
मंगलवार, 29 सितंबर 2026
Liveपटना : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसी माह यानि सितंबर में घोषणा की थी कि नये वकीलों को प्रति माह पांच हजार रुपये का स्टाइपेंड दिया जायेगा. महाधिवक्ता एसडी संजय ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि 1 जनवरी, 2024 के बाद बिहार स्टेट बार काउंसिल में पंजीकृत हुए सभी नये वकीलों को स्टाइपेंड योजना के शर्तो को पूरा करने पर लाभ दिया जायेगा.उन्होंने बताया कि आय के सम्बन्ध में कुछ प्राथमिकताएं रहेंगी. अक्टूबर प्रथम सप्ताह ये योजना प्रारम्भ हो जायेगी. सन 2020 के बाद विधि पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं हुई. उन्होंने कहा कि मैंने मुख्य कार्य 119 विधि पदाधिकारियों को नियुक्त किया. मैं चयन समिति का अध्यक्ष था.उन्होंने जानकारी दी कि शीघ्र ही वरीय लोक अभियोजक व लोक अभियोजक नियुक्त किये जायेंगे. इस सन्दर्भ में शीघ्र एक विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि शीघ्र ही विधि पदाधिकारियों की सहायता के लिए करीब पांच सौ सहायक भी नियुक्त किये जायेंगे.इन तथ्यों की जानकारी एडवोकेट जनरल एस डी संजय ने मीडियाकर्मियों को अपने कान्फ्रेंस रूम में दिया. उन्होंने बताया कि स्पीडी ट्रायल के विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की जायेगी. उन्होंने जानकारी दी कि रीतलाल यादव मामले में स्पीडी ट्रायल के लिए अधिवक्ता राम विनय सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है.उन्होंने स्पष्ट किया कि नई योजना है. शुरुआती दौर में छोटी मोटी समस्या सामने आ सकती है. लेकिन सरकार नये वकीलों को स्टाइपेंड योजना का लाभ देना सुनिश्चित कर चुकी है.सरकार कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं की है. 1 जनवरी, 2024 से नामांकित नए वकीलों को 3 साल तक पांच हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड के साथ साथ अधिवक्ता संघों को ई-लाइब्रेरी के लिए पांच लाख की सहायता देगी.इस आवेदन के साथ मैट्रिक परीक्षा का प्रमाण पत्र, वकील के रूप में पंजीकृत प्रमाण पत्र, अनुभव एवं सक्रिय प्रैक्टिस प्रमाण पत्र, माता/पिता आय प्रमाण पत्र, निवासी प्रमाण पत्र, पैन कार्ड,एआईबीई प्रमाण पत्र, आपराधिक मामले में संलिप्तता नहीं होने का शपथ पत्र, वकालत पेशा के अलावा किसी दूसरे व्यवसाय में नहीं होने का शपथ पत्र,रद्द चेक देना होगा.उन्होंने बताया कि आवेदन पर एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव का हस्ताक्षर होना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्टी कमेटी के कॉन्वेनर पटना में नहीं होने के कारण उनका हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं है. उनका कहना था कि बिहार के जूनियर वकीलों को शुरुआती आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना लागू की गई है.जाने माने अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने सरकार द्वारा स्पीडी ट्रायल व्यवस्था की सराहना की. आमलोगों को शीघ्र न्याय मिले,इसके लिए यह बहुत महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा. आज भी बड़ी तादाद में अंडरट्रायल कैदी राज्य की जेलों में हैं.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
Patna :पटना हाईकोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन और विभागीय नियमों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाते हुए बिहार सरकार के लघु जल संसाधन विभाग के एक बड़े दंडात्मक आदेश को निरस्त कर दिया है. कोर्ट ने कार्यपालक अभियंता पवन कुमार को रिवर्ट कर सहायक अभियंता बनाने के आदेश और उसके बाद दायर समीक्षा याचिका रद्द करने के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया. सिवान के नलकूप प्रमंडल में तैनात रहे कार्यपालक अभियंता पवन कुमार पर 13 नलकूपों के निर्माण में अनियमितता और कबाड़ सामग्री की नीलामी से जुड़े दो अलग-अलग आरोप लगाकर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी. इसके आधार पर विभाग ने मई 2018 में उन्हें डिमोट कर मूल पद (सहायक अभियंता) पर भेज दिया था.इस निर्णय के विरुद्ध उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जस्टिस कुमार मनीष की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए विभागीय जांच की गंभीर प्रक्रियात्मक खामियों को उजागर किया.विभागीय जांच में विभाग की ओर से एक भी गवाह पेश नहीं किया गया और न ही याचिकाकर्ता को किसी गवाह से जिरह का अवसर दिया गया. विजिलेंस की क्लीन चिट को अनदेखा किया गया. जांच अधिकारी ने विजिलेंस डिपार्टमेंट के'टेक्निकल एग्जामिनर सेल'की उस रिपोर्ट को पूरी तरह दरकिनार कर दिया,जिसने अपनी जांच में स्पष्ट किया था कि कोई वित्तीय अनियमितता या अधिक भुगतान नहीं हुआ है. दो अलग-अलग और असंबद्ध मामलों की जांच रिपोर्ट को बिना किसी वैधानिक आदेश के आपस में जोड़कर एक साथ संयुक्त सजा सुना दी गई,जो नियमों के खिलाफ है. कोर्ट ने किसी को बिना सुने सजा न देना के सार्वभौमिक सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे विभागीय कार्यवाही में निष्पक्षता और न्याय के मूल सिद्धांतों का पालन करें. कोर्ट ने वर्षों पुराने इस मामले में दोबारा विभागीय जांच कराने से भी इनकार कर दिया.हाईकोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय बाद प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करना याचिकाकर्ता के साथ अन्याय होगा. कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए निलंबन/अंतरिम अवधि के सेवा लाभों का निर्धारण कानून के अनुसार करन का निर्देश दिया है.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
पटना : बिहार पुलिस मुख्यालय ने जुलाई और अगस्त 2026 में अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का आंकड़ा जारी किया है. पुलिस के अनुसार दोनों महीनों में कुल 73,720 अपराधियों और अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गई. जुलाई में 36,788 और अगस्त में 36,932 गिरफ्तारियां हुईं.आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में 1,231 और अगस्त में 1,247 फरार एवं वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया. वहीं,जुलाई में 2 और अगस्त में 5Extremistकी गिरफ्तारी हुई.गंभीर कांडों में भी पुलिस ने कार्रवाई की. जुलाई में हत्या के 486 और अगस्त में 412 मामलों में गिरफ्तारी हुई. डकैती के मामलों में जुलाई में 96 और अगस्त में 47 गिरफ्तारियां दर्ज की गईं. लूट के मामलों में जुलाई में 171 और अगस्त में 158 लोगों की गिरफ्तारी हुई.अवैध हथियारों और मादक पदार्थों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया. जुलाई में 409 और अगस्त में 349 अवैध हथियार बरामद किए गए. दोनों महीनों में बड़ी संख्या में गोली-कारतूस बरामद हुए. अगस्त में 44,650 गोली-कारतूस बरामद किए गए.मादक पदार्थों की बरामदगी में अगस्त में 594.642 किलोग्राम गांजा और 3,725.559 ग्राम अफीम शामिल है. इसके अलावा जुलाई-अगस्त में भारी मात्रा में अवैध शराब भी जब्त की गई.बिहार पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
Patna : पटना के एडीएम आपूर्ति रवींद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी, दानापुर की अवर निबंधक कुमारी स्वाती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई जारी है. निगरानी की टीम ने सोमवार को पटना और बेगूसराय स्थित दोनों के ठिकानों पर छापेमारी की थी. अब दंपती के आधा दर्जन से अधिक बैंक खातों को सील करने की कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है.निगरानी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान बरामद संपत्तियों, निवेश और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है. संबंधित निबंधन कार्यालयों से भी दंपती के नाम पर दर्ज अन्य संपत्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है.छापेमारी में पटना के रूपसपुर स्थित आवास से70लाख रुपये से अधिक और बेगूसराय स्थित पैतृक आवास से करीब नौ लाख रुपये नकद मिलने की बात कही गई है. इसके अलावा बड़ी मात्रा में आभूषण, महंगी घड़ियां और निवेश से जुड़े कागजात भी बरामद किए गए हैं.निगरानी के मुताबिक, फुलवारीशरीफ में पति-पत्नी के नाम खरीदी गई करीब7.8डिसमिल जमीन, पिता के नाम करीब3.9डिसमिल जमीन, बेगूसराय के बलिया में करीब20डिसमिल और बेगूसराय शहर में करीब3.9डिसमिल जमीन के दस्तावेज मिले हैं. इन अचल संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब तीन करोड़ रुपये बताई गई है.निगरानी ब्यूरो अब बरामद दस्तावेजों और संपत्तियों का सत्यापन कर रहा है. मामले में आगे की कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद की जाएगी.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
क्या आप भी जमशेदपुर की सड़कों पर रफ्तार के शौकीन हैं और अपनी गाड़ी की स्पीड बढ़ाना पसंद करते हैं? तो जरा संभल जाइए! शहर में बेलगाम और तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम कसने के लिए ट्रैफिक पुलिस अब पूरी तरह सख्त हो गई है।इसी कड़ी में मंगलवार को जमशेदपुर के मरीन ड्राइव पर एक विशेष ओवरस्पीडिंग चेकिंग अभियान चलाया गया। ट्रैफिक डीएसपी श्री नीरज के नेतृत्व में आधुनिक स्पीडगन की मदद से गाड़ियों की रफ्तार मापी गई। नियम तोड़ने वाले चालकों को मौके पर पकड़ने के बजाय, उनके वाहन नंबर के आधार पर सीधे ऑनलाइन ई-चालान भेजे जा रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस अभियान के पहले ही दिन मरीन ड्राइव पर 100 से ज्यादा ओवरस्पीडिंग के चालान काटे गए!आखिर नियम क्या हैं? ट्रैफिक विभाग के मुताबिक, मरीन ड्राइव पर वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 55 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जबकि एनएच-33 पर यह सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस तय सीमा से एक किलोमीटर प्रति घंटा भी ऊपर जाने पर आपका चालान कट सकता है!बिष्टुपुर ट्रैफिक थाना प्रभारी राकेश कुमार ने बताया कि शहर में ऐसे कई और हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां जल्द ही ये स्पीडगन लगाई जाएंगी। साथ ही, चालकों की जानकारी के लिए सड़कों पर स्पीड लिमिट से जुड़े बोर्ड भी लगाए जाएंगे।ट्रैफिक डीएसपी ने साफ किया है कि अक्सर मरीन ड्राइव युवाओं के लिए स्टंट या गाड़ी की रफ्तार परखने का जरिया बन जाता है, जिससे जानलेवा हादसे होते हैं। इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। यह अभियान सिर्फ मरीन ड्राइव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में शहर के तमाम प्रमुख मार्गों और हाइवे पर भी लगातार जारी रहेगा।
Patna : पटना जिले में जमीन के दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन से जुड़े करीब 17 हजार आवेदन अब भी लंबित हैं,जबकि ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने के बाद अब तक करीब 11 लाख आवेदन जमा किए जा चुके हैं. इनमें लगभग 4 लाख आवेदन रिजेक्ट हो चुके हैं. आवेदन अस्वीकृत होने के बाद रैयतों को दोबारा ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है,जिससे जमीन के रिकॉर्ड अपडेट कराने में समय लग रहा है.लंबित दाखिल-खारिज मामलों में दानापुर सबसे आगे है. यहां करीब 5 हजार मामले लंबित हैं. पटना सदर में 4,500,मसौढ़ी में 2,400,पटना सिटी में 2,100,बाढ़ में 1,800 और पालीगंज में करीब 800 मामले निबटारे की प्रतीक्षा में हैं.जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी दूसरी सेवाओं में भी बड़ी संख्या में आवेदन अटके हैं. जमाबंदी में गड़बड़ी सुधार के करीब 16 हजार आवेदन लंबित हैं. इनमें दानापुर के 4,800,पटना सदर के 2,900,मसौढ़ी के 2,600,बाढ़ के 2,500,पटना सिटी के 2,100 और पालीगंज के 1,800 आवेदन शामिल हैं.वहीं,छुटी हुई जमाबंदी को रिकॉर्ड में जोड़ने के करीब 12 हजार मामले भी लंबित बताए गए हैं. इनमें दानापुर के 2,800,पटना सदर के 2,400,मसौढ़ी के 1,900,बाढ़ के 1,800,पटना सिटी के 1,600 और पालीगंज के 600 मामले शामिल हैं.कुछ मामलों में आवेदन प्रक्रिया के दौरान रिजेक्ट होने पर दोबारा आवेदन के लिए डीसीएलआर कोर्ट से अनुमति लेने की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में रैयतों को अंचल कार्यालय और संबंधित न्यायालय की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना:बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है. बिहार लोक सेवा आयोग नेTRE-4शिक्षक भर्ती में932अतिरिक्त पद जोड़ दिए हैं. इसके साथ ही भर्ती का कुल आंकड़ा बढ़कर33,320पद हो गया है. इससे पहले आयोग ने32,388पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था.आयोग के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से संशोधित पूरक अधियाचना प्राप्त होने के बाद अतिरिक्त रिक्तियां जोड़ी गई है. इनमें माध्यमिक विद्यालयों के लिए493और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए439पद शामिल है.कक्षा9से10के लिए बांग्ला, ललित कला, नृत्य, मैथिली, विशेष विद्यालय अध्यापक, अरबी, फारसी और संगीत जैसे विषयों में रिक्तियां शामिल की गई है. वहीं कक्षा11से12के लिए बांग्ला, भोजपुरी, मगही, मैथिली, पाली, प्राकृत, अरबी और फारसी विषयों में पद बढ़ाए गए हैं.आयोग ने बताया है कि इन रिक्तियों का जिला, विषय और कोटिवार विवरण उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है. अभ्यर्थी आवेदन और भर्ती से जुड़ी जानकारी के लिए आयोग की वेबसाइट पर जारी विवरण देख सकते हैं.TRE-4 की भर्ती में पद बढ़ने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अवसर मिलेगा. अब उम्मीदवारों की नजर परीक्षा कार्यक्रम, आवेदन प्रक्रिया और विषयवार रिक्तियों के अंतिम विवरण पर रहेगी.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
Patna : पटना हाईकोर्ट ने बांका जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस द्वारा की गई मनमानी और बिना किसी ठोस आधार के एक नागरिक को'असामाजिक तत्व'घोषित करने की कार्रवाई को पूरी तरह रद्द कर दिया है. जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद एवं जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की पीठ ने'बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2024'के तहत बांका के जिलाधिकारी द्वारा जारी किए गए अवैध आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता गिरधारी यादव के पक्ष में यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि केवल पुलिस की एक'सनहा' (स्टेशन डायरी) प्रविष्टि के आधार पर किसी भी नागरिक को मौलिक अधिकारों का वंचित नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता को एक लाख रुपए बतौर मुआवजा और मुकदमे के व्यय के लिए दस हजार रुपए देने का निर्देश दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये धनराशि जिम्मेदार अधिकारी से वसूला जाए. यह मामला बांका जिला के कटोरिया निवासी गिरधारी यादव का है,जो चुनाव से पहले पुलिस कार्रवाई के जद में आ गये थे. स्थानीय पुलिस ने बिहार अपराध नियंत्रण कानून, 2024के अंतर्गत आरोप लगाया कि दो मामलों में जमानत पर बाहर चल रहे याचिकाकर्ता गिरधारी यादव संदिग्ध लोगों से मिल रहे हैं व सार्वजनिक शांति भंग कर सकते हैं.स्थानीय पुलिस निरीक्षक द्वारा दर्ज कराई गई अस्पष्ट थाना डायरी प्रविष्टि के आधार पर,बांका के जिलाधिकारी ने उन्हें समाज विरोधी तत्व घोषित कर दिया. जिलाधिकारी ने गिरधारी यादव को उनके घर से40किलोमीटर की दूरी पर स्थित बाराहाट थाने में चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने तक10बजे सुबह से लेकर शाम पांच बजे तक उपस्थित रहने व बैठे रहने का आदेश दिया.कोर्ट ने इस आपराधिक रिट याचिका को स्वीकार करते बांका के जिलाधिकारी द्वारा पारित विवादित आदेश दिनांक08.09.2025को इसके द्वारा रद्द कर दिया. हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की अनियंत्रित कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कड़ी टिप्पणी की.कोर्ट ने सनहा के साक्ष्य मूल्य पर कहा कि केवल'सनहा'का कोई साक्ष्य मूल्य नहीं है. केवल पुलिस अधिकारी द्वारा सनहा में व्यक्त किए गए एक कोरे बयान और संदेह के आधार पर राय बनाने का आधार नहीं हो सकता. पुलिस द्वारा इस प्रकार की निरंकुश और असीमित शक्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों का हनन करार दिया. कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकार में हस्तक्षेप करने वाले कार्यपालक आदेश का निष्पादन पुलिस अधिकारी की इस प्रकार की अनियंत्रित और निरंकुश स्वेच्छाचारिता के तहत नहीं किया जा सकता.जिलाधिकारी की यह कार्रवाई नियमों का उल्लंघन है,जिसके परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता को कठिनाई का सामना करना पड़ा. इस दौरान उन्हें बेरोजगार कर दिया गया. ये धनराशि लापरवाह अफसरों की जेब से मुआवजा वसूला जाएगा.हाईकोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को भारतीय संविधान के अनुच्छेद21के तहत प्राप्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन माना है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को1,00,000रुपये का मुआवजा तथा10,000रुपये की कानूनी लागत का भुगतान किया जाए. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि लागत और मुआवजे की राशि इस अदालत के फैसले के आलोक में दोषी अधिकारियों से वसूल किया जाएगा. जब भी राज्य के किसी कार्यपालक द्वारा शक्ति के दुरुपयोग के लिए राज्य पर लागत और मुआवजा लगाया जाता है,तो उसे दोषी अधिकारियों से वसूल किया जाना आवश्यक है.राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि वह याचिकाकर्ता को इस राशि का भुगतान एक महीने के भीतर करे और अगले छह महीनों के अंदर दोषी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी वसूली पूरी करे.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
"झारखंड की धड़कन, यहाँ की लोकसंस्कृति और आदिवासी जीवन की पहचान—'मांदर' को अब मिल गई है एक बहुत बड़ी वैश्विक और आधिकारिक पहचान! भारत सरकार के भौगोलिक संकेतक (GI) रजिस्ट्री, चेन्नई ने आधिकारिक तौर पर 'Mandar Of Jharkhand' को GI टैग के रूप में पंजीकृत कर लिया है।बता दें कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए आवेदन 24 सितंबर 2021 को दाखिल किया गया था, जिसका आवेदन नंबर 777 है। गुमला की 'Raidih Mandar Producer Company Limited' की ओर से यह आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिससे यहाँ के पारंपरिक मांदर कारीगरों की पीढ़ियों पुरानी मेहनत को एक नया सम्मान मिला है।मांदर की खासियत सिर्फ इसकी गूंजती हुई आवाज नहीं, बल्कि इसे तैयार करने की वह पारंपरिक प्रक्रिया है जो पीढ़ियों से चली आ रही है। इसकी विशिष्ट बनावट, स्थानीय कच्चे माल और झारखंड की माटी से इसके गहरे जुड़ाव को ही इस GI दावे का मुख्य आधार बनाया गया था। झारखंड के विभिन्न जनजातीय समुदायों के नृत्य, संगीत और हर सुख-दुःख के उत्सव में मांदर हमेशा से रीढ़ की हड्डी रहा है।इस बड़ी उपलब्धि पर राज्यभर में खुशी की लहर है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा—'मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में धरोहरों को लगातार मिल रही वैश्विक पहचान… सोहराय खोवर चित्रकला, केसरिया कलाकंद, कुचाई सिल्क, भगैया साड़ी व डोकरा क्राफ्ट के बाद अब 'मांदर' को GI Tag प्रदान किया गया है। मांदर की बनावट और ध्वनि आदिवासी संस्कृति की धड़कन है।सोहराय पेंटिंग और कुचाई सिल्क के बाद अब 'मांदर' का GI टैग लिस्ट में जुड़ना यह साबित करता है कि झारखंड की कला और संस्कृति अब वैश्विक मंच पर अपनी गहरी छाप छोड़ रही है।
बेगूसराय : बिहार के बेगूसराय स्थित होटल में युवती के साथ मारपीट और दुष्कर्म के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है. पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं मारपीट और दुष्कर्म करने वाले मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. दरअसल 27 सितंबर को पीड़िता जब सुबह में घर से निकली तो उसके जान पहचान के बाइकसवार युवक ने पहुंचाने की बात कर उसे होटल ले जाकर मारपीट की और दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया.मामले में एसपी मनीष , डीएसपी इमरान अहमद घटना स्थल पर पहुंचे और होटल के रूम नंबर-203 की जांच किया और स्टाफ से भी पूछताछ की . एफएसएल की टीम ने भी साक्ष्य जुटाए हैं. इस मामले में पुलिस ने पीड़िता को बाइक पर बैठा कर होटल तक लाने वाले एक आरोपी विक्रम कुमार सहनी को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि मारपीट और दुष्कर्म करने वाले मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है.सदर- वन डीएसपी इमरान अहमद के नेतृत्व में पुलिस सभी पहलुओं पर मामले की जांच और विभिन्न पहलुओं पर आगे की कार्रवाई कर रही है. इस मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एस आई टी का गठन किया गया है जो लगातार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है. इस मामले में एसपी मनीष ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया. केस दर्ज किया गया है. एसआईटी का गठन किया गया है. दो नामजद आरोपी है. एक को गिरफ्तार कर लिया गया है, एफएसएल की टीम घटनास्थल पर जांच कर रही है. पीड़िता का मेडिकल और कोर्ट में बयान कराया जा रहा है. पीड़ित ने बताया है जो उसको जांच किया जा रहा है. नियम अनुसार सभी कार्रवाई की जा रही है. एस आईटी का गठन किया गया है. प्राथमिकी में दो लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है. पीड़िता के थाना का चक्कर लगाने के सवाल पर कहा कि कल संज्ञान में आया है जिसके बाद मामला दर्ज किया गया है.‌दरअसल पूरा मामला नगर थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे स्थित ब्लू डायमंड होटल की है जहां पीड़िता का आरोप है कि 27 सितंबर को सुबह जब वह घर से निकली तो उसके जान पहचान के बाइक सवार ने पहुंचाने की बात कर उसे होटल पहुंचा दिया जहां उसे रोहित कुमार रूम नंबर 203 में ले गया उसके साथ बेरहमी से लात घुसों, चप्पल से पिटाई की और उसके साथ नग्न करके उसका वीडियो बनाया और रेप की घटना को भी अंजाम दिया. बाद में सभी वीडियो को वायरल कर दिया गया. पीड़िता ने इस मामले में नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. हालांकि कल‌ दिनभर थानों का चक्कर लगाती रही लेकिन बाद में एसपी के आदेश पर देर रात नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है.
Patna : पटना हाईकोर्ट ने मधेपुरा के डीएम की ओर से एक अधिवक्ता को अवमानना केस चलाने का जारी नोटिस को रद्द कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भूमि अर्जन प्राधिकार के रूप में कार्य कर रहा डीएम को अवमानना कानून के तहत अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं है.जस्टिस आलोक कुमार की एकलपीठ ने अधिवक्ता सुशांत प्रवीर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. आवेदक की ओर से अधिवक्ता आयुष अभिषेक ने कोर्ट को बताया कि आवेदक2010से हाईकोर्ट में वकालत कर रहा है और मधेपुरा डीएम के समक्ष भूमि अर्जन वाद संख्या04/2023में पैरवी कर रहा था.उनका कहना था कि5जुलाई, 2024को व्यक्तिगत कठिनाई बताते हुए मंगलवार के बजाय शुक्रवार को तारीख देने का अनुरोध किया था. इस पर मधेपुरा के डीएम नाराज हो गए और चिल्लाने लगे. उन्होंने बॉडीगार्ड से बाहर फेंकवाने की धमकी दी.इस घटना की जानकारी11जुलाई,2024को रजिस्टर्ड डाक से हाई कोर्ट के महानिबंधक सहित बिहार बार काउंसिल के अध्यक्ष,मुख्य सचिव एवं एसोसिएशन के अध्यक्ष को शिकायत भेजी. इसके बाद26जुलाई2024को शाम5बज कर7मिनट पर डीएम कोर्ट के कोर्ट मास्टर के मोबाइल नंबर से उनके व्हाट्सएप पर शोकॉज नोटिस भेजा गया.ये पूछा गया कि क्यों नहीं अवमानना कानून की धारा12के तहत कार्यवाही की जाए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि डीएम ने बदले की भावना से यह नोटिस की है. सच में नोटिस देना था,तो घटना के दिन6जुलाई को नोटिस जारी करना चाहिए था. लेकिन नोटिस26जुलाई को भेजा गया.उनका यह भी कहना था कि अवमानना कानून के तहत डीएम के कोर्ट को कोर्ट नहीं माना जा सकता. वहीं राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मुख्य सचिव ने2अगस्त, 2024को कोसी प्रमंडल आयुक्त से घटना की जांच कराई और16अगस्त2024की रिपोर्ट में डीएम के दुर्व्यवहार का आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया.हाईकोर्ट ने आयुक्त के जांच रिपोर्ट के बाद विवाद को समाप्त माना,लेकिन अवमानना नोटिस के अधिकार पर कहा कि अवमानना अधिनियम1971के तहत दंड देने का अधिकार केवल सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को है.पारंपरिक अधीनस्थ सिविल और क्रिमिनल कोर्ट भी स्वतंत्र रूप से नोटिस नहीं दे सकते,उन्हें हाईकोर्ट से अनुमति लेना होता है. ऐसे में भूमि अर्जन प्राधिकारी तो बिल्कुल भी अवमानना कार्यवाही नहीं चला सकते. कोर्ट ने व्हाट्सएप पर भेजी गई नोटिस को निरस्त कर दिया. साथ ही रिट याचिका को निष्पादित कर दिया.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
Patna : पटना हाईकोर्ट ने बिहार में प्रॉपर्टी टैक्स वसूली के फॉर्मूले को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और पटना नगर निगम को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का मोहलत दिया है. चीफ जस्टिस वी कामेश्वर राव व जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने विनय कुमार व अन्य की रिट याचिका पर सुनवाई की. इस मामले पर अगली सुनवाई 23 नवंबर, 2026 को होगी.राज्य सरकार द्वारा बड़े कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों पर मनमाना टैक्स लगाने और आम आवासीय घरों पर भारी भरकम टैक्स थोपने के आरोप वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई करने के बाद राज्य सरकार और पटना नगर निगम से जवाब मांगा है.याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनु कुमार ने पक्ष प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया कि याचिका में बिहार नगरपालिका संपत्ति कर निर्धारण, संग्रह और वसूली नियमावली, 2013 के नियम 4 को चुनौती दी गई है.याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा18जुलाई,2013को जारी गजट अधिसूचना और उसके बाद26सितंबर, 2023को जारी अधिसूचना तथा10सितंबर, 2025को जारी नवीनतम अधिसूचना पूरी तरह से मनमानी,दुर्भावनापूर्ण और गैर-कानूनी है. यह नियम 4, बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 127(2), 127(7), 127(9), 127(13) और 127(3)(i)(ii) के प्रावधानों के विपरीत है और संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है.याचिका के अनुसार, मौजूदा फॉर्मूले के तहत होटल जैसे बड़े व्यावसायिक उपयोग वाली संपत्तियों पर प्रॉपर्टी टैक्स में काफी बोझ पड रहा है, जबकि सामान्य रिहायशी मकानों पर भी कर का भारी बोझ लादा जा रहा है.याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि जारी अधिसूचनाओं के आधार पर वसूली पर रोक लगाई जाए और यदि गलत तरीके से वसूली हुई है,तो7प्रतिशत ब्याज के साथ रिफंड का आदेश दिया जाए.कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार और पटना नगर निगम को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दायर करने का समय दिया है,जबकि याचिकाकर्ता को उसके बाद दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है.अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर ,2026 को होगी. राज्य की ओर से महाधिवक्ता एस.डी. संजय और पटना नगर निगम की ओर से वरीय अधिवक्ता प्रसून सिन्हा उपस्थित थे.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
Patna : पटना हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के अफसरों और अनुशासनिक प्राधिकारी की मनमानी और सुस्त रवैये पर कडा रुख अपनाया है.7साल से लंबित विभागीय कार्रवाई और पेंशन-ग्रेच्युटी रोके जाने के मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की एकल पीठ ने सख्त रुख अपनाया है.कोर्ट ने साफ कर दिया कि यदि6सप्ताह के भीतर विभागीय कार्रवाई का अंतिम निपटारा नहीं किया गया, तो पूरी प्रक्रिया स्वतः समाप्त मान ली जाएगी और राज्य सरकार को अगले दो सप्ताह में सभी बकाया सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान करना होगा. लखीसराय में जल संसाधन विभाग के कमांड एरिया डेवलपमेंट सब-डिवीजन में सहायक अभियंता के पद से30अप्रैल, 2020को सेवानिवृत्त हुए. महेंद्र राम को पिछले5सालों से अपने ही पैसे और पेंशन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा था. साल2019में उन पर बैंक ऑफ इंडिया, लखीसराय शाखा से₹48,000की अवैध निकासी और वित्तीय नियमों की अनदेखी का आरोप लगाकर विभागीय जांच शुरू की गई थी. जांच अधिकारी की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि₹48,000की अवैध निकासी एकाउंट क्लर्क (धनंजय कुमार) ने की थी, जिसे बाद में बर्खास्त भी कर दिया गया. यानी मुख्य आरोप में याचिकाकर्ता दोषमुक्त हो चुके थे. इसके बावजूद, विभाग ने उन्हें केवल90%प्रोविशनल पेंशन दी और बाकी10%पेंशन, पूरी ग्रेच्युटी तथा लीव एनकैशमेंट रोक कर रखा.7साल बाद (अप्रैल2026में) बीपीएससी को पेंशन कटौती का प्रस्ताव भेजकर मामले को लटकाए रखा गया. सुनवाई करते हुए जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने देश की सुप्रीम कोर्ट के मील के पत्थर साबित हुए फैसलों—पी वी महादेवन,डा हीरा लाल और डी एस नकारा—का हवाला दिया और कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं,बल्कि संविधान के अनुच्छेद300-A के तहत संपत्ति का अधिकार है. कोर्ट ने अपने आदेश में अति-महत्वपूर्ण टिप्पणी दर्ज करते हुए कहा कि जांच अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर निकाले गए निष्कर्षों के आलोक में, जिसमें उन्होंने पाया है कि₹48,000की कथित अवैध निकासी से संबंधित आरोप संख्या1याचिकाकर्ता के विरुद्ध सिद्ध नहीं हुआ है.उन्हें भारत के संविधान के अनुच्छेद300 (ए) के तहत निहित संपत्ति के रूप में—जैसा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा डी एस नकारा के मामलें में व्यवस्था दी गई है कि पेंशन कोई खैरात नहीं है—उनके सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता है.विभागीय कार्यवाही के लंबे समय तक लंबित रहने का एक अप्रत्यक्ष दंडात्मक प्रभाव होता है; उत्तरदाताओं का यह दायित्व है कि वे विभागीय कार्यवाही को कम से कम संभव समय में समाप्त करें, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने पी वी महादेवन और डा. हीरालाल के मामलों में व्यवस्था दी है. अन्यथा, प्रतिशपथ पत्र में दी गई जानकारी के आधार पर, यह देरी बिना किसी स्पष्टीकरण के बनी रहती है, जो कि याचिकाकर्ता के कारण नहीं हुई है और इससे उन्हें गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पहुंचा है.प्रतिस्पर्धी परिणामों को संतुलित करने के लिए, अनुशासनिक प्राधिकारी की मनमानी कार्रवाई के कारण साम्य/इक्विटी याचिकाकर्ता के पक्ष में है, जिन्होंने बिना किसी कानूनी अधिकार के वैधानिक अवधि से परे विभागीय कार्यवाही में देरी की है, जिसमें इस न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता है.हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में आदेश जारी करते हुए कहा कि जल संसाधन विभाग और संबंधित प्राधिकारी6सप्ताह के भीतर विभागीय जांच/कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लें. यदि6सप्ताह में अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता है, तो यह जांच प्रक्रिया अपने आप बंद मानी जाएगी. इसके बाद अगले2हफ्तों के भीतर याचिकाकर्ता के पेंशन, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट सहित सभी रिटायरल ड्यूज का पूर्ण भुगतान करना होगा.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
पटना: बिहार में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए बिहार स्टेट हाउसिंग बोर्ड ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 करोड़ रुपये की सहायता दी है। सोमवार को पटना स्थित लोक सेवक आवास के ‘संकल्प’ सभागार में बिहार स्टेट हाउसिंग बोर्ड की ओर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पांच करोड़ रुपये का चेक सौंपा गया।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस सहयोग के लिए बिहार स्टेट हाउसिंग बोर्ड का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राशि राज्य में आपदा एवं कठिन परिस्थितियों के दौरान जरूरतमंद लोगों की मदद में काम आएगी।बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री राहत कोष में मिली यह सहायता प्रभावित परिवारों की मदद के लिए महत्वपूर्ण होगी। सरकार की ओर से आपदा की स्थिति में जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए राहत कोष का उपयोग किया जाता है।बिहार स्टेट हाउसिंग बोर्ड की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में पांच करोड़ रुपये का सहयोग ऐसे समय में दिया गया है, जब राज्य के कई हिस्से बाढ़ से प्रभावित हैं। यह राशि आपदा एवं कठिन परिस्थितियों में जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए इस्तेमाल की जाएगी।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार तथा विभाग के विशेष सचिव नीलेश रामचंद्र देवड़े मौजूद रहे।बिहार से वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार की रिपोर्ट
Patna : बराबर गुफाओं की उपेक्षा पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दुनिया में ये कहीं और होता तो यह ऐतिहासिक धरोहर पर्यटन का केंद्र होता. कोर्ट ने कहा कि प्रशासन केवल राजस्व वसूली में रुचि रखता है, विकास में एक रुपये निवेश करने की नीयत नहीं है.जहानाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक मौर्यकालीन बराबर गुफाओं और वहां आयोजित होने वाले श्रावणी मेले की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस राजीव रॉय की एकल पीठ ने राज कुमार द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के रवैये की तीखी आलोचना की.बिहार में विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने में बरती जा रही घोर लापरवाही पर कड़ा प्रहार करते हुए न्यायमूर्ति रॉय ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि कोर्ट आश्चर्य व्यक्त करता है कि मौर्य काल का यह महान ऐतिहासिक स्थल, जो दुनिया में अद्वितीय है, क्या इतनी घोर उपेक्षा का सामना कर रहा है. यदि यह दुनिया के किसी अन्य हिस्से में होता, या भारत के दक्षिण/पश्चिम हिस्से में होता, या फिर मध्य प्रदेश राज्य में होता, जहाँ कई बौद्ध स्थल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं और राजस्व उत्पन्न कर रहे हैं.इसके साथ ही, मेले से मिलने वाले राजस्व के इस्तेमाल और सुविधाओं के अभाव पर कोर्ट ने तीखा प्रहार किया. कोर्ट ने कहा कि निश्चित रूप से, जिला प्रशासन केवल राजस्व एकत्र करने में रुचि रखता है, जबकि वहां बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए पैसे को वापस निवेश करने के प्रति उसकी जिम्मेदारी शून्य है.याचिकाकर्ता को वर्ष2024-25के श्रावणी मेले का ठेका₹1,77,62,159में मिला था.12अगस्त,2024को मेले के दौरान हुई भगदड़ में7लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए. इसके बाद प्रशासन ने क्षेत्र को'नो वेंडिंग ज़ोन' घोषित कर दिया, जिससे दुकानों की बिक्री और राजस्व पूरी तरह ठप हो गया.इसके बावजूद ठेकेदार ने पूरी राशि चुका दी. हालांकि, जिला प्रशासन ने देरी से भुगतान का हवाला देते हुए₹1,37,461का जुर्माना नोटिस जारी कर दिया. हाईकोर्ट ने इस नोटिस को पूरी तरह तर्कहीन, संवेदनहीन और बिना विवेक का इस्तेमाल किया गया माना और इस पर रोक लगा दी.कोर्ट ने निर्देश देते हुए सभी प्रतिवादियों/अधिकारियों की जवाबदेही तय की. कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी विभागों और अधिकारियों को स्पष्ट समय-सीमा के भीतर ठोस और स्थायी कदम उठाने का आदेश दिया है.कोर्ट ने जिलाधिकारी, जहानाबाद को पिछले5वर्षों (2026-27तक) में बराबर श्रावणी मेले से एकत्र किए गए कुल राजस्व का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. स्थायी शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था, बैठने के बेंच, स्थायी वेंडिंग ज़ोन और साफ़-सफ़ाई/हरियाली के लिए मास्टर प्लान (ब्लूप्रिंट) दाखिल करने का भी निर्देश दिया.केवल एक महीने के मेले के लिए बनाए जाने वाले अस्थायी इंतज़ामों का हलफनामा खारिज कर दिया जाएगा. साथ ही.पुलिस अधीक्षक, जहानाबाद को पर्यटकों और श्रद्धालुओं की स्थायी सुरक्षा के लिए विस्तृत सुरक्षा ढांचा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया,ताकि2024जैसी भगदड़ की पुनरावृत्ति न हो.वन प्रमंडलीय अधिकारी / रेंजर, जहानाबाद को निर्देश दिया कि गुफाओं के आसपास के क्षेत्र को हरा-भरा बनाने और जर्जर पड़े डाक बंगले के जीर्णोद्धार के संबंध में जवाब दाखिल करें.कार्यपालक अभियंता, भवन निर्माण विभाग को निर्देश दिया गया कि विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने हेतु राज्य सरकार या प्रशासन को भेजे गए प्रस्तावों की रिपोर्ट दें.कोर्ट ने सिविल सर्जन, जहानाबाद को निर्देश देते हुए कहा कि आपातकालीन स्थिति और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने के उठाए गए कदमों की जानकारी दें. कोर्ट ने प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचलाधिकारी, मखदुमपुर क्षेत्र की साफ़-सफ़ाई और कचरा प्रबंधन में विफलता पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया.सभी प्रतिवादियों को6सप्ताह के भीतर अपना ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है. समय पर हलफनामा न दाखिल करने पर प्रति डिफॉल्टर₹2,000की राशि पटना हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी में जमा करानी होगी. निष्पक्ष न्यायिक निरीक्षण: न्यायिक अधिकारियों की समिति गठित की गई है.कोर्ट ने केवल प्रशासनिक दावों पर निर्भर न रहकर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जहानाबाद को एक विशेष निरीक्षण समिति गठित करने का निर्देश दिया है. इस समिति का नेतृत्व मीतू सिंह (जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, जहानाबाद) करेंगी.यह न्यायिक समिति रविवार या किसी गैर-कार्य दिवस पर बराबर गुफाओं का प्रत्यक्ष दौरा करेगी और वहां की वास्तविक स्थिति तथा स्थायी बुनियादी ढांचे के विकास हेतु अपनी प्रत्यक्ष रिपोर्ट कोर्ट में सौंपेगी. प्रशासन को इस समिति के दौरे के दौरान सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है.मामले की अगली सुनवाई2नवंबर, 2026को होगी.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
औरंगाबाद : इस वक्त की बड़ी खबर बिहार के औरंगाबाद से है जहां निगरानी विभाग ने वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी कांति कुमारी को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया है. टीम ने यह कार्रवाई सोमवार को समाहरणालय परिसर स्थित उनके कार्यालय से की. कार्रवाई पटना से पहुंची निगरानी विभाग की टीम ने की.बताया जा रहा है कि यह मामला टंडवा थाना क्षेत्र के सिकरिया मनिहारी गांव की रहने वाली पूनम देवी से जुड़ा है. पूनम देवी का जमीन से होकर नाली बहाने को लेकर विवाद चल रहा था. इसी विवाद को खत्म कराने और मामले में मदद करने के एवज में कांति कुमारी पर 15 हजार रुपये मांगने का आरोप लगा है.शिकायत के बाद शुरू हुई निगरानीरिश्वत की मांग से परेशान पूनम देवी ने इसकी शिकायत पटना निगरानी विभाग से की थी. शिकायत मिलने के बाद विभाग ने पहले आरोपों का सत्यापन कराया. सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग की पुष्टि होने के बाद टीम ने कार्रवाई की योजना तैयार की.इसके बाद सोमवार को पूनम देवी को 10 हजार रुपये लेकर वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी के कार्यालय पहुंचने को कहा गया. जैसे ही कथित तौर पर रिश्वत की रकम कांति कुमारी को दी गई, निगरानी विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें पकड़ लिया.मौके से बरामद किए गए रुपयेकार्रवाई के दौरान निगरानी टीम ने रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली. इसके बाद टीम कांति कुमारी को अपने साथ ले गई. उनके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है.निगरानी विभाग की इस कार्रवाई के बाद समाहरणालय परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा. कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच भी कार्रवाई को लेकर चर्चा होती रही.बताया गया कि पूरी कार्रवाई निगरानी डीएसपी ऋषिता स्नेह के नेतृत्व में की गई. विभाग की टीम ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद आरोपी अधिकारी को अपने साथ ले गई.औरंगाबाद से मंन्टू कुमार की रिपोर्ट--
कटिहार : बड़ी खबर बिहार के कटिहार से है जहां युवती के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है. 19 वर्षीय युवती ने असिस्टेंट लोको पायलट पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है.पीड़िता ने एक व्यक्ति परकटिहार रेलवे स्टेशन से नौकरी का झांसा देकर ले जाने का आरोप लगाया है.बरमसिया स्थित किराए के मकान में घटना होने का आरोप लगाया है.पीड़िता की शिकायत पर महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है.वहीं पुलिस नेआरोपी असिस्टेंट लोको पायलट चंदन कुमार की तलाश में जुटी हुई है.एसपी परिचय कुमार ने कहा मामले की जांच जारी है.घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पुलिस जांच कर रही है.कटिहार से रितेश कुमार की रिपोर्ट-
फुसरो-करगली मुख्य मार्ग पर सीसीएल ढोरी जीएम कार्यालय के मुख्य द्वार के समीप सड़क पर पड़ी लंबी और बड़ी दरार ने खतरे की घंटी बजा दी है. दरार के ठीक बगल में पहले से मौजूद गहरा गड्ढा हालात को और संगीन बना रहा है. आशंका है कि दरार बढ़ने पर सड़क का उक्त हिस्सा गड्ढे में समा सकता है.चिंता सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं है. दरार सड़क के किनारे तक पहुंचने के साथ आसपास की दुकानों की जमीन में भी दिखाई दे रही है, जिससे स्थानीय दुकानदारों और लोगों में फिक्र बढ़ गई है. इससे यह अंदेशा भी गहरा रहा है कि यदि दरार का फैलाव जारी रहा तो सड़क के साथ आसपास का हिस्सा भी प्रभावित हो सकता है.व्यस्ततम मार्ग पर दिन-रात छोटे-बड़े वाहनों के साथ भारी वाहनों की आवाजाही होती है. ऐसे में सड़क की मौजूदा स्थिति किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है.लगातार वाहनों के दबाव के बीच सड़क का हिस्सा धंसने की स्थिति में हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं.स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए स्थल की तकनीकी जांच और तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि अनहोनी का इंतजार करने के बजाय एहतियाती कदम वक्त रहते उठाना जरूरी है, ताकि जान-माल के नुकसान की नौबत न आए.
राजधानी रांची के धुर्वा गोलचक्कर पर रविवार को तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला. तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर JH01FY4159 अनियंत्रित होकर गोलचक्कर की ग्रिल और बाउंड्री तोड़ते हुए अंदर जा घुसी. हादसे के दौरान एक दूसरी कार JH01DT7410 भी फॉर्च्यूनर की चपेट में आ गई. हादसे के बाद फॉर्च्यूनर में सवार लोग मौके से फरार हो गए. घटना के बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की जानकारी जुटाई.तेज रफ्तार बनी हादसे की वजहबताया जा रहा है कि फॉर्च्यूनर JH01FY4159 काफी तेज गति से गोलचक्कर की ओर आ रही थी. इसी दौरान चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया और गाड़ी सीधे ग्रिल व बाउंड्री तोड़कर गोलचक्कर के अंदर जा घुसी.ओवरस्पीडिंग पर उठ रहे सवालराजधानी में लगातार सामने आ रहे तेज रफ्तार के मामलों ने सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. खासकर प्रमुख चौक-चौराहों पर ओवरस्पीडिंग रोकने और यातायात नियमों का पालन कराने को लेकर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं.