कभी जिस स्टेडियम में सुबह की पहली किरण के साथ ही मॉर्निंग वॉकर्स की चहल-पहल शुरू हो जाती थी, आज वहां सिर्फ मायूसी और ताले नजर आ रहे हैं! रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आम लोगों की एंट्री पर रोक लगे हुए हफ्तों बीत चुके हैं। कहानी शुरू होती है 25 जुलाई 2026 से। जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन मोरहाबादी से शिफ्ट होकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचा था। 26 दिनों तक चले इस लंबे आंदोलन के बाद 20 अगस्त को आखिरकार धरना समाप्त हो गया। छात्रों को उम्मीद थी कि अब स्टेडियम आम नागरिकों और मॉर्निंग वॉकर्स के लिए फिर से खुल जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ!
आंदोलन खत्म होने के ठीक दो दिन बाद जिला प्रशासन ने स्टेडियम में 60 दिनों के लिए निषेधाज्ञा (धारा 163) लागू कर दी। प्रशासन का तर्क है कि विधि-व्यवस्था, जन-सुरक्षा और सुगम यातायात बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था। हालांकि, प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि अब धरना-प्रदर्शन के लिए नए विधानसभा के पास स्थित कुटे मैदान को चिन्हित किया गया है। दूसरी तरफ, सुबह टहलने आने वाले आम लोगों का कहना है कि खुले मैदान में सैर करने पर रोक नहीं लगनी चाहिए। लोगों का सवाल है कि जब छात्रों का आंदोलन खत्म हो चुका है, तो फिर मॉर्निंग वॉकर्स को क्यों परेशान किया जा रहा है?
इस मामले पर जब रांची के एसडीओ कुमार रजत से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि नगर निगम द्वारा स्टेडियम में निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि 18 अक्टूबर को निषेधाज्ञा की अवधि पूरी होने के बाद, स्थिति की समीक्षा की जाएगी और उसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। यानी साफ है कि मॉर्निंग वॉकर्स को अपनी फिटनेस रूटीन के लिए अभी 18 अक्टूबर तक का इंतजार करना होगा। क्या निषेधाज्ञा हटने के बाद स्टेडियम दोबारा गुलजार हो पाएगा?
