
रविवार, 11 अक्टूबर 2026
Liveपटना : बिहार सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है. गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार,1998 बैच के आईपीएस अधिकारी रत्न संजय को अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था),बिहार,पटना के पद पर तैनात किया गया है. इसके साथ ही उन्हें अपर पुलिस महानिदेशक,मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है.अब तक एडीजी विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहीं 1998 बैच की आईपीएस अधिकारी कार्तिकेय सुहिता अनुपम को अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग),अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी),बिहार,पटना के पद पर स्थायी रूप से पदस्थापित किया गया है.जिला स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. राज्यपाल के पुलिस परिसहाय के पद पर तैनात 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी किरण कुमार गोरख जाधव को अरवल का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है. अरवल की एसपी नवजोत सिमी को स्थानांतरित कर सीआईडी,बिहार,पटना में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है.राजधानी पटना में भी पुलिस अधिकारियों की तैनाती बदली गई है. 2019 बैच के आईपीएस अधिकारी चंद्र प्रकाश को पटना का नया नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) बनाया गया है. इससे पहले वे बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-10 के समादेष्टा और साइबर अपराध के अतिरिक्त प्रभार में थे.वहीं,पटना सिटी एसपी (मध्य) के पद पर कार्यरत ममता कल्याणी को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-10,पटना का समादेष्टा नियुक्त किया गया है.इस फेरबदल के तहत वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जिला और राजधानी स्तर तक नई जिम्मेदारियां तय की गई है.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना : बिहार में प्रस्तावित मां सीता महिला विश्वविद्यालय को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय के संबंध में कोई भी निर्णय संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने और उनके सुझावों को ध्यान में रखने के बाद ही लिया जाएगा. फिलहाल इस विश्वविद्यालय को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है.मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री संजय सिंह टाइगर को निर्देश दिया है कि बिहार विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की जाए. मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार,चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दे पर आगे की औपचारिक कार्रवाई नहीं की जाएगी.हितधारकों के साथ होगी बैठकमुख्यमंत्री ने प्रस्तावित मां सीता महिला विश्वविद्यालय से जुड़े सभी हितधारकों के साथ बैठक आयोजित करने पर जोर दिया है. इस बैठक में संबंधित पक्षों की राय,सुझाव और विचार सुने जाएंगे. सरकार का अगला कदम इसी विचार-विमर्श से प्राप्त सुझावों के आधार पर तय होगा.मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि विश्वविद्यालय से संबंधित निर्णय लेते समय हितधारकों के विचारों को उचित महत्व दिया जाए. इसके बाद ही प्रस्तावित विश्वविद्यालय के संबंध में आगे की दिशा निर्धारित की जाएगी.फिलहाल अंतिम निर्णय नहींमां सीता महिला विश्वविद्यालय को लेकर सरकार ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. मुख्यमंत्री के निर्देश से स्पष्ट है कि इस विषय पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय संबंधित पक्षों से चर्चा को प्राथमिकता दी जाएगी.बिहार विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू होगी. इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर विश्वविद्यालय को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी. अब सभी की नजरें चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और प्रस्तावित बैठक पर टिकी है.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना : राजधानी पटना के रूपसपुर इलाके में ऑनलाइन ई-कॉमर्स गेम और टास्क पूरा कर मुनाफा कमाने का लालच देकर एक युवक से 12.70 लाख रुपये की साइबर ठगी किए जाने का मामला सामने आया है. पीड़ित ने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.गेम के लिंक से शुरू हुआ ठगी का खेलपीड़ित युवक के अनुसार,मीरा अग्रवाल नाम की एक महिला ने उससे संपर्क किया. महिला ने बताया कि वह पहले दिल्ली में रहती थी और फिलहाल मलेशिया में रह रही है. बातचीत के दौरान उसने युवक को आवरशॉपी नामक ई-कॉमर्स गेम का लिंक भेजा. युवक ने लिंक पर क्लिक किया और दो दिनों तक गेम खेला. शुरुआत में उसे विभिन्न टास्क पूरे कर मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाया गया. इसके बाद अधिक कमाई का लालच देकर गेम में ज्यादा पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया गया.पैसे निकालने के लिए मांगे 7.98 लाख रुपयेयुवक ने एप पर रकम जमा कर टास्क पूरे किए. जब उसने अपनी जमा राशि और कथित मुनाफे को निकालने की कोशिश की,तो निकासी नहीं हो सकी. इसके बाद एप की कस्टमर सर्विस की ओर से पैसे निकालने के लिए 7.98 लाख रुपये जमा करने को कहा गया. रकम वापस मिलने की उम्मीद में युवक ने यह राशि भी जमा कर दी,लेकिन इसके बावजूद पैसे नहीं मिले.दोबारा पैसे मांगने पर खुला ठगी का मामलापीड़ित के मुताबिक,उसने संबंधित बैंक खाते में कुल 12.70 लाख रुपये जमा किए थे. इसके बाद भी निकासी नहीं होने और दोबारा रकम मांगे जाने पर उसे साइबर ठगी का एहसास हुआ. इसके बाद उसने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई.पुलिस मामले की जांच कर रही है. यह घटना ऑनलाइन निवेश और टास्क के जरिए कमाई का लालच देने वाले साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित करती है.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--
पटना: जिले के पुनपुन प्रखंड स्थित बेहरावां चकिया मुसहर बस्ती में पुलिस की बर्बर कार्रवाई की जांच करने के लिए भाकपा-माले और अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) की उच्चस्तरीय जांच टीम ने9अक्टूबर को घटनास्थल का दौरा किया और वीरचंद पटेल पथ स्थित एमएलए फ्लैट213में शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया.प्रेस कॉन्फ्रेंस को खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यदेव राम, राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा, ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो सदस्य एवं पटना जिला सचिव अमर सिंह, राष्ट्रीय सचिव गोपाल रविदास और राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी ने संबोधित किया.प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि बेहरावां मुसहर बस्ती में पुलिस की कार्रवाई ने गरीबों और वंचित समुदायों के प्रति पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.32महिलाओं समेत मुसहर समुदाय के39लोगों को जेल भेज दिया गया है. इनमें दूध पिलाने वाली माताएं और युवतियां भी शामिल हैं. पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है.इस घटना के खिलाफ ऐपवा12अक्टूबर को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रदर्शन करेगा एवं15अक्टूबर को पुनपुन में प्रतिवाद सभा का आयोजन किया जाएगा. एवं बिहार भर में भाकपा माले, खेग्रामस, एवं ऐपवा के बैनर तले प्रतिवाद किया जाएगा.वक्ताओं ने बताया कि4अक्टूबर को सुबह करीब11बजे, जब महिलाएं जितिया पर्व का उपवास तोड़ रही थीं, उस समय सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने बस्ती में कार्रवाई शुरू की. इससे पहले2अक्टूबर की रात भी बेहरावां चकिया मुसहर टोली में पुलिस ने कार्रवाई की थी.नेताओं ने कहा कि पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बर्बरता की सारी सीमाएं पार कर दीं. पुलिस से बचने के लिए कई लोग पुनपुन नदी में कूद गए. नदी के दोनों किनारों से पुलिसकर्मियों ने लोगों पर रोड़े फेंके. इस दौरान रामू मांझी और आकाश मांझी की नदी में डूबने से मौत हो गई. स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयास से दर्जनों अन्य लोगों को डूबने से बचाया गया.इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोनों मौतों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. महिलाओं और युवतियों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न समेत गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़ितों की शिकायतों पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.सुरेंद्र महतो के परिवार के साथ मारपीट और रवि केवट की आत्महत्या का मामलापिपरा थाना पुलिस की पूर्व की कार्रवाई का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, 12सितंबर को सुरेंद्र महतो को राजघाट नवादा में उनकी दुकान पर मछली बेचते समय पुलिस मारपीट कर थाने ले गई थी. पुलिस उनकी पत्नी और बेटी को भी पकड़कर ले गई और उनके साथ भी मारपीट की गई. आरोप है कि इस दौरान सुरेंद्र महतो का हाथ तोड़ दिया गया.सुरेंद्र महतो की बेटी खुशबू, जो पहले पिपरा थाना में ग्रामीणपुलिस के रूप में काम कर चुकी थीं, जब अपने पिता, मां और बहन से मिलने पहुंचीं तो उनके साथ भी मारपीट की गई और अभद्र गालियां दी गईं. खुशबू ने पिपरा थानाध्यक्ष और दो अन्य सब-इंस्पेक्टरों के खिलाफ आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन उनके अनुसार कोई कार्रवाई नहीं हुई.नेताओं ने आगे कहा कि पुलिस प्रताड़ना से परेशान परिवार के सदस्य रवि केवट ने26अक्टूबर को आत्महत्या कर ली. उन्होंने इस मामले में पीड़ित परिवार के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच करने की मांग की. नेताओं ने पिपरा थानाध्यक्ष प्रिंस कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इलाके में शराब की आपूर्ति करने वाले गिरोह और थाना पुलिस के बीच कथित सांठगांठ की भी जांच होनी चाहिए.नेताओं ने कहा कि मुसहर समुदाय की शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के लिए ठोस कदम उठाने के बजाय उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है. गरीबों और वंचितों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है.9अक्टूबर को ही विधानपरिषद शशि यादव के नेतृत्व में भाकपा माले जांच दल की टीम ने बिहार के डीजीपी से मुलाकात किया एवं ज्ञापन सौंपा.डीजीपी के समक्ष रखी गई चार प्रमुख मांगेंडीजीपी से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने निम्नलिखित मांगें रखीं—पिपरा थानाध्यक्ष प्रिंस कुमार समेत कार्रवाई में शामिल सभी दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए.रवि केवट की आत्महत्या के मामले की विस्तृत जांच कर पीड़ित परिवार द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाए तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो.बेहरामा चकिया मुसहर बस्ती की घटना में पीड़ित महिलाओं, युवतियों और अन्य परिजनों द्वारा दिए गए आवेदनों के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए.जेल में बंद सभी महिलाओं को अविलंब बिना शर्त रिहा किया जाए तथा32महिलाओं समेत गिरफ्तार सभी39लोगों की गिरफ्तारी की निष्पक्ष समीक्षा कर उनकी रिहाई सुनिश्चित की जाए.भाकपा-माले और खेग्रामस नेताओं ने मांग की कि बेहरामा की घटना को केवल पुलिस कार्रवाई का मामला मानकर नहीं टाला जाए.दो लोगों की मौत, महिलाओं के गंभीर आरोपों, सामूहिक गिरफ्तारी और रवि केवट की आत्महत्या के मामले की जवाबदेही तय की जाए.पीड़ित परिवारों को न्याय मिले और मुसहर बस्ती के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.पटना से अंकिता की रिपोर्ट-
पटना: बिहार राज्य किसान सभा,सेंटर ऑफ इंडिया ट्रेड यूनियन (सीटू),बिहार प्रांतीय ग्रामीण खेतिहर मजदूर यूनियन के बैनर तले असंवैधानिक विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)के तहत मनमाने और गैरकानूनी तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग तथा प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के विरोध में जमाल रोड कार्यालय से मार्च निकालते हुए पटना जंक्शन गोलंबर के पास ज्ञानेश कुमार और गृह मंत्री का पुतला दहन किया गया.पुतला दहन के बाद सभा को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग तत्काल प्रत्येक पात्र मतदाता के संवैधानिक मतदान अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करे और मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाए.जंतर मंतर,दिल्ली में प्रदर्शन में जा रहे छात्र युवा सहित सीपीएम के महासचिव एम ए बेबी,बृंदा करात,केरल के पूर्व मुख्यमंत्री विजयन,प्रकाश करात,किसान नेता विजु कृष्णन,अवधेश कुमार सहित अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की भी निंदा की गयी है. एन डी ए सरकार तानाशाही के रास्ते पर चल रही है,दमन के सहारे आंदोलन को दबाना चाहती है.कार्यक्रम में सीटू के राज्य अध्यक्ष गणेश सिंह,कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार झा,किसान सभा के राज्य वित्त सचिव मनोज कुमार चंद्रवंशी, अरुण मिश्रा,खेतिहर मजदूर यूनियन के देवेंद्र चौरसिया,मनोज चौधरी,शिव विधार्थी,संजय चटर्जी,रंजन राज,सुधीर कुमार,देवाशीष राय,अजय चटर्जी,कांति कुमारी,सुरेंद्र कुमार,शशि प्रकाश,राजीव रंजन,उमेश राय,रामनरेश वर्मा,देवव्रत राय सहित अन्य मौजूद थे.पटना से अंकिता की रिपोर्ट-
पटना : बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में जारी अंदरूनी विवाद के बीच पटना स्नातक सीट से उम्मीदवार नीरज कुमार ने मोकामा विधायक अनंत सिंह पर पलटवार किया है. उन्होंने दावा किया कि अनंत सिंह से मतभेद होने के बावजूद उन्होंने अपने बूथ पर हर चुनाव में जेडीयू उम्मीदवारों को जीत दिलाने में भूमिका निभाई.शनिवार को मीडिया से बातचीत में नीरज कुमार ने कहा कि वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सम्मान करते हैं और उनके खिलाफ बयानबाजी बर्दाश्त नहीं करते. उन्होंने कहा कि बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है और जेडीयू ने सरकार के साथ खड़े रहने का निर्णय लिया है. ऐसे में सरकार के खिलाफ बोलने वालों का विरोध करना उनका नैतिक दायित्व है.वोटों के आंकड़े गिनाकर किया पलटवारनीरज कुमार ने 2020 और 2025 के मोकामा विधानसभा चुनाव के आंकड़े सामने रखे. उनके मुताबिक,2020 में जेडीयू प्रत्याशी राजीव लोचन सिंह को उनके बूथ पर 264 वोट मिले थे,जबकि अनंत सिंह को 244 वोट मिले. वहीं,2025 में जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह को 437 और राजद की बीना देवी को 197 वोट मिले.उन्होंने लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि 2019 में ललन सिंह को उनके बूथ पर 399 वोट मिले थे,जबकि नीलम देवी को 171 वोट मिले. 2024 में ललन सिंह को 611 और राजद की अनिता देवी को 22 वोट मिलने का दावा भी उन्होंने किया.प्रचार में नहीं जाने की बात स्वीकारनीरज कुमार ने कहा कि उन्होंने अनंत सिंह का विरोध नहीं किया,बल्कि उनके प्रचार में शामिल नहीं हुए. उन्होंने पटना स्नातक सीट पर अपनी जीत को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि उनकी सीट पर कोई परेशानी नहीं है.अनंत सिंह पर एके-47 मामले में फंसाने के आरोपों को भी नीरज ने खारिज किया. उन्होंने एमएलसी चुनाव में अनंत सिंह के जन सुराज प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन करने को नीतीश कुमार और एनडीए को कमजोर करने की कोशिश बताया. हालांकि,ये सभी नीरज कुमार के अपने दावे और आरोप हैं.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना : नीट पुनर्परीक्षा 2026 में कथित फर्जीवाड़े को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ने बायोमीट्रिक सत्यापन का टेंडर लेने वाले प्रमोद कुमार को गिरफ्तार कर लिया है. उस पर कथित तौर पर मूल परीक्षार्थियों की जगह स्कॉलर यानी फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाने में मिलीभगत का आरोप है. गिरफ्तारी नौ अक्टूबर को हुई, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.जांच के अनुसार,प्रमोद कुमार ने लखीसराय जिले में नीट परीक्षा के बायोमीट्रिक सत्यापन का टेंडर लिया था. आरोप है कि पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में गड़बड़ी कर फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठाने की व्यवस्था की गई. ईओयू अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका और कथित धांधली के तरीके की जांच कर रही है.21 जून को सामने आया था मामलालखीसराय के केंद्रीय विद्यालय,खगौर परीक्षा केंद्र पर 21 जून 2026 को नीट पुनर्परीक्षा के दौरान मूल अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाने की कोशिश का मामला सामने आया था. इस संबंध में किऊल थाना में कांड संख्या 64/2026 दर्ज किया गया. मामले में परीक्षार्थियों,कथित फर्जी अभ्यर्थियों,बायोमीट्रिक ऑपरेटरों और सुपरवाइजर समेत 27 लोगों को नामजद किया गया था. बाद में जांच ईओयू को सौंप दी गई.कई लोगों की भूमिका की जांचईओयू के मुताबिक,पूछताछ के दौरान प्रमोद कुमार ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है. एजेंसी का दावा है कि उसने विकास कुमार और राहुल के माध्यम से बायोमीट्रिक सत्यापन का टेंडर लेने की बात बताई. इसके बाद मो. शहजाद,सुबोध और रोहित कुमार उर्फ मुरारी की कथित मिलीभगत से बायोमीट्रिक ऑपरेटरों की मदद लेकर फर्जी अभ्यर्थियों को प्रवेश दिलाने का आरोप है.ईओयू इस मामले से जुड़े अन्य दो केसों की भी जांच कर रही है. एजेंसी के अनुसार,पहले गिरफ्तार 14 आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है. अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए संभावित नेटवर्क और अन्य संदिग्धों की भूमिका खंगाली जा रही है. आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना : केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है. पटना के बापू सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय सेवा, चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में उन्होंने कहा कि बिहार में एक दौर ऐसा रहा, जब जाति और 'डिवाइड एंड रूल' की राजनीति ने शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा. साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में किए गए प्रयासों का उल्लेख किया.रटने के बजाय नए विचारों पर जोरकेंद्रीय मंत्री ने नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रटकर परीक्षा पास करना या नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए. विद्यार्थियों में सोचने-समझने की क्षमता,रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति विकसित करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि आज का दौर ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का है,जहां एक नया विचार भी बड़े उद्योग की नींव बन सकता है. बच्चों को सवाल पूछने,प्रयोग करने और अपनी प्रतिभा निखारने के अवसर मिलने चाहिए.95,195 स्कूलों की भागीदारी पर जताई खुशीसमारोह में बिहार के सभी38जिलों के95,195स्कूलों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए जोशी ने प्रसन्नता जताई. उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर देती हैं. पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.2047 के विकसित भारत में युवाओं की भूमिकाप्रह्लाद जोशी ने कहा कि वर्ष2047में भारत की स्वतंत्रता के100वर्ष पूरे होंगे. उस समय देश के विकास में आज के युवाओं की अहम भूमिका होगी. इसके लिए विद्यार्थियों को ज्ञान,कौशल और नए विचारों से लैस करना आवश्यक है.अभिभावकों से खास अपीलकेंद्रीय मंत्री ने माता-पिता से बच्चों पर अपनी पसंद का करियर थोपने से बचने की अपील की. उन्होंने कहा कि हर बच्चे की रुचि और प्रतिभा अलग होती है. अभिभावकों को बच्चों की क्षमता पहचानकर उन्हें पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए. शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री और नौकरी नहीं,बल्कि बच्चों को स्वतंत्र सोच और अपनी पहचान बनाने में सक्षम करना भी होना चाहिए.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना : राजधानी पटना में राजेंद्रनगर टर्मिनल ओवरब्रिज के पास शनिवार और रविवार को ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है. मेट्रो निर्माण और सड़क मरम्मत के काम को देखते हुए 10 और 11 अक्टूबर को ट्रायल ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा. इस दौरान अलग-अलग दिशाओं में वाहनों की आवाजाही रोकी जाएगी. ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.शनिवार को बहादुरपुर से पटना जाने वाली लेन बंद10अक्टूबर,शनिवार को बहादुरपुर से पटना की ओर जाने वाली लेन पर वाहनों का परिचालन रोका जाएगा. इस दौरान वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग और मौके पर लागू यातायात व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ना होगा. राजेंद्रनगर टर्मिनल ओवरब्रिज के आसपास से गुजरने वाले लोगों को समय लेकर घर से निकलने की सलाह दी गई है.रविवार को दूसरी दिशा में रहेगा डायवर्जन11अक्टूबर,रविवार को पटना से बहादुरपुर की ओर जाने वाली लेन पर ट्रायल डायवर्जन लागू रहेगा. इस दिशा में वाहनों की आवाजाही प्रभावित होगी. वैशाली गोलंबर और राजेंद्रनगर टर्मिनल के आसपास यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी.छठ से पहले रात में बंद हो सकता है ओवरब्रिजरिपोर्ट के अनुसार,दुर्गा पूजा के बाद और छठ से पहले राजेंद्रनगर ओवरब्रिज पर मुख्य मरम्मत कार्य कराने की योजना है. इसके लिए पुल को लगातार10से12दिनों तक प्रत्येक रात बंद रखने का प्रस्ताव है. प्रस्तावित समय रात10बजे से सुबह6बजे तक है.मेट्रो निर्माण और सड़क मरम्मत के लिए कामरात में पुल के नीचे सड़क की मरम्मत के साथ मेट्रो निर्माण में इस्तेमाल होने वाली टीबीएम मशीन की आवाजाही से जुड़े कार्य किए जाएंगे. वाहन चालकों को सलाह है कि यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लेकर निकलें,ताकि जाम और देरी से बचा जा सके.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना:बिहार की अर्थव्यवस्था में पिछले13वर्षों के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव आया है. राज्य में खेती,वानिकी और मछलीपालन की तुलना में उद्योग से जुड़े क्षेत्रों की हिस्सेदारी बढ़ गई है. योजना एवं विकास विभाग के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार,वर्ष2024-25में राज्य के सकल मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में उद्योग से जुड़े द्वितीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी23.57प्रतिशत रही,जबकि कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी22.37प्रतिशत दर्ज की गई.राज्य की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र अब भी सबसे आगे है. वर्ष2024-25में सेवा क्षेत्र का योगदान54.07प्रतिशत रहा. इसमें व्यापार,परिवहन,बैंकिंग,संचार,होटल,लोक प्रशासन और अन्य सेवाएं शामिल हैं.*9.92लाख करोड़ रुपये रही अर्थव्यवस्था*आंकड़ों के मुताबिक,वर्ष2024-25में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) चालू कीमतों पर9.92लाख करोड़ रुपये रहा. इसी अवधि में खेती,वानिकी और मछलीपालन का योगदान लगभग2.15लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया. वहीं,निर्माण,विनिर्माण,बिजली और पानी की आपूर्ति जैसी गतिविधियों को शामिल करने वाले द्वितीयक क्षेत्र का योगदान करीब2.23लाख करोड़ रुपये रहा.*13वर्षों में बदली आर्थिक तस्वीर*वर्ष2011-12में बिहार के जीएसवीए में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग25.7प्रतिशत थी,जो2024-25में घटकर22.37प्रतिशत रह गई. इसके विपरीत,उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी18.8प्रतिशत से बढ़कर23.57प्रतिशत हो गई. सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी55.5प्रतिशत से घटकर54.07प्रतिशत पर पहुंची,लेकिन यह सबसे बड़ा क्षेत्र बना हुआ है.*रोजगार और निवेश पर नजर*उद्योग की बढ़ती हिस्सेदारी बिहार के आर्थिक ढांचे में बदलाव का संकेत है. हालांकि,इसका वास्तविक लाभ रोजगार,निवेश और लोगों की आय में कितना बढ़ेगा,यह आने वाले वर्षों में स्पष्ट होगा. कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाना भी राज्य के विकास के लिए अहम बना रहेगा.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना :राजधानी पटना के जेडी वीमेंस कॉलेज में विशेष विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में प्रोफेसर और कर्मचारियों का प्रदर्शन शनिवार को तेज हो गया. प्रदर्शनकारी अधिनियम को वापस लेने और अपनी मांगों पर सरकार से पुनर्विचार करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए. स्थिति को देखते हुए कॉलेज परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई.प्रदर्शन में शामिल महिला प्रोफेसरों की प्रमुख मांग है कि उन्हें1976के अधिनियम के तहत ही रखा जाए. वे2026के अधिनियम के तहत प्रस्तावित व्यवस्था में शामिल नहीं होना चाहती हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और अधिनियम को लेकर अपना फैसला वापस लेना चाहिए.*पुलिस की कार्रवाई से बढ़ा विवाद*प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर मौके से ले गई. इस दौरान कुछ प्रोफेसरों ने पुलिस की गाड़ी रोकने की कोशिश की,जिसके बाद सड़क पर हंगामे की स्थिति बन गई. घटनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी के बीच काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा.प्रदर्शनकारी प्रोफेसरों ने आरोप लगाया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से लोकभवन की ओर जा रहे थे,लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया. उनका यह भी आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और मारपीट की. महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया है. हालांकि,इन आरोपों पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है.*सरकार के फैसले पर टिकी नजर*प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर है. अधिनियम के प्रावधानों और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण आने के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
Patna : पटना से दिल्ली जाने वाले रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है. दिल्ली में विपक्षी दलों के आंदोलन के कारण रद्द की गईं ट्रेनें शनिवार को फिर से बहाल कर दी गई है. इससे दिल्ली जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिली है. पूर्व मध्य रेलवे ने ट्रेनों का परिचालन दोबारा शुरू होने की पुष्टि की है.रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चन्द्र के अनुसार,बहाल की गई ट्रेनें अपने निर्धारित समय के अनुसार संबंधित स्टेशनों से गंतव्य के लिए रवाना होंगी. इससे उन यात्रियों को सुविधा मिलेगी,जिनकी यात्रा ट्रेनें रद्द होने के कारण प्रभावित हुई थी.*तेजस राजधानी और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस भी शामिल*बहाल की गई ट्रेनों में राजेंद्र नगर से नई दिल्ली जाने वाली तेजस राजधानी एक्सप्रेस (12309)और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस (12393)शामिल हैं. इनके अलावा अमृत भारत एक्सप्रेस (22361)तथा इस्लामपुर से चलने वाली मगध एक्सप्रेस (20801)का परिचालन भी फिर से शुरू कर दिया गया है.इन ट्रेनों के बहाल होने से बिहार से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी. आंदोलन के कारण ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बदलनी पड़ रही थी. अब परिचालन शुरू होने से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है.*यात्रा से पहले ट्रेन का स्टेटस जरूर जांचें*रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि स्टेशन के लिए घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन के परिचालन की स्थिति और समय की जानकारी आधिकारिक रेलवे माध्यमों से जरूर जांच लें. इससे अंतिम समय में होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है. यात्रियों को अपने टिकट और यात्रा संबंधी जानकारी भी पहले से तैयार रखने की सलाह दी गई है.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना : बिहार के सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के लिए बड़ी खबर है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 10 अक्टूबर 2026 को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत करीब 1.08 करोड़ लाभुकों के बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी. नवरात्र से पहले पेंशन की राशि मिलने से बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है.1.08 करोड़ लाभुकों को मिला फायदाप्राप्त जानकारी के अनुसार,मुख्यमंत्री ने पटना स्थित 1 अणे मार्ग के संकल्प सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पेंशन की राशि हस्तांतरित की.इस योजना का उद्देश्य पात्र लाभुकों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है,ताकि वे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा कर सकें.400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये हुई पेंशनबिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की मासिक राशि में बढ़ोतरी करते हुए इसे 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया है.इससे पात्र बुजुर्गों,विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों को पहले की तुलना में अधिक आर्थिक सहायता मिल रही है.त्योहार के समय यह राशि घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकती है.हर महीने 10 तारीख को भुगतानसरकारी व्यवस्था के तहत पेंशन की राशि प्रत्येक महीने की 10 तारीख को लाभुकों के बैंक खातों में भेजी जाती है.भुगतान की जानकारी के लिए लाभुक बैंक से प्राप्त एसएमएस देख सकते हैं.इसके अलावा एटीएम,बैंक शाखा या ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) के माध्यम से भी खाते का बैलेंस चेक किया जा सकता है.खाते में पैसा नहीं आए तो क्या करें?यदि किसी लाभुक के खाते में राशि नहीं दिख रही है,तो उन्हें बैंक बैलेंस की जांच करनी चाहिए.जरूरत पड़ने पर बैंक या संबंधित ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क कर भुगतान की स्थिति पता कर सकते हैं.पिछले महीने सितंबर में भी 1.05 करोड़ से अधिक पेंशनधारियों के खातों में राशि भेजी गई थी.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना : बदलाव की शुरुआत हमेशा एक नए आइडिया और जोखिम लेने से होती है, बिल्कुल किसी नए स्टार्टअप की तरह वैशाली जिले के देसरी प्रखंड स्थित रामपुर मधौल गांव के किसान सतवीर सिंह की कहानी भी किसी सफल कृषि उद्यमी से कम नहीं है. उन्होंने वर्ष 2022 में पारंपरिक खेती की लीक से हटकर, ड्रैगन फ्रूट की खेती के रूप में अपना एक नया एग्री-स्टार्टअप शुरू करने का साहस जुटाया. लोगों के ताने और स्टार्टअप का शुरुआती संघर्षकिसी भी नए बिज़नेस की तरह सतवीर सिंह को भी शुरुआत में लोगों की शंकाओं और सवालों का सामना करना पड़ा. सतवीर बताते हैं कि जब उन्होंने साल 2022 में इसकी खेती शुरू की थी, तब गांव के लोग इस अनजान पौधे को देखकर तरह-तरह की बातें करते थे. लोगों को लगता था कि उन्होंने बेकार से जंगली सीज (कैक्टस) का पेड़ लगा लिया है. लेकिन सतवीर ने लोगों के इन तानों से हिम्मत नहीं हारी. उन्हें अपने आइडिया पर पूरा भरोसा था. फिर एक वक्त ऐसा आया जब पौधों में फल आने लगे और लाल रंग का ड्रैगन फ्रूट पक कर तैयार हुआ. तब जाकर लोगों को इसकी असली पहचान मिली और सवाल उठाने वालों की बोलती बंद हो गई. सतवीर के लिए यह सिर्फ खेती का फल नहीं था, बल्कि उनके धैर्य, मेहनत और विश्वास की जीत थी. प्रोडक्शन में शानदार ग्रोथ और बिज़नेस का विस्तारएक सफल स्टार्टअप की तरह ही सतवीर सिंह के उत्पादन में भी शानदार ग्रोथ देखने को मिली है. वह बताते हैं कि शुरुआती साल में एक पोल से लगभग 5 किलोग्राम ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन मिला था. आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और अब उनके हर पोल से 20 से 25 किलोग्राम तक फल निकल रहा है. फिलहाल उनके इस फार्म में 100 पोल पूरी तरह से उत्पादन दे रहे हैं. इस बेहतरीन सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने अब एक एकड़ में अपनी इस उन्नत खेती का विस्तार भी कर लिया है. सरकार से मिला बेहतर ट्रेनिंगअपने इस कृषि बिज़नेस मॉडल को बेहतर तरीके से समझने और आगे बढ़ाने के लिए सतवीर सिंह को बिहार सरकार का भी पूरा साथ मिला. आत्मा वैशाली के माध्यम से उन्हें ड्रैगन फ्रूट की उन्नत खेती सीखने के लिए किशनगंज में ट्रेनिंग पर भेजा गया. इसके अलावा, वहां से उन्हें नए पौधे भी उपलब्ध कराए गए, जिन्हें उन्होंने अलग से लगाया है. सतवीर सिंह की यह सफल कहानी उन सभी युवाओं और किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो कुछ नया करने की चाहत तो रखते हैं, लेकिन लोगों की बातों से डर कर पीछे हट जाते हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों और खुद के इनोवेशन पर भरोसा हो, तो अनजान रास्ते भी एक दिन सफलता और पहचान का बहुत बड़ा ब्रांड बन सकते हैं.
पटना:बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव की तस्वीर नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद साफ हो गई है। कुल 164 अभ्यर्थियों ने नामांकन दाखिल किया था। जांच के दौरान 12 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र रद्द कर दिए गए,जबकि अंतिम दिन दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपना नाम वापस ले लिया। अब कुल 150 उम्मीदवार चुनावी मैदान में रह गए हैं।इनमें स्नातक कोटे की चार सीटों पर 90 और शिक्षक कोटे की चार सीटों पर 60 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। स्नातक सीटों में दरभंगा से सबसे अधिक 40 उम्मीदवार मैदान में हैं। पटना से 18,तिरहुत से 17 और कोसी से 15 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।वहीं,शिक्षक कोटे की सीटों में पटना और सारण से 18-18,दरभंगा से 13 और तिरहुत से 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। नाम वापस लेने वालों में पटना शिक्षक सीट की अर्चिता प्रकाश और सारण शिक्षक सीट के जयराम राय शामिल हैं।पटना और सारण सीट परNDAकी चुनौतीविधान परिषद चुनाव में पटना और सारण शिक्षक सीटें राजनीतिक रूप से चर्चा में हैं। पटना शिक्षक सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार के सामने जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह चुनौती पेश कर रहे हैं। इस मुकाबले को लेकर तब राजनीतिक हलचल बढ़ गई,जब जेडीयू विधायक अनंत सिंह के अनुज सिंह के समर्थन में खड़े होने की बात सामने आई।उधर,सारण शिक्षक सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रवक्ता रामपुकार सिन्हा की उम्मीदवारी नेNDAके भीतर मतभेदों को उजागर किया है। पार्टी के चार में से तीन विधायकों के उनके समर्थन में होने की चर्चा है।आठ सीटों पर होने वाला यह चुनावNDAके लिए एकजुटता और आपसी समन्वय की परीक्षा माना जा रहा है। मतदान 23 अक्टूबर को होगा,जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
Patna: पटना हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान निचली अदालत के एक निर्णय पर गहरी नाराजगी जताई है. पारिवारिक अदालत (फैमिली कोर्ट),पटना की अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश के फैसले को पूरी तरह रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के कामकाज और कानूनी ज्ञान पर बेहद सख्त टिप्पणी की है. ये मामला वर्ष 2010 में संपन्न हुए एक ईसाई जोड़े के विवाह और 2014 में दायर तलाक की याचिका से जुड़ा है. निचली अदालत ने इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट,1872 की धारा 10(1) के तहत तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था. इस निर्णय के विरुद्ध महिला ने पटना हाईकोर्ट में मिसलेनियस अपील दायर की. इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट की न्यायाधीश ने जिस कानून इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट का हवाला देकर तलाक की याचिका रद्द की,वह भारत में ईसाई जोड़ों के तलाक के मामलों पर लागू ही नहीं होता. भारत में ईसाई समुदाय के तलाक और वैवाहिक विवादों का निस्तारण'डाइवोर्स एक्ट,1869'के तहत किया जाता है. कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ कानून की अनभिज्ञता नहीं,बल्कि न्यायाधीश की गंभीर लापरवाही है. कोर्ट ने हैरानी जताते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि फैसला सुनाने से पहले संबंधित कानून की जांच तक नहीं की गई. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत की इस कार्यप्रणाली और अज्ञानता पर सख्त ऐतराज जताते हुए अत्यंत गंभीर और कड़ी टिप्पणी दर्ज की.यह नोट करना दुर्भाग्यपूर्ण है कि पटना स्थिति फैमिली कोर्ट की अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश के पद पर तैनात एक न्यायिक अधिकारी ने मुकदमे का फैसला करने के लिए लागू होने वाले कानून का सत्यापन किए बिना ही एक वाद में आदेश पारित कर दिया. यह न केवल अज्ञानता है,बल्कि संबंधित ट्रायल जज की ओर से सरासर लापरवाही है. यदि ऐसा होता है,तो हमें बिहार राज्य में न्यायपालिका के भविष्य को लेकर डर लगता है.हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि महिला वर्ष 2010 से ही अपने पति से अलग रह रही है. भले ही महिला व्यभिचार का आरोप साबित न कर सकी हो,लेकिन दो वर्ष से अधिक समय तक लगातार अलग रहने के आधार पर वह तलाक पाने की हकदार है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के खारिज करने वाले फैसले को रद्द कर दिया और दंपत्ति के विवाह को औपचारिक रूप से विघटित कर दिया. तलाक की मंजूरी के साथ ही स्थायी भरण-पोषण के निर्धारण के लिए हाईकोर्ट ने पति की वास्तविक संपत्तियों की जांच का जिम्मा एक विशेष अधिकारी को सौंपा. विशेष अधिकारी की गोपनीय जांच रिपोर्ट से बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. पति,जो खुद को एक मामूली आय वाला व्यक्ति और परोपकारी बता रहा था,वास्तव में करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला.इस जांच में पाया गया कि पाटलिपुत्र कॉलोनी जैसी पॉश लोकेशन में उसका 9,322 वर्ग फीट का भूखंड और मकान स्थित है. इसके अतिरिक्त,उसने पटना के मौजा-मैनपुरा में स्थित अपनी 8.36 डिसमिल जमीन (जिसकी कीमत बैंक मूल्यांकन में ₹4 करोड़ दर्ज है) और ₹1.5 करोड़ की एफडी को'बैंक' के पास बंधक रखकर एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के लिए ₹9.80 करोड़ का कमर्शियल लोन दिलवाया था. पति के इस व्यापक वित्तीय साम्राज्य और करोड़ों की अचल संपत्तियों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने उसे एक संपन्न व्यक्ति करार दिया. पति के वास्तविक वित्तीय स्थिति पर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा रेस्पोंडेंट (पति) 4 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति का मालिक है. इसलिए,रेस्पोंडेंट एक संपन्न व्यक्ति है.महिला के मासिक खर्च (₹40,450) और पति के असली वित्तीय रसूख को देखते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पति अपनी पूर्व पत्नी को ₹50,00,000 (पचास लाख रुपये) की एकमुश्त स्थायी भरण-पोषण राशि 3 महीने के भीतर भुगतान करे. इस राशि के भुगतान के साथ ही दोनों पक्षों के बीच लंबित अन्य वैवाहिक मामले भी समाप्त माने जाएंगे.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
पटना:बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले एनडीए में आपसी खींचतान थमती नजर नहीं आ रही है. शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में हुई एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में गठबंधन की एकजुटता और सभी आठ उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई. लेकिन बैठक के बाद नेताओं के बयानों से अंदरूनी मतभेद फिर सामने आ गए.बीजेपी के विधान परिषद प्रत्याशी नवल किशोर यादव से जब मोकामा के जेडीयू विधायक अनंत सिंह को लेकर सवाल पूछा गया तो वह नाराज हो गए. उन्होंने कहा, 'जे न पूछे से खेसारी के दाल. अनंत सिंह आ फलना सिंह के बात करते हैं. कोई मुद्दा नहीं है तो ऐसे ही लटर-पटर बात करते हैं.'बयान देकर नवल किशोर यादव आगे बढ़ गए.दरअसल,अनंत सिंह ने बैठक से पहले और बाद में अपने रुख में बदलाव के संकेत नहीं दिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनसुराज समर्थित अनुज सिंह का समर्थन करेंगे. अनंत सिंह ने इसकी वजह जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार के साथ अपना राजनीतिक विरोध बताया. उनका कहना है कि नीरज कुमार ने पहले उनका विरोध किया था,इसलिए वह भी उनका विरोध करेंगे. उन्होंने यह भी दावा किया कि बैठक में चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनसे कोई बातचीत नहीं की.वहीं,मंत्री जमा खान ने अनंत सिंह को अपना भाई बताते हुए एनडीए में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि सभी मिलकर चुनाव जीतेंगे. मंत्री श्रवण कुमार ने दावा किया कि बैठक में सभी ने आठों उम्मीदवारों को जिताने का संकल्प लिया. उन्होंने चेतावनी दी कि एनडीए के विरोध में प्रचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी.मंत्री रामकृपाल यादव ने भी अनंत सिंह को पार्टी का वफादार सिपाही और बड़ा नेता बताया. हालांकि,अनंत सिंह के अनुज सिंह को समर्थन देने के ऐलान से पटना स्नातक सीट पर एनडीए की चुनौती बढ़ गई है. अब देखना होगा कि चुनाव से पहले गठबंधन नेतृत्व इस मतभेद को दूर कर पाता है या नहीं.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना:मानसिक स्वास्थ्य,भावनात्मक कल्याण और मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुक्रवार, 9अक्टूबर2026को पटना के महेंद्रू स्थित राजकीय मूक-बधिर बालक विद्यालय में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT)के समावेशी शिक्षा विभाग की ओर से किया गया.कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA)की डॉ. अनुभूति सिंह ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य,भावनात्मक संतुलन और नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने विभिन्न विषयों को रोचक और सहज तरीके से समझाया,ताकि विद्यार्थी इन महत्वपूर्ण मुद्दों को आसानी से समझ सकें और अपने जीवन में सकारात्मक आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित हों.सांकेतिक भाषा के जरिए विद्यार्थियों तक पहुंचा संदेशइस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि मूक-बधिर विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए सांकेतिक भाषा की व्यवस्था की गई थी. सीआरसी पटना की आईएसएल इंटरप्रेटर मोनिका सिंह ने डॉ. अनुभूति सिंह की बातों को सांकेतिक भाषा में विद्यार्थियों तक पहुंचाया. इससे विद्यार्थी कार्यक्रम में दी गई जानकारी को समझ सके और जागरूकता अभियान से जुड़ सके.कार्यक्रम मेंUNFPAके राहुल कुमार,समावेशी शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नावेद हसन खान,व्याख्याता विजय कुमार भास्कर और कुमारी अमृता सहित विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षक उपस्थित रहे.इस पहल का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों तक स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी सुलभ तरीके से पहुंचाना और उन्हें मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना रहा. कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को भावनात्मक कल्याण के महत्व और नशे से दूर रहने के संदेश से परिचित कराया गया.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना/सोनीपत: दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित सीजेपी प्रदर्शन से पहले बिहार,उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से राजधानी जाने वाली ट्रेनों को रद्द किए जाने का मामला गरमा गया है. इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को कोई नहीं रोक सकता.शुक्रवार को हरियाणा के सोनीपत स्थित कुंडली पहुंचे चिराग पासवान ने ट्रेनें रद्द होने के सवाल पर कहा कि आखिर कोई कितनी ट्रेनें रोक सकता है?कितनी कनेक्टिविटी बाधित की जा सकती है और कितनी सड़कों को जाम किया जा सकता है?उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं में दुनिया को रास्ता दिखाने की क्षमता है,जैसी क्षमता पिछली पीढ़ियों ने भी दिखाई थी.दरअसल,मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे सहित अन्य मांगों को लेकर सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का एलान किया है. प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है. इसी बीच रेलवे ने कई ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है,जिससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है.विरोध के बजाय बातचीत की सलाहइससे पहले गुरुवार को चिराग पासवान ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों को निर्वाचन आयोग से बातचीत करने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा था कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए,न कि रोजाना विरोध प्रदर्शन करके.चिराग ने माना कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है. हालांकि,उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्ष समाधान चाहता है या केवल हंगामा करना चाहता है. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है. राजनीतिक दल उससे मिलने का समय मांग सकते हैं,प्रतिनिधिमंडल के साथ अपनी शिकायतें रख सकते हैं और जवाब मांग सकते हैं.चिराग के बयान से चुनाव आयोग के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं.संजय कुमार की रिपोर्ट-