाली उम्मीदवारों को आवेदन के साथ-साथ दस्तावेज सत्यापन के दौरान अपने जाति, निवास और नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्रों की वैधता और आधार की जांच कर लेनी चाहिए।हालांकि, उम्मीदवारों को अंतिम पात्रता के लिए संबंधित भर्ती विज्ञप्ति और सरकारी दिशा-निर्देशों में दिए गए प्रावधानों को जरूर देखना चाहिए। प्रमाणपत्रों में किसी तरह की विसंगति होने पर आरक्षण का दावा प्रभावित हो सकता है।
