पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम चंपारण जिले के बगहा,बैरिया प्रखंड के बथना,योगापट्टी प्रखंड के मच्छरगांवा एवं नौतन प्रखंड के शिवराजपुर,बनकटवा तथा आस-पास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का एरियल सर्वे कर स्थिति का जायजा लिया. सारण जिले के मकेर प्रखंड अन्तर्गत हैजलपुर पंचायत क्षेत्र में टूटे हुए तटबंध का भी ऐरियल सर्वे किया.
मुख्यमंत्री ने बथना स्थित बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण कर सामुदायिक रसोई,चिकित्सा शिविर,पेयजल,शौचालय,पशु राहत शिविर एवं आवासन व्यवस्था का जायजा लिया. मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में लोगों को स्वयं भोजन परोसा.
नदियों के जलस्तर,तटबंधों की सतत निगरानी,पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था तथा एन०डी०आर०एफ० एवं एस०डी०आर०एफ० की तैनाती बनाए रखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने का निर्देश. स्थिति सामान्य होने और लोगों के घर लौटने तक सामुदायिक रसोई संचालित रखने का भी निर्देश .
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पश्चिम चंपारण जिले के बगहा,बैरिया प्रखंड के बथना,योगापट्टी प्रखंड के मच्छरगांवा एवं नौतन प्रखंड के शिवराजपुर,बनकटवा तथा आस-पास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का एरियल सर्वे कर स्थिति का जायजा लिया. साथ ही सारण जिले के मकेर प्रखंड अन्तर्गत हैजलपुर पंचायत क्षेत्र में टूटे हुये तटबंध का भी ऐरियल सर्वे किया. पटना से पश्चिम चंपारण आने के क्रम में उन्होंने नदियों के जलस्तर एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भी हवाई सर्वेक्षण किया.
एरियल सर्वे के पश्चात मुख्यमंत्री ने बैरिया प्रखंड के बथना स्थित पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में संचालित बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया. उन्होंने सामुदायिक रसोई,चिकित्सा शिविर,स्वच्छ पेयजल,शौचालय,पशु राहत शिविर,पशु शेड तथा महिलाओं एवं पुरुषों के लिए की गई आवासन व्यवस्था का जायजा लिया. मुख्यमंत्री ने सामुदायिक रसोई में स्वयं लोगों को भोजन परोसा. उन्होंने शिविर में संचालित अस्थायी आंगनबाड़ी बाल शिविर का भी निरीक्षण किया तथा बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई एवं उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली. चिकित्सा शिविर में उपलब्ध दवाओं एवं उपचार की व्यवस्था का भी जायजा लिया. मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए.
मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा उनके शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि प्रभावित लोग अपनी समस्याओं एवं जरूरतों से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराएं,ताकि उन्हें तत्काल राहत उपलब्ध कराई जा सके.
इसके बाद मुख्यमंत्री ने पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय,बथना स्थित जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर समीक्षा बैठक की. जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने पश्चिम चंपारण जिले के मानचित्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों,तटबंधों की स्थिति,राहत एवं चिकित्सा शिविरों तथा राहत एवं बचाव कार्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी. जिलाधिकारी ने जिले में बाढ़ की स्थिति,नदियों के जलस्तर,तटबंधों की स्थिति,प्रभावित आबादी,राहत सामग्री के वितरण,राहत एवं बचाव कार्यों तथा एन०डी०आर०एफ० एवं एस०डी०आर०एफ० की तैनाती के संबंध में मुख्यमंत्री को अवगत कराया.
बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चंद्रशेखर सिंह ने नदियों के जलस्तर एवं तटबंधों की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार नेपाल की ओर से अब तक सबसे अधिक पानी आया है. बगहा,रेवा घाट,लालगंज एवं गोपालगंज में उच्चतम जलस्तर (एच०एफ०एल०) रिकॉर्ड किया गया है. गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से अभी ऊपर बह रहा है लेकिन पानी धीरे-धीरे घट रहा है. डुमरिया पुल के समीप नदी का जलस्तर स्थिर होने तथा पानी का दबाव कम हो रहा है. बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने क्षेत्र में बाढ़ की वर्तमान स्थिति तथा संचालित राहत एवं बचाव कार्यों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया.
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल की तराई से पानी आने के कारण बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हुई है. कोसी एवं महानंदा नदी का सर्वे कराया जा रहा है,ताकि बाढ़ की समस्या का समग्र अध्ययन कर स्थायी समाधान की दिशा में कार्य किया जा सके. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के लिए हर स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं तथा अगले दो-तीन दिनों में पानी निकलने की संभावना है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित आबादी को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त संख्या में सामुदायिक रसोई का नियमित संचालन किया जाए. बाढ़ प्रभावित परिवारों को चिह्नित कर दशहरा से पहले 7,000 रूपये प्रति परिवार की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. राज्य सरकार द्वारा कुछ दिन पूर्व बाढ़ प्रभावित परिवारों को 7,000 रूपये की अनुग्रह सहायता राशि डी०बी०टी० के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है. उन्होंने पानी की निकासी के लिए आवश्यकता के अनुसार स्लुइस गेट खोलने,नदियों के जलस्तर,तटबंध एवं कटाव की सतत निगरानी रखने तथा पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. प्रभावित लोगों तक पर्याप्त मात्रा में सूखा राशन एवं अन्य राहत सामग्री पहुंचाने तथा पशुओं के लिए भी समुचित चारा एवं आश्रय की व्यवस्था करने को कहा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को एस०ओ०पी० के अनुसार सभी आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं. बाढ़ से हुए नुकसान को दुरुस्त किया जाएगा. उन्होंने निर्देश दिया कि आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक रसोई का संचालन तब तक जारी रखा जाए,जब तक लोग अपने घरों को वापस नहीं लौट जाते और स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती. एन०डी०आर०एफ० एवं एस०डी०आर०एफ० की तैनाती सुनिश्चित रखते हुए राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी रखने का भी निर्देश दिया. इस दौरान उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी,सांसद डॉ० संजय कुमार जायसवाल,सांसद सुनील कुमार,विधायक संजय कुमार पांडे,विधायक विनय बिहारी,पूर्व विधायक उमाकांत सिंह,मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत,पुलिस,प्रीता वर्मा,आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल,मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह,जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चंद्रशेखर सिंह,चंपारण प्रक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक हरकिशोर राय,पश्चिम चम्पारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह,पुलिस अधीक्षक कुमार गौतम सहित अन्य जनप्रतिनिधि,वरीय अधिकारी एवं स्थानीय लोग उपस्थित थे.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
