Patna : पटना हाईकोर्ट ने विदेशी शरणार्थी को कोर्ट के आदेश के बावजूद जेल से नहीं छोड़ने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार के वरीय अधिकारियों को तलब किया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के प्रधान सचिव सहित राज्य के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव को तलब किया है.
जस्टिस जी अनुपमा चक्रवर्ती की एकलपीठ ने हस्सन हस्सन उर्फ हस्सन उर्फ हुस्स की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद सभी वरीय अधिकारियों को28सितंबर,2026को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है.
कोर्ट को बताया गया कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से शरणार्थी घोषित हैं. आवेदक जोगबनी थाना कांड संख्या246/2018में आईपीसी की धारा420और भारतीय विदेश कानून की धारा14ए के तहत अररिया जेल में बंद हैं. उनका कहना था कि केंद्र सरकार ने2019में विदेशी नागरिक मानते हुए नेपाल छोड़ने का आश्वासन हाई कोर्ट को दिया था. लेकिन उसे नहीं छोड़ा गया.
उसके बाद2021में आवेदक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर जेल से छोड़ने की गुहार लगाई. आवेदक की बहन ने हाई कोर्ट को बताई कि बहन भाई दोनों संयुक्त राष्ट्र की ओर से शरणार्थी घोषित हैं और वे नेपाल के काठमांडू में रहते हैं.
लेकिन वह नेपाल और भारत के नागरिक नहीं हैं,जिस कारण भारत आकर कोर्ट में शपथपत्र दाखिल नहीं कर सकती. यदि भारत सरकार उसे नेपाल के सीमा पर लाकर छोड़ दे,तो वह अपने भाई को अपने साथ ले जायेंगे. उस पर कोर्ट ने अररिया के डीएम को एक माह के भीतर सारी प्रक्रिया को पूरी कर नेपाल बॉर्डर पर हस्तांतरण करने का आदेश दिया.
लेकिन आदेश का पालन नहीं किये जाने पर एक बार फिर आवेदक की ओर से2023में अवमानना अर्जी दायर की. आज कोर्ट ने अधिकारियों की कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रधान सचिव और राज्य सरकार के मुख्य सचिव एवं प्रधान सचिव को आगामी28सितंबर,2026को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
