सुपौल- कोशी नव निर्माण मंच के आह्वान पर कोशी तटबंध के भीतर एकडेरा घाट पर कोशी बाढ़ पीड़ितों का एक दिवसीय जल सत्याग्रह आयोजित हुआ। जल सत्याग्रह में मरौना अंचल के सिसौनी पंचायत के एकडेरा, जोबहां, सिसौनी पलार, किशनपुर अंचल के बैराहा पंचायत के, बौराहा, गोढ़ियारी, मानिकपुर व बुर्जा मुसहरी, नोआबाखर पंचायत के परसाही, सिमराहा इत्यादि गांवों के बाढ़ पीड़ित एकत्र होकर बाढ़ की अपनी पीड़ा बताए। कोशी नदी में खड़ा होकर लोग बताए कि मानसून आने के बाद से कोशी तटबंध के भीतर हमलोगों के गांवों में पानी भरा है। घर, आंगन, रास्ते, चारों तरफ पानी ही पानी है।

एक घर से दूसरे घर जाने के लिए नावों का ही सहारा है। महिला, बच्चे, बूढ़े, बीमार की स्थिति खराब है। पानी लगने से सभी परेशान है तो पशु भी पानी से बीमार हो रहे हैं। फसल तो इस साल किसी की नहीं बची है। सब पानी से बर्बाद हो गई है पर बाढ़ ही नहीं मान रही। प्रशासन को हमलोगों के गांव आकर समस्या सुननी चाहिए। बिहार सरकार के आपदा प्रबन्धन विभाग के पत्रांक 3340 दिनांक 3/9/16 में स्पष्ट उल्लेख है कि जब कोई मोहल्ला/ टोला एवं गांव नदी के पानी से चार-पांच दिनों तक चारो तरफ से घिर जाए, वहां पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं बचे, इस घटना से लोगों का सामान्य जन-जीवन कुप्रभावित हो जाए तो वैसे मोहल्ले/ टोले एवं गाँव को बाढ़ पीड़ित माना जाएगा।

राज्य सरकार के प्रावधानों को जिला प्रशासन अनुपालन नहीं कर रहा है और अन्याय कर रहा है। जबकि हमलोगों के विधायको में एक माननीय उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जी है इनको बिहार के बाढ़ पीड़ितों की चिंता है पर अपने विधान सभा और जिले के बाढ़ पीड़ितों को भूल गए। इसीलिए पानी में खड़ा होकर दुःख बताना पड़ रहा है।लोगों ने जिले को बाढ़ घोषित कर मानक संचालन प्रक्रिया और मानदर के तहत जी. आर. की राशि देनें, फसल क्षति का इनपुट अनुदान देनें, जिनके पास बाहर बसने को जगह नहीं है उन्हें बाहर पुनर्वासित कराने, तटबंध के भीतर स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करने, मेडिकल और पशुओं का निःशुल्क कैंप कराने, कोशी पीड़ित विकास प्राधिकार को पुनर्जीवित करने का प्रयास कराने सहित कोशी की छाड़न धाराओं को पुनर्जीवित कर कोशी का समाधान की दिशा में कार्य करने की मांग की।

