पटना:बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले की जांच मेंEDने कार्रवाई तेज कर दी है। ठेकेदार रिशु श्री से कथित संबंधों और सरकारी टेंडर में अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में छह वरिष्ठIASअधिकारियों को पूछताछ के लिए समन भेजा गया है। इनमें आनंद किशोर,संतोष कुमार मल्ल,धर्मेंद्र कुमार,योगेश कुमार सागर,अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव के नाम शामिल हैं। इस मामले में रिशु श्री फिलहाल जेल में बंद है।15अक्टूबर कोHCकी सख्त टिप्पणियों के बाद जांच ने नया मोड़ लिया है।

दो अधिकारियों से पूछताछ,धर्मेंद्र कुमार भीEDके सामने पेश

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक,अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव सेEDपूछताछ कर चुकी है। वहीं,IASअधिकारी धर्मेंद्र कुमार से28अक्टूबर को पटना स्थितEDकार्यालय में करीब छह घंटे तक पूछताछ की गई। जांच एजेंसी कथित टेंडर अनियमितताओं,अधिकारियों के साथ रिशु श्री के संपर्क और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

आनंद किशोर को30अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाया गया था,जबकि संतोष कुमार मल्ल को29अक्टूबर को तलब किए जाने की जानकारी सामने आई थी। योगेश कुमार सागर को भी पूछताछ के लिए समन भेजा गया है। अधिकारियों से पूछताछ में क्या जानकारी सामने आई है,इसका विस्तृत आधिकारिक ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।

HCने कहा- रिशु श्री सिर्फ मोहरा,असली किरदार पर्दे के पीछे?

इस मामले में15अक्टूबर2026कोHCमें रिशु श्री की याचिका पर सुनवाई हुई थी। न्यायमूर्ति सत्यव्रत वर्मा की पीठ नेEDकी जांच और बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिशु श्री कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महज एक मोहरा प्रतीत होता है और मुख्य किरदार पर्दे के पीछे हो सकते हैं। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया किEDकी ओर से छह वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के नाम सामने लाए जाने के बावजूद संबंधित मामले में केवल तीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी क्यों दर्ज की गई।

अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि कहीं कुछ लोगों को बचाने और कुछ को फंसाने की कोशिश तो नहीं हो रही। मामले की अगली सुनवाई27नवंबर2026को निर्धारित की गई है।

आनंद किशोर की भूमिका को लेकर क्या हैं आरोप?

आनंद किशोर नगर विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव रह चुके हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार,जांच में रिशु श्री और सरकारी अधिकारियों के बीच कथित संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। एक बयान के हवाले से यह दावा भी किया गया है कि रिशु श्री,आनंद किशोर को ‘भैया’ कहकर संबोधित करता था।

हालांकि,किसी अधिकारी के साथ व्यक्तिगत परिचय या कथित बातचीत अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है। आनंद किशोर की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

अभिलाषा शर्मा पर भी जांच का दायरा

अभिलाषा कुमारी शर्मा सीतामढ़ी की तत्कालीन जिलाधिकारी और जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी रह चुकी हैं। उपलब्ध आरोपों में रिशु श्री के साथ उनके कथित पारिवारिक संबंधों और विभिन्न जिलों में पदस्थापन के लिए पैरवी किए जाने की बात कही गई है।

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है।EDकी पूछताछ का उद्देश्य अधिकारियों की भूमिका और कथित लेनदेन से जुड़े तथ्यों की जांच करना है।

योगेश सागर की विदेश यात्रा भी जांच के दायरे में

बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बुडको) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक योगेश कुमार सागर की जून2024में ऑस्ट्रिया यात्रा को लेकर भी आरोप सामने आए हैं।

दिए गए विवरण के अनुसार,यात्रा में परिवार के छह सदस्यों के शामिल होने और कुल21.92लाख रुपये खर्च होने का दावा किया गया है। आरोप है कि इसमें से17.65लाख रुपये रिशु श्री के कर्मचारी साहिल सिन्हा और मेसर्स जेम्स इंजीनियरिंग की ओर से नकद चुकाए गए। जांच एजेंसी कथित तौर पर यह पता लगाने में जुटी है कि यात्रा के खर्च और सरकारी ठेकों के बीच कोई संबंध था या नहीं।

इन आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और संबंधित दस्तावेजों से ही हो सकेगी।

धर्मेंद्र कुमार पर अस्पताल निर्माण और खरीद से जुड़े आरोप

धर्मेंद्र कुमार बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL)के पूर्व प्रबंध निदेशक और सासाराम के तत्कालीन नगर आयुक्त रह चुके हैं।

उनके कार्यकाल से जुड़े कुछ ठेकों में रिशु श्री के कथित सिंडिकेट को फायदा पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है। इनमें अस्पताल भवनों के निर्माण,बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन और स्वच्छता उपकरणों की खरीद से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं।

EDयह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं और संबंधित कंपनियों को किसी तरह का अनुचित लाभ मिला था या नहीं।

संतोष कुमार मल्ल पर कमीशन और बिल भुगतान में अनियमितता के आरोप

नगर विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन सचिव संतोष कुमार मल्ल की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट,ड्रेनेज और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसी परियोजनाओं में पांच से सात प्रतिशत कमीशन का कथित सिंडिकेट सक्रिय था।

इसके अलावा,बिल पास कराने के बदले रिश्वत के लेनदेन और नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

सुनील यादव पर खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप

तत्कालीन नगर आयुक्त एवं विभागीय अधिकारी सुनील यादव से नगरपालिकाओं और नगर परिषदों में खरीद प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पूछताछ की गई है। आरोपों में कूड़ेदान,ई-गवर्नेंस वाहनों और सफाई उपकरणों की खरीद के दौरान सरकारीGeMपोर्टल के नियमों के उल्लंघन तथा कथित तौर पर पसंदीदा कंपनियों को ठेके दिलाने की बात शामिल है।

जांच में कथित डिजिटल लेजर और वित्तीय लेनदेन का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि रिशु श्री से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड में अधिकारियों को रिश्वत या उपहार देने से संबंधित प्रविष्टियां थीं। इन रिकॉर्डों की प्रामाणिकता और उनमें दर्ज लेनदेन का वास्तविक स्वरूप जांच का विषय है।

अब27नवंबर की सुनवाई पर नजर

बिहार के इस कथित टेंडर घोटाले में अबEDकी पूछताछ औरSVUकी जांच अहम मानी जा रही है। पटना हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जांच एजेंसियों से वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आने के बावजूद की गई कार्रवाई पर स्पष्टीकरण मांगा है।

27नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई मेंSVUके जवाब और जांच की प्रगति पर नजर रहेगी। वहीं,EDकी पूछताछ से सरकारी टेंडरों,कथित कमीशन नेटवर्क और अधिकारियों के साथ ठेकेदार के संबंधों को लेकर कौन-से तथ्य सामने आते हैं,यह आगे की जांच से स्पष्ट होगा।

पटना से विवेक कुमार की रिपोर्ट