पटना : मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही है. जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से निष्कासन,विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग और सरकारी बंगला खाली करने के नोटिस के बाद अब उनकी जमानत पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. दुलारचंद यादव हत्याकांड में मिली जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 30 अक्टूबर को सुनवाई होनी है.

हाल ही में हुए बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने और जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन करने के आरोपों के बाद अनंत सिंह पर पार्टी ने कार्रवाई की. जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया. उनकी पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया है. इसके साथ ही अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा गया है.

उधर,राज्य सरकार ने नीलम देवी को 20 सूत्री समिति से हटाने के बाद सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस भी दिया है. इससे अनंत सिंह परिवार की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गई है.

अनंत सिंह को पिछले साल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा क्षेत्र में दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था. जेल में रहते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव जीता. इसके बाद मार्च में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वह जेल से बाहर आए थे.

दुलारचंद यादव के पोते ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. याचिका में अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए जमानत रद्द करने की मांग की गई है. राज्य सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में उनके खिलाफ दर्ज मामलों और हत्याकांड की जांच से संबंधित जानकारी दी है.

अब 30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तय होगा कि अनंत सिंह की जमानत बरकरार रहती है या उसे रद्द किया जाता है.

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-