रांची: झारखंड की राजधानी रांची में कृषि क्षेत्र से जुड़ी एक नई पहल की जा रही है। कांके रोड स्थित कृषि भवन परिसर में राज्य का पहला कृषि संग्रहालय तैयार किया जा रहा है। कृषि निदेशालय परिसर स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मी निवास कोठी में बन रहा यह संग्रहालय कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनेगा। यहां खेती की प्राचीन परंपराओं से लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों तक की जानकारी एक ही परिसर में मिल सकेगी।

संग्रहालय में जैविक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, जैविक खाद बनाने की तकनीक, पॉलीहाउस फार्मिंग और ड्रिप इरिगेशन समेत कई आधुनिक कृषि पद्धतियों के मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य कृषि से जुड़ी तकनीकों को लोगों के लिए सरल, व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक तरीके से प्रस्तुत करना है।

प्रवेश द्वार पर दिखेगी ‘अन्नदाता’ की प्रतिमा

कृषि निदेशालय के निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज के अनुसार, संग्रहालय में प्रवेश करते ही वेस्ट मेटल से तैयार की जा रही अन्नदाता की प्रतिमा लोगों का ध्यान आकर्षित करेगी। इस प्रतिमा में गेहूं की बाली और कृषि औजारों के साथ किसान का प्रारूप उकेरा जा रहा है।

यह प्रतिमा खेती-किसानी और किसानों के योगदान को दर्शाएगी। इसके साथ ही संग्रहालय में प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय तक कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों को प्रदर्शित करने के लिए पुराने और आधुनिक कृषि उपकरण भी रखे जाएंगे।

जैविक खेती से ड्रिप इरिगेशन तक के मॉडल


संग्रहालय में कृषि की आधुनिक तकनीकों को समझाने के लिए कई तरह के मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

ऑर्गेनिक फार्मिंग: रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हुए जैविक तरीकों से खेती की जानकारी।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग: फसल उत्पादन के साथ पशुपालन जैसी गतिविधियों को जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं।
जैविक खाद निर्माण: जैविक कचरे से खाद तैयार करने की तकनीक और उसके उपयोग की जानकारी।
पॉलीहाउस फार्मिंग: नियंत्रित वातावरण में फसलों की खेती की तकनीक।
ड्रिप इरिगेशन: कम पानी में सिंचाई करने और जल संरक्षण के तरीकों का प्रदर्शन।
इन मॉडलों के जरिए विद्यार्थी और शोधकर्ता कृषि तकनीकों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। वहीं, किसानों और आम लोगों को भी आधुनिक खेती के विभिन्न विकल्पों की जानकारी मिलेगी।

झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप होगी खेती की जानकारी

झारखंड की भौगोलिक और कृषि संबंधी विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए संग्रहालय में पठारी क्षेत्रों में सीढ़ीदार खेती के मॉडल भी तैयार किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों में खेती के तरीकों को समझाया जाएगा।

इसके अलावा, खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की संभावनाओं को भी मॉडल के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा। पॉलीहाउस में खेती के विभिन्न स्वरूपों को भी यहां जगह दी जा रही है।

इससे कृषि विज्ञान के विद्यार्थियों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ खेती की अलग-अलग प्रणालियों को समझने का अवसर मिल सकेगा।

15 नवंबर से पहले तैयार करने का लक्ष्य

कृषि निदेशालय के निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने बताया कि संग्रहालय को 15 नवंबर से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। झारखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य के पहले कृषि संग्रहालय का उद्घाटन किए जाने की उम्मीद भी जताई जा रही है। यदि तय समय पर संग्रहालय तैयार हो जाता है, तो यह राज्य में कृषि शिक्षा, शोध और आधुनिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।

कृषि इतिहास और आधुनिक तकनीक का बनेगा संगम

रांची में तैयार हो रहा यह कृषि संग्रहालय झारखंड की कृषि विरासत और आधुनिक तकनीकों को एक साथ प्रस्तुत करेगा। यहां आने वाले लोगों को पुराने कृषि उपकरणों, खेती के बदलते तरीकों और नई तकनीकों के बारे में जानकारी मिल सकेगी। खास बात यह है कि संग्रहालय केवल कृषि विज्ञान के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम लोगों के लिए भी खेती की दुनिया को करीब से समझने का एक नया अवसर उपलब्ध करा सकता है।

रांची से राजेश पाठक की रिपोर्ट