Patna: पटना हाईकोर्ट ने प्रदेश के हर पंचायत में बनने वाले मुक्तिधाम के निर्माण पर धीमी रफ्तार पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. कोर्ट ने सरकार को विस्तृत जवाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है.

चीफ जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार सिंह की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया.

कोर्ट सरकार से जानना चाहा कि फंड जारी होने के बाद भी निर्माण की रफ्तार धीमी क्यों है और तय मानकों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है.

आवेदक की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार ने कोर्ट को बताया कि आवेदक ने2013में सबसे पहले मानवाधिकार आयोग से अनुरोध किया था. आयोग के आदेश के बाद भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया,तो2020में हाईकोर्ट में लोकहित याचिका दायर की.

कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता बनी रही. उनका कहना था कि इसी बीच राज्य सरकार ने बिहार पंचायती राज अधिनियम में संशोधन किया. उनका कहना था कि संशोधन के बाद प्रत्येक पंचायत में आधुनिक और सुसज्जित मुक्तिधाम बनाने के लिए सरकारी फंड आवंटित किया गया.

लेकिन कानून के तहत निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है. जहां भी मुक्तिधाम बन रहे हैं,वहां बायलॉज के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है. शेड,पानी,बिजली और बैठने की व्यवस्था नहीं है.

प्रत्येक मुक्तिधामों को बारहमासी मुख्य सड़क से जोड़ने का प्रावधान है. लेकिन हकीकत कुछ और है. अधिकांश मुक्तिधाम का एप्रोच रोड न होने से ग्रामीणों को शव ले जाने में परेशानी हो रही है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी कई मुक्तिधाम अनुपयोगी पड़े हुए हैं.

उनका कहना था कि सम्मानजनक अंतिम संस्कार हर व्यक्ति का अधिकार है और सरकार को इस योजना को लागू करना चाहिए. यह आम लोगों के भावनाओं का सम्मान करना आवश्यक है.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-