रांची:झारखंड मेंJPSCभर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।CIDकी ओर से अदालत में पेश किए गए तथ्यों के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक,JPSCके तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते के लैपटॉप से15अभ्यर्थियों से जुड़ी एक गोपनीय पर्ची बरामद हुई थी। दावा है कि इस पर्ची में अभ्यर्थियों के नाम,रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ उनके नाम के आगे हाथ से पद भी लिखे गए थे। इस खुलासे के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
CIDके खुलासे से भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
JPSCभर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान सामने आई इस जानकारी ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।CIDके अनुसार,बरामद पर्ची में15अभ्यर्थियों का विवरण दर्ज था और उनके नाम के सामने पदों का उल्लेख किया गया था।
हालांकि,पर्ची में दर्ज विवरण का चयन प्रक्रिया से क्या संबंध था और क्या इससे किसी तरह की अनियमितता साबित होती है,यह जांच का अहम विषय है। केवल पर्ची बरामद होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी या अधिकारी को दोषी नहीं माना जा सकता। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
कांग्रेस नेCIDकी जांच को बताया निष्पक्ष
CIDके खुलासे पर कांग्रेस ने कहा है कि झारखंड में महागठबंधन सरकार के दौरान जांच को आगे बढ़ाया गया और छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया।
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने दावा किया कि सरकार ने छात्रों की मांगों को सुना और उनके साथ संवाद स्थापित कर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। उन्होंने बीजेपी पर छात्रों के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस ने बीजेपी से सवाल किया कि दूसरे राज्यों में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों पर भी इसी तरह सवाल क्यों नहीं उठाए जाते।
बीजेपी ने उठाए जांच के दायरे पर सवाल
दूसरी ओर,बीजेपी नेCIDके खुलासे को लेकर जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है किJPSCभर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर उसने पहले भी आवाज उठाई थी,लेकिन उस समय आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
बीजेपी का दावा है कि छात्रों के आंदोलन और लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद ही तत्कालीन अध्यक्ष के इस्तीफे की स्थिति बनी। पार्टी ने सवाल उठाया है कि यदि15अभ्यर्थियों की सूची में पदों का उल्लेख था,तो इस पहलू की गहराई से जांच क्यों नहीं की जा रही है।
बीजेपी ने तत्कालीन अध्यक्ष के साथ-साथJPSCके अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच करने और जरूरत पड़ने पर उनसे पूछताछ करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए,ताकि कथित अनियमितताओं से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल हो सके।
अभ्यर्थियों को न्याय मिलने का इंतजार
JPSCभर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली का मामला अब जांच के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। कांग्रेस जहां जांच को निष्पक्ष कार्रवाई बता रही है,वहीं बीजेपी जांच के दायरे को और व्यापक करने की मांग कर रही है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल उन अभ्यर्थियों के भविष्य का है,जिन्होंने अधिकारी बनने के लिए कड़ी मेहनत की और परीक्षा में हिस्सा लिया।
क्याCIDकी जांच में गोपनीय पर्ची से जुड़े सभी सवालों के जवाब सामने आएंगे?क्या सूची में शामिल अभ्यर्थियों के चयन और पद आवंटन की प्रक्रिया की पड़ताल होगी?और क्या जांच से कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो पाएगी?
इन सवालों के जवाब जांच के निष्कर्षों और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल,JPSCभर्ती विवाद को लेकर झारखंड की राजनीति में बयानबाजी जारी है।
रांची से करिश्मा सिन्हा की रिपोर्ट

