पटना :बिहार के सहरसा में पत्रकारों के साथ बदसलूकी के मामले में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन और युवा पत्रकार संघ के द्वारा बिहार के स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर डॉक्टर एस के आजाद के माफिया गिरी और पुराने कारनामों को लेकर शिकायत किया था. इसमें उनके सहरसा में रहने पर मामले की जांच प्रभावित होने की आशंका जताते हुए सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने का आरोप लगाया था. जिस पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल उन्हें सहरसा से हटाते हुए मुख्यालय बुला लिया गया है. हालांकि पत्रकार के साथ विवाद और पुराने मामले को लेकर अभी भी जांच चालू है और बहुत जल्द रिपोर्ट आने के बाद उनके ऊपर कठोर कार्रवाई करने की आश्वासन स्वास्थ्य विभाग के द्वारा दिया जा रहा है.
बता दें कि श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव मुकुंद कुमार सिंह और युवा पत्रकार संघ के अध्यक्ष कुंदन कुमार ने यूनियन के दर्जनों सदस्यों के साथ स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर डॉक्टर एसके आजाद और अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी के पुराने कारनामों को प्रमुखता से उनके सामने रखा और यह आरोप लगाया कि पहले भी उनके ऊपर कई अन्य मामले को लेकर आरोप लगे और जांच में क्या हुआ यह फाइलों में ही रह गई. इस बार भी ऐसा ही कुछ हो रहा है. डॉ. एसके आजाद अभी भी सहरसा अस्पताल में मौजूद हैं और सबूत मिटाने का प्रयास कर रहा है. जिस तरीके से अस्पताल में मारपीट का सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो गया, यह दुर्भाग्यपूर्ण है. सहरसा सदर अस्पताल में डॉक्टर एसके आजाद अपने गुंडों के साथ बैठकर माफिया गिरी कर रहा है. उन्हें तत्काल वहां से हटकर जांच शुरू किया जाए. नहीं तो पत्रकार और पब्लिक में आक्रोश बढ़ रहा है. कहीं कोई अप्रिय घटना न घट जाए.
यह वही डॉक्टर एसके आजाद हैं जिन्होंने इलाज के दौरान मरीज के पेट में चाकू छोड़ दिया था और तो और इलाज में लापरवाही के कारण मरीज की मौत के बाद पूरा सहरसा इनके खिलाफ प्रदर्शन करने लगा था. उस वक्त भी जिला प्रशासन के द्वारा जांच कमेटी बनाई गई थी और जांच में क्या हुआ यह पता नहीं. लेकिन डॉक्टर एसके आजाद आज भी सहरसा में पदस्थापित हैं. साथ ही यह भी आरोप उन पर लगाया गया था कि वह निजी अस्पताल भी चलाते हैं और सरकारी अस्पताल में आए मरीजों को बहला कर अपने अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए भेजते हैं.
वहीं अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी को लेकर भी स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत किया गया था कि पूर्णिया में जब वह अस्पताल प्रबंधन के रूप में तैनात थी, तब उन पर कई तरह के आरोप लगे थे और शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठे थे. वर्ष 2017 में हुई जांच के दौरान सिंपी कुमारी के शैक्षणिक अभिलेखों की भी जांच की गई थी. जांच रिपोर्ट के अनुसार,उन्होंने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से मानव भारती विश्वविद्यालय,सोलन (हिमाचल प्रदेश) से एमबीए की डिग्री प्राप्त की थी. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि यह नियमित पाठ्यक्रम नहीं था और डिग्री में हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन का उल्लेख नहीं था. इसके अलावा,संबंधित पद के लिए निर्धारित दो वर्ष के इंटर्नशिप अनुभव को लेकर भी सवाल उठाए गए थे. जांच समिति ने कथित तौर पर यह राय दी थी कि पद के लिए निर्धारित योग्यता पूरी नहीं होने की स्थिति में सिंपी कुमारी का उक्त पद पर बने रहना उचित नहीं है. फिर भी उनका ट्रांसफर सहरसा सदर अस्पताल में कैसे हो गया, यह भी पूरे जांच का विषय है.
पूरे मामले को गंभीरता से सुनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने यह आश्वासन दिया था कि बहुत जल्द पूरे मामले की पुनः जांच करवाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और पहली कार्रवाई के रूप में डॉ. एस के आजाद को वहां से हटा दिया गया. अब देखना होगा आगे की जांच में लापरवाही और भ्रष्टाचार में सहयोग करने वाले कितने चेहरे बेनकाब होते हैं.
हालांकि डॉक्टर एसके आजाद पर स्वास्थ्य विभाग ने जैसे ही शिकंजा कसना शुरू किया वैसे ही डॉक्टर संगठन की भी आवाज निकलने लगी. संगठन ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश को वापस लेने की धमकी देते हुए कहा कि अगर आदेश वापस नहीं होता है तो आंदोलन होगा.
डॉक्टर एसोसिएशन के द्वारा जारी किए गए इस बयान पर बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव मुकुंद कुमार सिंह ने कहा कि इस बार डॉक्टर की धमकी से सरकार भले ही झुक जाए पर पत्रकार नहीं झुकने वाला है. जो डॉक्टर खुद को बिहार के भगवान और मठाधीश समझते हैं उनके भी कारनामों की फाइलें पत्रकारों के पास है. एक-एक कर अगर खोलना शुरू कर दिया तो सरकार से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक बेनकाब हो जाएगा. वहीं युवा पत्रकार संघ के अध्यक्ष कुंदन कुमार ने कहा कि पत्रकारों के साथ बदसलूकी मामले में अगर उचित कार्रवाई नहीं होती है तो पत्रकार यूनियन उनके काले कारनामे को लेकर न्यायालय जाएगी. लेकिन किसी भी तरीके से इस बार मामले को ठंडे बस्ते में डालने नहीं दिया जाएगा.
