
डॉक्टर के बाद फर्जी सर्टिफिकेट वाले मेडिकल छात्र EOU की रडार पर
BIHAR NEWS:NEET में कथित धांधली और फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के मामले में आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है. अब तक डॉक्टरों और कथित बिचौलियों पर कार्रवाई के बाद फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर भी जांच एजेंसी की नजर है.छात्रों पर भी जांच एजेंसी की नजरजांच के दौरान अगर किसी छात्र के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए जाते हैं तो EOU उनके दस्तावेजों की गहन जांच करा सकती है. इसमें जाति, दिव्यांगता, आय या अन्य आरक्षण से जुड़े प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच शामिल हो सकती है. संबंधित विभागों और मेडिकल संस्थानों से भी प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जा सकता है.EOUफर्जी प्रमाणपत्र की जानकारी लगाएगीEOU यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि फर्जी प्रमाणपत्र किसी छात्र ने खुद बनवाया था या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था. जांच में यह भी देखा जा सकता है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने,सत्यापन कराने या दाखिले की प्रक्रिया में किसी व्यक्ति अथवा संस्थान की भूमिका तो नहीं रही.एजेंसी फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क की पड़ताल करेगीमामले में संदिग्ध छात्रों से पूछताछ के साथ उनके दाखिले से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं. एजेंसी फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी पड़ताल कर सकती है.जांच में प्रमाणपत्र फर्जी साबित होने पर छात्रों पर गिरेगी गाजअगर जांच में प्रमाणपत्र फर्जी साबित होते हैं तो संबंधित छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ उनके दाखिले पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और इस पूरे खेल में सहयोग करने वालों पर भी कार्रवाई की संभावना है.मेडिकल दाखिले के पूरे नेटवर्क का हो सकता खुलासाNEET से जुड़े इस मामले में अब जांच सिर्फ डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहने के संकेत हैं. EOU की अगली कार्रवाई से फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए मेडिकल दाखिले के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है.बिहार से वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार
