पटनाः बिहार के उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बिहार सरकार और केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बधाई देते हुए कहा कि इससे बिहार में नदियों की स्थिति सुधारने और बाढ़ की भयावहता कम करने में मदद मिलेगी।
गाद जमाव को बताया बाढ़ की गंभीरता का प्रमुख कारण
विजय चौधरी ने कहा कि नदियों में गाद जमा होना उनकी दुर्दशा और बाढ़ की गंभीरता का प्रमुख कारण है। बिहार सरकार पिछले डेढ़ दशक से राष्ट्रीय स्तर पर गाद प्रबंधन नीति बनाने की मांग कर रही थी। इस समस्या को वर्ष2011-12में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी की बैठक में प्रमुखता से उठाया था। उस दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री पवन बंसल को बक्सर से फरक्का तक गंगा नदी में गाद जमाव की स्थिति का हवाई निरीक्षण भी कराया गया था।
वर्ष2014में भी केंद्र के सामने उठाया गया था मुद्दा
उन्होंने बताया कि वर्ष2014में तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के समक्ष भी गाद प्रबंधन नीति की आवश्यकता और फरक्का बराज के बाद बिहार में गाद जमा होने की समस्या उठाई गई थी। इसके बाद विशेषज्ञ समिति गठित हुई और वर्ष2022में राष्ट्रीय गाद प्रबंधन ढांचा प्रस्तावित किया गया।
बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन और गाद प्रबंधन नीति2026तैयार
डिप्टी सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में जल संसाधन विभाग ने ‘बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन और गाद प्रबंधन नीति2026’ तैयार की है। इसी नीति के आधार पर3नवंबर को नई दिल्ली में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
गाद से सड़क निर्माण,किसानों की मिट्टी भी रहेगी सुरक्षित
उन्होंने कहा कि नदियों से गाद निकालने पर उनका पुनर्जीवन होगा, बाढ़ की समस्या कम होगी और सड़क निर्माण में गाद के इस्तेमाल से किसानों की उपजाऊ मिट्टी भी सुरक्षित रहेगी। विजय चौधरी ने इसे दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय बताया।
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट

