रांची: दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सुरक्षित, स्थायी और स्नेहपूर्ण पारिवारिक माहौल उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत राजधानी रांची में केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की पांचवीं क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीनCARA ने झारखंड सरकार और राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (SARA), झारखंड के सहयोग से इस कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यशाला में परिवार-आधारित देखभाल को मजबूत करने और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण एवं पुनर्वास की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया गया। इसमें पूर्वी भारत के विभिन्न राज्यों से आए अधिकारियों और अन्य हितधारकों ने भाग लेकर इस दिशा में आने वाली चुनौतियों तथा उनके समाधान पर चर्चा की।

दत्तक ग्रहण जागरूकता अभियान 2025के तहत आयोजन

यह कार्यशाला दत्तक ग्रहण जागरूकता अभियान 2025 के अंतर्गत आयोजित की गई। इसका विषय था—‘विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना’। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों और संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, क्षेत्रीय स्तर पर दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं की पहचान करना तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल के अवसर बढ़ाने हेतु व्यावहारिक रणनीतियां तैयार करना था।

चार राज्यों के करीब 175हितधारकों ने लिया भाग

CARA के पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम शामिल हैं। क्षेत्र की भौगोलिक एवं प्रशासनिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस कार्यशाला में झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लगभग115 जिलों से करीब175 हितधारक शामिल हुए।

कार्यशाला के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। साथ ही, बच्चों के पुनर्वास से जुड़ी बेहतर कार्यप्रणालियों पर चर्चा करते हुए समावेशी और परिवार-केंद्रित देखभाल के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता रेखांकित की गई।

दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को सुगम बनाने पर जोर

कार्यशाला को संबोधित करते हुएCARA की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भावना सक्सेना ने लक्षित जागरूकता और हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से हासिल हुई प्रगति को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। इसके साथ ही, संभावित दत्तक माता-पिता को आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

कार्यशाला में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को संस्थागत देखभाल तक सीमित रखने के बजाय, जहां संभव और बच्चे के सर्वोत्तम हित में हो, उन्हें स्थायी पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने के अवसर बढ़ाए जाएं।

कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

इस क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला मेंCARA कीCEO भावना सक्सेना, DWCD&SS के सचिव उमाशंकर सिंह, राज्य दिव्यांगजन आयुक्त कीर्ति श्री, झारखंड की समाज कल्याण निदेशक किरण पासी तथाJSCPS के निदेशक एवं सदस्य सचिव विजय कुमार सिन्हा सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

समावेशी पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

रांची में आयोजित इस कार्यशाला ने विभिन्न राज्यों के अधिकारियों और संबंधित हितधारकों को एक साझा मंच प्रदान किया। इसका उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण से जुड़ी चुनौतियों को समझना, आपसी समन्वय बढ़ाना और उन्हें सुरक्षित एवं स्नेहपूर्ण परिवार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी रणनीतियां विकसित करना रहा।

रांची से संदीप यादव की रिपोर्ट